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Bareilly News: प्लॉट बेचने का सौदा तय कर 20 लाख हड़पे, कंपनी निदेशकों पर रिपोर्ट
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बरेली। प्लॉट बेचने का सौदा तय कर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। मामले में कंपनी, उसके डायरेक्टर और सचिव के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
स्पान इन्फ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भरत कुमार अग्रवाल ने बताया कि सारनाथ इन्फ्रास्टक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक योगेश अग्रवाल और निदेशक अवनीश अग्रवाल ने कंपनी के 815 वर्ग गज के प्लॉट को बेचने का सौदा एक करोड़ 10 लाख में तय किया था। कंपनी की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कर आरओसी में जमा किया गया।
सितंबर 2012 में एग्रीमेंट हुआ। निदेशकों ने बताया कि बयाने में मिले दस लाख का चेक कहीं खो गया है। आप कंपनी को 20 लाख रुपये और दस लाख रुपये का चेक दे दीजिए। भरत ने 20 लाख नकद और 10 लाख का चेक योगेश को दिया। बैनामा करने के लिए कहा तो टालमटोल कर दी। बाद में पता चला कि प्लॉट पर दो मुकदमे चल रहे हैं।
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मुकदमों के निस्तारण के बाद भरत ने 2020 में रवि अग्रवाल से बैनामा करने के लिए कहा। न करने पर भरत ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट में रवि अग्रवाल ने जवाब दाखिल कर बताया कि योगेश और अवनीश ने एग्रीमेंट करने से पहले अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया था। आरोप है कि रवि अग्रवाल ने तरुण अग्रवाल और कमल झावर के साथ मिलकर फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये बनावटी त्यागपत्र बनाकर दाखिल कराया है। योगेश और अवनीश की मौत हो चुकी है। तरुण, रवि और कमल ने 20 लाख रुपये हड़प लिए। कंपनी का नाम बदलकर सारनाथ ऑटो जोन प्राइवेट लिमिटेड कर लिया है। अमर उजाला ब्यूरो
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स्पान इन्फ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भरत कुमार अग्रवाल ने बताया कि सारनाथ इन्फ्रास्टक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक योगेश अग्रवाल और निदेशक अवनीश अग्रवाल ने कंपनी के 815 वर्ग गज के प्लॉट को बेचने का सौदा एक करोड़ 10 लाख में तय किया था। कंपनी की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कर आरओसी में जमा किया गया।
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सितंबर 2012 में एग्रीमेंट हुआ। निदेशकों ने बताया कि बयाने में मिले दस लाख का चेक कहीं खो गया है। आप कंपनी को 20 लाख रुपये और दस लाख रुपये का चेक दे दीजिए। भरत ने 20 लाख नकद और 10 लाख का चेक योगेश को दिया। बैनामा करने के लिए कहा तो टालमटोल कर दी। बाद में पता चला कि प्लॉट पर दो मुकदमे चल रहे हैं।
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मुकदमों के निस्तारण के बाद भरत ने 2020 में रवि अग्रवाल से बैनामा करने के लिए कहा। न करने पर भरत ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट में रवि अग्रवाल ने जवाब दाखिल कर बताया कि योगेश और अवनीश ने एग्रीमेंट करने से पहले अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया था। आरोप है कि रवि अग्रवाल ने तरुण अग्रवाल और कमल झावर के साथ मिलकर फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये बनावटी त्यागपत्र बनाकर दाखिल कराया है। योगेश और अवनीश की मौत हो चुकी है। तरुण, रवि और कमल ने 20 लाख रुपये हड़प लिए। कंपनी का नाम बदलकर सारनाथ ऑटो जोन प्राइवेट लिमिटेड कर लिया है। अमर उजाला ब्यूरो