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नीला-पीला-हरा-गुलाबी कच्चा-पक्का रंग नहीं.. चाइनीज पापड़
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बरेली। होली के लिए अगर बाजार में खाने-पीने की चीजों की खरीददारी करने जा रहे हैं तो जरा सावधान हो जाएं। कहीं ऐसा न हो कि अच्छी-खासी रकम खर्च करके आप जो चीजें लेकर लौटें, वह आपकी सेहत ही चौपट करके रख दें। होली के लिए बाजार जिन खाने-पीने की चीजों से पटा हुआ है, उनकी गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है। ज्यादातर चीजों के बारे में दुकानदारों को ही नहीं पता है कि उसे बनाने में किन खाद्य वस्तुओं का इस्तेमाल किया गया है, न ये ब्योरा उनकी पैकिंग पर दर्ज है। रंगीन खाद्य वस्तुएं सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जा रही हैं क्योंकि उनकी पैकिंग पर यह गारंटी तक नहीं है कि उनमें इस्तेमाल रंग खाने योग्य है। खतरा इसलिए और ज्यादा है कि ज्यादातर नमकीन और कचरी-पापड़ चाइना निर्मित है और सरकारी सिस्टम ने इसे बगैर जांच के लिए बेचने की अनुमति दे रखी है।
सेहत के लिए हानिकारक खाद्य वस्तुएं बाजार में न बिकने पाएं लेकिन एफएसडीए हमेशा की तरह इस बार भी इस गोरखधंधे से बेखबर बना हुआ है। मुनाफाखोरी के चक्कर में होली के लिए करोड़ों कीमत के नमकीन और कचरी-पापड़ जैसे चाइनीज उत्पाद बाजार में उतारे गए हैं। इनकी पैकिंग पर न निर्माता या पैकर का नाम है न ये खाद्य पदार्थ एफएसएसआई से अनुमोदित हैं। यानी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ये खाने के लिए सुरक्षित हैं। पैकिंग पर विदेशी भाषा में प्रिंट होने से लोग यह भी नहीं समझ पा रहे हैं उन पर आखिर लिखा क्या है।
एफएसडीए वालों ने कहा है
अब एक-दो दिन रुक जाएं
शनिवार को अमर उजाला में सेहत के लिए हानिकारक रंगीन कचरी बाजार में बेचे जाने की खबर प्रकाशित होते ही सभी प्रमुख बाजारों से यह कचरी गायब हो गई है। थोक कारोबारियों ने शनिवार सुबह ही अपना स्टाक डंप कर दिया, साथ ही खुदरा विक्रेताओं को भी सलाह दी है कि वे खुले में रंगीन कचरी फिलहाल नहीं रखें। कुछ दुकानदारों ने बताया कि एफएसडीए के स्टाफ से संदेश दिया गया है कि फिलहाल एक-दो दिन यह माल बाजार में न बेचा जाए।
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50 करोड़ का कारोबार
रंगीन कचरी, नमकीन और पापड़ जैसी चीजों का इस बार होली पर 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अखाद्य रंगों से बनी ये चीजें स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं लेकिन इसमें मुनाफा ज्यादा होता है। ज्यादातर गरीब और अशिक्षित लोग इन चीजों को खरीदते हैं। जिस कच्चे माल से इसे तैयार किया जाता है वह भी असुरक्षित बताया जाता है।
चेतावनी के बाद मावे के चार नमूने भरे
एफएसडीए के अफसर रंगीन कचरी, मिठाई और मावे के नमूने लेने से बच रहे हैं। इस पर विभागीय अपर मुख्य सचिव अनिता भटनागर जैन ने एफएसडीए अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ न होने दिया जाए। इसमें लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने प्रतिदिन मावे के नमूने भरने की रिपोर्ट देने को कहा है। अपर मुख्य सचिव ने 19 मार्च तक मिलावट के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए थे लेकिन जिले में यह कागजों पर ही चलकर रह गया। मिलावटखोरों पर कार्रवाई नहीं की जगह विभागीय सांठगांठ सामने आ रही है। फटकार लगने के बाद जिले की टीम ने आंवला तहसील में एक बरफी का नमूना लिया। रामनगर और अलीगंज में महेश और धर्मेंद्र, फरीदपुर में खुदरा विक्रेता वीरेंद्र कुमार और आढ़ती प्राणसुख नाम से मावे के नमूने भरे हैं, इन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
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सेहत के लिए हानिकारक खाद्य वस्तुएं बाजार में न बिकने पाएं लेकिन एफएसडीए हमेशा की तरह इस बार भी इस गोरखधंधे से बेखबर बना हुआ है। मुनाफाखोरी के चक्कर में होली के लिए करोड़ों कीमत के नमकीन और कचरी-पापड़ जैसे चाइनीज उत्पाद बाजार में उतारे गए हैं। इनकी पैकिंग पर न निर्माता या पैकर का नाम है न ये खाद्य पदार्थ एफएसएसआई से अनुमोदित हैं। यानी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ये खाने के लिए सुरक्षित हैं। पैकिंग पर विदेशी भाषा में प्रिंट होने से लोग यह भी नहीं समझ पा रहे हैं उन पर आखिर लिखा क्या है।
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एफएसडीए वालों ने कहा है
अब एक-दो दिन रुक जाएं
शनिवार को अमर उजाला में सेहत के लिए हानिकारक रंगीन कचरी बाजार में बेचे जाने की खबर प्रकाशित होते ही सभी प्रमुख बाजारों से यह कचरी गायब हो गई है। थोक कारोबारियों ने शनिवार सुबह ही अपना स्टाक डंप कर दिया, साथ ही खुदरा विक्रेताओं को भी सलाह दी है कि वे खुले में रंगीन कचरी फिलहाल नहीं रखें। कुछ दुकानदारों ने बताया कि एफएसडीए के स्टाफ से संदेश दिया गया है कि फिलहाल एक-दो दिन यह माल बाजार में न बेचा जाए।
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50 करोड़ का कारोबार
रंगीन कचरी, नमकीन और पापड़ जैसी चीजों का इस बार होली पर 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अखाद्य रंगों से बनी ये चीजें स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं लेकिन इसमें मुनाफा ज्यादा होता है। ज्यादातर गरीब और अशिक्षित लोग इन चीजों को खरीदते हैं। जिस कच्चे माल से इसे तैयार किया जाता है वह भी असुरक्षित बताया जाता है।
चेतावनी के बाद मावे के चार नमूने भरे
एफएसडीए के अफसर रंगीन कचरी, मिठाई और मावे के नमूने लेने से बच रहे हैं। इस पर विभागीय अपर मुख्य सचिव अनिता भटनागर जैन ने एफएसडीए अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ न होने दिया जाए। इसमें लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने प्रतिदिन मावे के नमूने भरने की रिपोर्ट देने को कहा है। अपर मुख्य सचिव ने 19 मार्च तक मिलावट के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए थे लेकिन जिले में यह कागजों पर ही चलकर रह गया। मिलावटखोरों पर कार्रवाई नहीं की जगह विभागीय सांठगांठ सामने आ रही है। फटकार लगने के बाद जिले की टीम ने आंवला तहसील में एक बरफी का नमूना लिया। रामनगर और अलीगंज में महेश और धर्मेंद्र, फरीदपुर में खुदरा विक्रेता वीरेंद्र कुमार और आढ़ती प्राणसुख नाम से मावे के नमूने भरे हैं, इन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।