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मार्कशीट फर्जीवाड़े में फंसा डाटा एंट्री ऑपरेटर ने फंसाने का आरोप लगाया
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बरेली। प्रियदर्शनी कॉलेज ऑफ कंप्यूटर साइंस, नोएडा के इंजीनियरिंग के छात्र की फर्जी मार्कशीट तैयार करने के मामले में फंसे विश्वविद्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर ओम प्रकाश द्विवेदी ने खुद को बेकसूर बताया है। आरोप लगाए कि जांच अधिकारी ने राजनीतिक दुर्भावना से सारे अभिलेख नजरअंदाज करते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। उन्होंने कुलपति को अपना जवाब सौंप दिया है।
प्रियदर्शनी कॉलेज, नोएडा 1988 में विश्वविद्यालय से संबद्ध था। कॉलेज में इंजीनियरिंग कर रहे एक छात्र ने विश्वविद्यालय में सेंटिंग कर मार्कशीट पर फर्जी नंबर चढ़वा लिए। मामले में जांच हुई। सतर्कता विभाग ने विश्वविद्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर ओम प्रकाश द्विवेदी पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विश्वविद्यालय छात्र की डिग्री निरस्त करने का फैसला कर चुका है। इस संबंध में ऑपरेटर का पक्ष मांगा गया था। उसने कुलपति को जवाब सौंप दिया है। उसने खुद को बेकसूर बताते हुए जानबूझकर फंसाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि इस विषय में डाटा ऑपरेटर का कोई दायित्व नहीं। उसने सारे आरोपों से बरी करने की मांग की है। ऑपरेटर का क्या दायित्व होता है इस संबंध में पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, बरेली सेक्टर ने विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।
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प्रियदर्शनी कॉलेज, नोएडा 1988 में विश्वविद्यालय से संबद्ध था। कॉलेज में इंजीनियरिंग कर रहे एक छात्र ने विश्वविद्यालय में सेंटिंग कर मार्कशीट पर फर्जी नंबर चढ़वा लिए। मामले में जांच हुई। सतर्कता विभाग ने विश्वविद्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर ओम प्रकाश द्विवेदी पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विश्वविद्यालय छात्र की डिग्री निरस्त करने का फैसला कर चुका है। इस संबंध में ऑपरेटर का पक्ष मांगा गया था। उसने कुलपति को जवाब सौंप दिया है। उसने खुद को बेकसूर बताते हुए जानबूझकर फंसाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि इस विषय में डाटा ऑपरेटर का कोई दायित्व नहीं। उसने सारे आरोपों से बरी करने की मांग की है। ऑपरेटर का क्या दायित्व होता है इस संबंध में पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, बरेली सेक्टर ने विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।
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