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वर्ष 1998-99 में शाहजहांपुर में हुआ था बड़ा घोटाला- उद्यान विभाग के एक अफसर पर लटकी तलवार

Wed, 06 Feb 2019 01:40 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Wed, 06 Feb 2019 01:40 AM IST
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वर्ष 1998-99 में शाहजहांपुर में हुआ था बड़ा घोटाला- उद्यान विभाग के एक अफसर पर लटकी तलवार
बरेली। जिस तरह योगी सरकार इन्वेस्टर्स सम्मिट के दौरान सजावट के घपले में उद्यान विभाग के बड़े अफसरों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। उससे बरेली में उद्यान विभाग के एक बड़े अफसर पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। शाहजहांपुर में वर्ष 1998-99 में अपने कार्यकाल में इन अफसर ने जिला ग्राम्य अभिकरण में अनुसूचित जाति जनजाति के किसानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के नाम पर कराए गए उद्यानीकरण में 53.58 लाख रुपये की हेराफेरील का आरोपी बनाया गया था। इस मामले की विजीलेेंस जांच हुई थी। उसमें इन अफसर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। तबसे इन अफसर की फाइल बाबुओं के पटल पर दबी पड़ी है।
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विजीलेंस इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार त्यागी ने 26 दिसंबर 2009 को शाहजहांपुर सदर बाजार कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सुनिश्चित रोजगार योजना के अंतर्गत ग्रामीण अंचलों में सीमांत अनुसूचित जाति जनजाति के गरीब किसानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्यानिक फसलों के रोपड़ में भूमि एवं जल संरक्षण में बढ़ोत्तरी करें। वर्ष 1998-99 में जिला ग्राम्य अभिकरण शाहजहांपुर में बतौर जिला उद्यान अधिकारी इन अफसर को 53.58 लाख रुपये में हेराफेरी की गई। विजीलेंस जांच में भी पाया गया कि सुनिश्चित रोजगार योजना के अंतर्गत शाहजहांपुर के औद्यानीकरण दफ्तर में 53.58 लाख रुपये रुपये का जो अनुदान किसानों को देना था, उसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। 262 किसानों को चेकों के माध्यम से 2010632 रुपये अनुदान देना दर्शाया गया। मगर, 262 में से 158 किसानों को क्रास चेकों के माध्यम 1196040 रुपये और 106 किसानों को वियरर चेक के माध्यम से 814592 रुपये वितरित किए गए। जब बेतरतीब नमूनों के आधार पर 35 किसानों को मिलने वाली धनराशि का सत्यापन किया गया तो उसमें किसी भी किसान को चेक के रुपये (258842 रुपये ) उनके खातों में पहुंचे नहीं मिले। शाहजहांपुर के तत्कालीन जिला उद्यान अधिकारी समेत लेखाकार भी इसके लिए उत्तराई पाए गए। दो अफसरों और एक लेखाकार ने षड्यंत्र करके अनुदान की धनराशि 258842 रुपये किसानों को न देकर उसका गबन कर लिया। अब वह अफसर बरेली में ही बड़े पद पर कार्यरत हैं। शासन से इस मामले में इनके समेत विभाग से जुड़े तीन लोगों पर सख्त कार्रर्वाई कर सकती है।
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