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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, 10 माह पहले जिस अस्पताल में नसबंदी कराई उसी में दिया बेटी को जन्म
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Tue, 30 Oct 2018 12:25 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से एक दिहाड़ी मजदूर युवक पांचवीं बार पिता बन गया। दस महीने पहले जिस सीएचसी में उसने अपनी पत्नी की नसबंदी कराई थी, उसी में शनिवार को उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। सोमवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचकर उसने अधिकारियों को अपनी व्यथा सुनाई। सीएमओ युवक को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से क्षतिपूर्ति कराने की प्रक्रिया करा रहे हैं।
फतेहगंज पश्चिमी के गांव बंडिया निवासी 40 वर्षीय भीमसेन ने दस माह पहले फतेहगंज पश्चिमी सीएचसी में अपनी पत्नी की नसबंदी कराई थी। भीमसेन ने बताया कि चार बच्चे होने के बाद उसने और उसकी पत्नी ने नसबंदी कराने का फैसला किया था, लेकिन नसबंदी फेल हो जाने के कारण उसकी पत्नी फिर गर्भवती हो गई। उसने फतेहगंज पश्चिमी सीएचसी में ही शनिवार को बच्ची को जन्म दिया है। भीमसेन दिहाड़ी मजदूर है। कम आय होने के चलते पांच बच्चों को पालने की समस्या को लेकर वह सोमवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचा।
डॉक्टर पर मुकदमा कराना चाहता था भीमसेन
भीमसेन अपनी व्यथा सुनाने के लिए पहले सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता के पास पहुंचा था। वह संबंधित डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना चाहता था। वरिष्ठ डॉक्टरों के समझाने के बाद उसको सीएमओ कार्यालय में भेजा गया। सीएमओ के सामने पेश होने के बाद उसके कागजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए भीमसेन को जनांकिक एवं मूल्यांकन कक्ष में भेजा गया। जहां शरद जौहर ने सीएचसी से उसके कागज मंगवाए हैं।
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नसबंदी फेल होने के कुछ केस आते हैं। क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है। मैं पूरा मामला दिखवा रहा हूं। - डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ
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फतेहगंज पश्चिमी के गांव बंडिया निवासी 40 वर्षीय भीमसेन ने दस माह पहले फतेहगंज पश्चिमी सीएचसी में अपनी पत्नी की नसबंदी कराई थी। भीमसेन ने बताया कि चार बच्चे होने के बाद उसने और उसकी पत्नी ने नसबंदी कराने का फैसला किया था, लेकिन नसबंदी फेल हो जाने के कारण उसकी पत्नी फिर गर्भवती हो गई। उसने फतेहगंज पश्चिमी सीएचसी में ही शनिवार को बच्ची को जन्म दिया है। भीमसेन दिहाड़ी मजदूर है। कम आय होने के चलते पांच बच्चों को पालने की समस्या को लेकर वह सोमवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचा।
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डॉक्टर पर मुकदमा कराना चाहता था भीमसेन
भीमसेन अपनी व्यथा सुनाने के लिए पहले सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता के पास पहुंचा था। वह संबंधित डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना चाहता था। वरिष्ठ डॉक्टरों के समझाने के बाद उसको सीएमओ कार्यालय में भेजा गया। सीएमओ के सामने पेश होने के बाद उसके कागजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए भीमसेन को जनांकिक एवं मूल्यांकन कक्ष में भेजा गया। जहां शरद जौहर ने सीएचसी से उसके कागज मंगवाए हैं।
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नसबंदी फेल होने के कुछ केस आते हैं। क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है। मैं पूरा मामला दिखवा रहा हूं। - डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ