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संक्रमित कोख से गूंजी सेहतमंद किलकारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Sun, 14 Oct 2018 12:01 AM IST
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एचआईवी से संक्रमित महिला को दो बच्चों के बाद फिर मां बनने का सौभाग्य नसीब हुआ तो उसने नौ महीने तक अपनी कोख में पल रहे अंश को एचआईवी से बचाने के लिए हर जतन किया। आखिर में शुक्रवार को उसकी नार्मल डिलीवरी कराई गई। नए मेहमान की किलकारियां गूंजते ही मौजूद डॉक्टर व स्टाफ सभी चहक उठे। हालांकि डाक्टरों ने अब तक नवजात शिशु में एचआईवी की पुष्टि नहीं की है।
मामला पूरनपुर क्षेत्र का है। यहां की रहने वाली एचआईवी से संक्रमित प्रसूता को डिलीवरी के लिए गुरुवार देर रात साढे़ ग्यारह बजे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉ. कविता, स्टाफ नर्स सोनी समेत तीन लोगों ने सुरक्षित डिलीवरी कराई। प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया। दोनों स्वस्थ हैं। एक तरफ जहां परिवारीजनों के बीच खुशी का माहौल बना है, वहीं चिंता इस बात की भी सता रही है कि कहीं ब्लड जांच में नवजात की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव न आ जाए।
चिकित्सकों का दावा है कि अगर चिकित्सीय परामर्श लेकर संतान प्राप्ति की जाए, तो शिशु को एचआईवी से बचाया जा सकता है। केवल 30 फीसदी मामले ऐसे होते हैं जिनमें शिशु में जन्म के कुछ साल बाद उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर एचआईवी जैसे लक्षण दिखते हैं। महिला जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2007 से अब तक एचआईवी से संक्रमित 21 प्रसूताओं की यहां डिलीवरी कराई जा चुकी है।
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विस्तृत जांच को शिशु का भेजा जाएगा ब्लड सैंपल
डिलीवरी के बाद फौरी तौर पर शिशु में एचआईवी पॉजिटिव की पुष्टि नहीं की हुई है। चिकित्सकों के मुताबिक डेढ़ माह का होने पर नवजात का डीबीएल (ड्राइ ब्लड सैंपल) जांच के लिए दिल्ली के एम्स भेजा जाएगा। वहां विस्तृत जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद ही एचआईवी पॉजिटिव या निगेटिव की पुष्टि हो सकेगी।
जिला महिला अस्पताल में प्रिवेंशन ऑफ पेरेंट्स टू चाइल्ड ट्रांसमिशन सेंटर (पीपीटीसी) की काउंसलर शबाना बी ने बताया कि करीब दो साल पहले तबीयत खराब होने पर महिला को उसके परिवार वालों ने पूरनपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था जहां उसे ब्लड चढ़ाया था। ब्लड चढ़ाते वक्त वह एचआईवी पॉजिटिव हुई है। खून की व्यवस्था ब्लड बैंक से न करते हुए अलग से कराई गई थी, शायद इसी वजह से महिला खतरनाक बीमारी की शिकार हो गई।
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मामला पूरनपुर क्षेत्र का है। यहां की रहने वाली एचआईवी से संक्रमित प्रसूता को डिलीवरी के लिए गुरुवार देर रात साढे़ ग्यारह बजे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉ. कविता, स्टाफ नर्स सोनी समेत तीन लोगों ने सुरक्षित डिलीवरी कराई। प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया। दोनों स्वस्थ हैं। एक तरफ जहां परिवारीजनों के बीच खुशी का माहौल बना है, वहीं चिंता इस बात की भी सता रही है कि कहीं ब्लड जांच में नवजात की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव न आ जाए।
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चिकित्सकों का दावा है कि अगर चिकित्सीय परामर्श लेकर संतान प्राप्ति की जाए, तो शिशु को एचआईवी से बचाया जा सकता है। केवल 30 फीसदी मामले ऐसे होते हैं जिनमें शिशु में जन्म के कुछ साल बाद उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर एचआईवी जैसे लक्षण दिखते हैं। महिला जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2007 से अब तक एचआईवी से संक्रमित 21 प्रसूताओं की यहां डिलीवरी कराई जा चुकी है।
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विस्तृत जांच को शिशु का भेजा जाएगा ब्लड सैंपल
डिलीवरी के बाद फौरी तौर पर शिशु में एचआईवी पॉजिटिव की पुष्टि नहीं की हुई है। चिकित्सकों के मुताबिक डेढ़ माह का होने पर नवजात का डीबीएल (ड्राइ ब्लड सैंपल) जांच के लिए दिल्ली के एम्स भेजा जाएगा। वहां विस्तृत जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद ही एचआईवी पॉजिटिव या निगेटिव की पुष्टि हो सकेगी।
जिला महिला अस्पताल में प्रिवेंशन ऑफ पेरेंट्स टू चाइल्ड ट्रांसमिशन सेंटर (पीपीटीसी) की काउंसलर शबाना बी ने बताया कि करीब दो साल पहले तबीयत खराब होने पर महिला को उसके परिवार वालों ने पूरनपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था जहां उसे ब्लड चढ़ाया था। ब्लड चढ़ाते वक्त वह एचआईवी पॉजिटिव हुई है। खून की व्यवस्था ब्लड बैंक से न करते हुए अलग से कराई गई थी, शायद इसी वजह से महिला खतरनाक बीमारी की शिकार हो गई।