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मावा बाजारः 35 करोड़ देगी मावा मंडी - अब असली बिके चाहे मिलावटी
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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बरेली। होली पर गुझिया खाने-खिलाने की परंपरा इस बार मावा मंडी को करीब 35 करोड़ का कारोबार देगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। हमेशा की तरह होली से ऐन पहले इतने बड़े पैमाने पर मावा का उत्पादन मुमकिन नहीं है, लिहाजा इस बार भी मांग के मुताबिक मावे की आपूर्ति में मिलावट के गोरखधंधे की बड़ी हिस्सेदारी रहने की आशंका है। इस बार बड़ा सवाल यह भी है कि चुनाव के माहौल में प्रशासनिक अमला मिलावटी मावे की सप्लाई पर कितना अंकुश लगा पाएगा।
होली पर 35 करोड़ के मावे की सप्लाई का अनुमान हालांकि सिर्फ गुझिया की वजह से नहीं लगाया जा रहा। इसमें मिठाइयों में इस्तेमाल के लिए हलवाइयों को आमतौर पर होने वाली मावे की मात्रा भी शामिल है। यह भी काबिलेगौर है कि बरेली की मावा मंडी से आसपास के कई जिलों के साथ कुमाऊं मंडल में भी बड़े पैमाने पर मावे की सप्लाई होती है। बरेली जिले में मावे का अच्छा-खासा उत्पादन होता है। आंवला और फरीदपुर इसके प्रमुख केंद्र हैं। इसके अलावा बदायूं और चंदौसी से भी बड़े पैमाने पर मावा बरेली पहुंचता है। कुतुबखाना की मावा मंडी में भले ही देखने में कामकाज कम लगता है लेकिन असल में यहां हर रोज लाखों रुपये का कारोबार होता है। उत्पादक विभिन्न जिलों में सीधे भी मावा सप्लाई करते हैं।
कारोबारी बताते हैं कि इस बार होली पर मिठाई की मांग अपेक्षाकृत इसलिए भी ज्यादा रहेगी क्याेंकि चुनावी माहौल में प्रत्याशी होली के उपहार के तौर पर मिठाई का इस्तेमाल करेंगे। कारोबारी बताते हैं कि होली से तीन चार दिन पहले और एक सप्ताह बाद तक मावे की मांग टॉप पर रहती है। इसी अनुपात में मिलावट का बाजार भी गरम रहने की उम्मीद है। मावे की जितनी मांग का अनुमान इस बार लगाया जा रहा है, उतना दूध का उत्पादन यहां नहीं है। इसलिए साफ है कि मिठाई बाजार में बड़े पैमाने पर मिलावटी मावा खपाया जाएगा।
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बढ़ गई मावे की मांग और मूल्य
बरेली की मावा मंडी में हर दिन मांग में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसलिए मिलावटी मावे की आमद भी बढ़ती जा रही है। मिलावट रोकने के लिए एफएसडीए की टीम अभी तक कुछ नहीं कर पाई है। इस बीच बढ़ती मांग के कारण मंडी में मावे का दाम सवा दो सौ रुपये किलो तक हो गया है। मिठाई विक्रेता बताते हैं कि पिछले महीने यही मावा करीब डेढ़ सौ रुपये में बिक रहा था।
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होली पर 35 करोड़ के मावे की सप्लाई का अनुमान हालांकि सिर्फ गुझिया की वजह से नहीं लगाया जा रहा। इसमें मिठाइयों में इस्तेमाल के लिए हलवाइयों को आमतौर पर होने वाली मावे की मात्रा भी शामिल है। यह भी काबिलेगौर है कि बरेली की मावा मंडी से आसपास के कई जिलों के साथ कुमाऊं मंडल में भी बड़े पैमाने पर मावे की सप्लाई होती है। बरेली जिले में मावे का अच्छा-खासा उत्पादन होता है। आंवला और फरीदपुर इसके प्रमुख केंद्र हैं। इसके अलावा बदायूं और चंदौसी से भी बड़े पैमाने पर मावा बरेली पहुंचता है। कुतुबखाना की मावा मंडी में भले ही देखने में कामकाज कम लगता है लेकिन असल में यहां हर रोज लाखों रुपये का कारोबार होता है। उत्पादक विभिन्न जिलों में सीधे भी मावा सप्लाई करते हैं।
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कारोबारी बताते हैं कि इस बार होली पर मिठाई की मांग अपेक्षाकृत इसलिए भी ज्यादा रहेगी क्याेंकि चुनावी माहौल में प्रत्याशी होली के उपहार के तौर पर मिठाई का इस्तेमाल करेंगे। कारोबारी बताते हैं कि होली से तीन चार दिन पहले और एक सप्ताह बाद तक मावे की मांग टॉप पर रहती है। इसी अनुपात में मिलावट का बाजार भी गरम रहने की उम्मीद है। मावे की जितनी मांग का अनुमान इस बार लगाया जा रहा है, उतना दूध का उत्पादन यहां नहीं है। इसलिए साफ है कि मिठाई बाजार में बड़े पैमाने पर मिलावटी मावा खपाया जाएगा।
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बढ़ गई मावे की मांग और मूल्य
बरेली की मावा मंडी में हर दिन मांग में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसलिए मिलावटी मावे की आमद भी बढ़ती जा रही है। मिलावट रोकने के लिए एफएसडीए की टीम अभी तक कुछ नहीं कर पाई है। इस बीच बढ़ती मांग के कारण मंडी में मावे का दाम सवा दो सौ रुपये किलो तक हो गया है। मिठाई विक्रेता बताते हैं कि पिछले महीने यही मावा करीब डेढ़ सौ रुपये में बिक रहा था।