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फिर बच्चा चोरी : अस्पताल में बेटे की जगह थमाई बेटी, हंगामा
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बरेली। रामपुर के एक परिवार ने 21 दिन पहले प्री मैच्योर डिलीवरी के बाद पैदा हुए बेटे को यहां लाकर प्रेमनगर के एक अस्पताल में इन्क्यूबेेटर में रखवाया था, लेकिन मंगलवार को उनके हाथों में बेटे के बदले बेटी सौंपी गई तो घरवाले भड़क गए। काफी देर हंगामे के बाद पीड़ित परिवार एसएसपी के पास पहुंचा तो उन्होंने इंस्पेक्टर प्रेमनगर को जांच का निर्देश दिया। हालांकि देर शाम तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया।
रामपुर के कैमरी थाना क्षेत्र के गांव डंडिया निवासी राजेंद्र कुमार के मुताबिक उनकी पत्नी ममता ने रासडंडिया के एक निजी अस्पताल में 6 मई को बेटे को जन्म दिया था। डिलीवरी सात महीने में ही हो गई थी इसलिए बच्चा काफी कमजोर था। डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने बच्चे को यहां लाकर प्रेमनगर के अस्पताल के इन्क्यूबेटर में रखवा दिया था। 27 मई को अस्पताल प्रबंधन ने उनका बिल तैयार कर दिया और पैसा जमा कराने के बाद बच्चे को उनके सुपुर्द कर दिया।
राजेंद्र के मुताबिक उन्हें जो शिशु दिया गया वह बच्ची थी। उन्होंने विरोध जताया तो अस्पताल स्टाफ ने उनके परिवार से मारपीट की। हंगामे के बाद परिवार ने पहले थाना प्रेमनगर और फिर एसएसपी से शिकायत की। पुलिस को अस्पताल स्टाफ ने बताया कि उनके यहां बच्ची ही भर्ती कराई गई थी। कुछ कागज भी दिखाए जिन पर फीमेल लिखा था। दूसरी ओर राजेंद्र कुमार ने भी बच्चे को भर्ती कराने और उसकी जांच के कई ऐसे कागज दिखाए जिन पर मेल लिखा हुआ था। पुलिस से शिकायत के बाद कोई नतीजा नहीं निकला तो परेशानहाल परिवार देर शाम बगैर बच्ची लिए घर लौट गया।
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रामपुर के कैमरी थाना क्षेत्र के गांव डंडिया निवासी राजेंद्र कुमार के मुताबिक उनकी पत्नी ममता ने रासडंडिया के एक निजी अस्पताल में 6 मई को बेटे को जन्म दिया था। डिलीवरी सात महीने में ही हो गई थी इसलिए बच्चा काफी कमजोर था। डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने बच्चे को यहां लाकर प्रेमनगर के अस्पताल के इन्क्यूबेटर में रखवा दिया था। 27 मई को अस्पताल प्रबंधन ने उनका बिल तैयार कर दिया और पैसा जमा कराने के बाद बच्चे को उनके सुपुर्द कर दिया।
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राजेंद्र के मुताबिक उन्हें जो शिशु दिया गया वह बच्ची थी। उन्होंने विरोध जताया तो अस्पताल स्टाफ ने उनके परिवार से मारपीट की। हंगामे के बाद परिवार ने पहले थाना प्रेमनगर और फिर एसएसपी से शिकायत की। पुलिस को अस्पताल स्टाफ ने बताया कि उनके यहां बच्ची ही भर्ती कराई गई थी। कुछ कागज भी दिखाए जिन पर फीमेल लिखा था। दूसरी ओर राजेंद्र कुमार ने भी बच्चे को भर्ती कराने और उसकी जांच के कई ऐसे कागज दिखाए जिन पर मेल लिखा हुआ था। पुलिस से शिकायत के बाद कोई नतीजा नहीं निकला तो परेशानहाल परिवार देर शाम बगैर बच्ची लिए घर लौट गया।
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