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मूल्यांकनप्लास्टिक की कुर्सी पर होता है दर्द, गुरु जी चाहें अच्छी कुर्सी
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मूल्यांकन को आने वाले शिक्षकों की संख्या बुधवार को काफी बढ़ गई। इसके चलते मूल्यांकन केंद्र पर कुर्सियां कम हो गईं और फिर विश्वविद्यालय को खासा परेशान होना पड़ा। क्योंकि विश्वविद्यालय के पास प्लास्टिक की कुर्सियां उपलब्ध थीं और परीक्षक उन पर बैठना नहीं चाहते हैं। परीक्षकों का कहना है कि इन कुर्सियों पर ज्यादा देर बैठकर काम करने से पीठ में दर्द होने लगता है।
मूल्यांकन कार्य में तेजी लाने के लिए इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों को कुछ शिथिल किया है। पहले पांच वर्ष अनुभव वाले परीक्षक कापियां जांचते थे, जिसे इस बार तीन साल कर दिया गया है। इसके अलावा मूल्यांकन शुल्क की दरों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। साथ ही मूल्यांकन केंद्र पर मिलने वाली सुविधाओं में भी इजाफा किया गया है। इसके चलते पिछले सालों के मुकाबले इस बार परीक्षकों की संख्या काफी बढ़ गई है। बुधवार को तो यह संख्या 600 से ऊपर पहुंच गई, जिसके चलते करीब सौ कुर्सियों की कमी पड़ गई। कमी पूरी करने के लिए मूल्यांकन केंद्र के स्टाफ को खासा परेशान होना पड़ा। क्योंकि विश्वविद्यालय के पास प्लास्टिक की कुर्सियां बची थी और परीक्षक आरामदेह न होने के चलते इन पर बैठकर काम करना पसंद नहीं करते। काफी प्रयासों के बाद दोपहर में कुर्सियों का इंतजाम किया जा सका।
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मूल्यांकन कार्य में तेजी लाने के लिए इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों को कुछ शिथिल किया है। पहले पांच वर्ष अनुभव वाले परीक्षक कापियां जांचते थे, जिसे इस बार तीन साल कर दिया गया है। इसके अलावा मूल्यांकन शुल्क की दरों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। साथ ही मूल्यांकन केंद्र पर मिलने वाली सुविधाओं में भी इजाफा किया गया है। इसके चलते पिछले सालों के मुकाबले इस बार परीक्षकों की संख्या काफी बढ़ गई है। बुधवार को तो यह संख्या 600 से ऊपर पहुंच गई, जिसके चलते करीब सौ कुर्सियों की कमी पड़ गई। कमी पूरी करने के लिए मूल्यांकन केंद्र के स्टाफ को खासा परेशान होना पड़ा। क्योंकि विश्वविद्यालय के पास प्लास्टिक की कुर्सियां बची थी और परीक्षक आरामदेह न होने के चलते इन पर बैठकर काम करना पसंद नहीं करते। काफी प्रयासों के बाद दोपहर में कुर्सियों का इंतजाम किया जा सका।
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