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सर, हॉस्टल में बहुत ठंड लगती, कुछ दिन और मना लें छुट्टी
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बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के हॉस्टल के छात्र इन दिनों ठंड से इतना परेशान हैं कि वह हॉस्टल आना ही नहीं चाहते। इसकी वजह कड़ाके की ठंड नहीं, बल्कि हॉस्टल की खिड़कियां हैं। इन खिड़कियों के शीशे पिछले एक साल से टूटे हैं, जिनको अब तक सही नहीं कराया गया है। इस वजह से छात्रों को काफी ठंड लगती है। अब वार्डन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शीशे सही कराने की मांग की है।
नवीन छात्रावास में पचास से ज्यादा विंडो के शीशे टूटे हुए हैं। छात्रों ने उसमें पॉलीथिन और अखबार भी लगाए, लेकिन ठंड नहीं रुकी। सेमेस्टर परीक्षाएं खत्म होने के बाद विंटर वेकेशन हुए। अब छुट्टियां लगभग खत्म हो चुकी हैं, लेकिन तमाम छात्र हॉस्टल नहीं लौटे। जब हॉस्टल से उनको फोन किया गया तो उनका कहना था कि हॉस्टल में ठंड बहुत लगती है। अभी कुछ दिन बाद आएंगे। वार्डन का कहना है कि कई बार छात्र इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर अब तक ध्यान नहीं दिया। सोमवार को वार्डन ने इसकी शिकायत कार्यवाहक प्राचार्य संजीव कुमार सिंह से की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द इसे सही करा दिया जाएगा।
भव्यता पर करोड़ों खर्च, पर छात्र सुविधाओं के लिए बजट नहीं
विश्वविद्यालय ने भव्यता दिखाने के लिए करोड़ों रुपये का सिंथेटिक ट्रैक बनवाया हुआ है। अटल सभागार बन रहा है और आयोजनों पर भी करोड़ों रुपये बहाए जाते हैं, लेकिन छात्रों के हॉस्टल के लिए पैसे नहीं। केंद्रीय प्रयोगशाला खंडहर बन गई है। उसके उपकरण के लिए बजट नहीं। लैब बदहाल हैं। उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं। अब छात्रों में इस बात को लेकर रोष पनप रहा है।
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हॉस्टल की कई खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। उससे ठंड आती है। छात्रों ने कई बार शिकायत की है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन को शीशे सही कराने का पत्र भेजा है। काफी छात्र तो इसी वजह से हॉस्टल नहीं आ रहे हैं।
-डॉ. विजय बहादुर सिंह यादव, वार्डन नवीन छात्रावास
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नवीन छात्रावास में पचास से ज्यादा विंडो के शीशे टूटे हुए हैं। छात्रों ने उसमें पॉलीथिन और अखबार भी लगाए, लेकिन ठंड नहीं रुकी। सेमेस्टर परीक्षाएं खत्म होने के बाद विंटर वेकेशन हुए। अब छुट्टियां लगभग खत्म हो चुकी हैं, लेकिन तमाम छात्र हॉस्टल नहीं लौटे। जब हॉस्टल से उनको फोन किया गया तो उनका कहना था कि हॉस्टल में ठंड बहुत लगती है। अभी कुछ दिन बाद आएंगे। वार्डन का कहना है कि कई बार छात्र इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर अब तक ध्यान नहीं दिया। सोमवार को वार्डन ने इसकी शिकायत कार्यवाहक प्राचार्य संजीव कुमार सिंह से की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द इसे सही करा दिया जाएगा।
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भव्यता पर करोड़ों खर्च, पर छात्र सुविधाओं के लिए बजट नहीं
विश्वविद्यालय ने भव्यता दिखाने के लिए करोड़ों रुपये का सिंथेटिक ट्रैक बनवाया हुआ है। अटल सभागार बन रहा है और आयोजनों पर भी करोड़ों रुपये बहाए जाते हैं, लेकिन छात्रों के हॉस्टल के लिए पैसे नहीं। केंद्रीय प्रयोगशाला खंडहर बन गई है। उसके उपकरण के लिए बजट नहीं। लैब बदहाल हैं। उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं। अब छात्रों में इस बात को लेकर रोष पनप रहा है।
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हॉस्टल की कई खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। उससे ठंड आती है। छात्रों ने कई बार शिकायत की है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन को शीशे सही कराने का पत्र भेजा है। काफी छात्र तो इसी वजह से हॉस्टल नहीं आ रहे हैं।
-डॉ. विजय बहादुर सिंह यादव, वार्डन नवीन छात्रावास