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स्कूल में दिखाया श्रीलंका के सीरियल बम धमाकों का वीडियो, विचलित हुए मासूम
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बरेली। ग्रीन पार्क से सटे बिशप चाइल्ड केयर स्कूल में मासूम बच्चों को श्रीलंका में हुए सीरियल ब्लास्ट के दर्दनाक मंजर का वीडियो दिखाए जाने पर तमाम पेरेंट्स सकते में हैं। पेरेंट्स यह कहते हुए स्कूल के शिक्षकों की इस हरकत पर सवाल उठा रहे हैं कि ये वीडियो देखने के बाद उनके बच्चे विचलित हो गए। घर आने के बाद लगातार कोई न कोई सवाल भी पूछते रहे। स्कूल ने वीडियो दिखाने से पहले यह परवाह भी नहीं की कि इससे बच्चों की मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। मामला चर्चा में आने के बाद स्कूल प्रबंधन इस घटना की जांच कराने की बात कहते हुए उसे दबाने की कोशिश शुरू कर दी है।
श्रीलंका में सीरियल ब्लास्ट के बाद शनिवार को बिशप चाइल्ड केयर स्कूल में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इस स्कूल में आठवीं तक के बच्चे पढ़ते हैं। लंच ब्रेक के दौरान ऑडिटोरियम में हुई इस प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को बम ब्लास्ट के वीडियो क्लिप प्रोजेक्टर पर दिखाए गए और उसके बाद इस घटना में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। अभिभावकों के मुताबिक इस वीडियो में सीरियल विस्फोट के बाद बिखरे पड़े शव, चीख-पुकार करते घायल लोग और इधर-उधर बिखरे पड़े खून के दृश्य थे। यह सब देखकर तमाम बच्चे बुरी तरह सहम गए। एक अभिभावक ने बताया कि उनके बेटे ने घर पर आकर बार-बार श्रीलंका के बम धमाकों के बारे में सवाल करने शुरू किए तो वह हैरत में आ गए। वह घर पर बच्चों को टीवी पर भी ऐसी चीजें नहीं देखने देते हैं। उन्होंने बच्चे से ये सवाल पूछने की वजह पूछी तो उसने स्कूल का पूरा वाकया सुनाया। बताया जाता है कि स्कूल में ही एक बड़े बच्चे ने यह वीडियो दिखाने पर एतराज भी जताया। स्कूल के इस कृत्य पर अभिभावकों में आक्रोश है और वह अधिकारियों से शिकायत करने की बात कह रहे हैं।
डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं भावुक बच्चे
इस तरह की घटनाएं बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। बच्चे छोटे होते हैं और भावुक भी होते हैं। इसके चलते बड़ों की अपेक्षा कोई भी घटना उन्हें ज्यादा प्रभावित करती है। ऐसे में नकारात्मक प्रभाव की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। कई बार तो कुछ समय बाद ऐसी घटनाओं से बच्चे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। भविष्य में उन्हें घबराहट, बेचैनी और मानसिक मंद होने की समस्याएं भी हो सकती हैं। मानसिक के साथ ही शारीरिक दुष्प्रभाव भी हो जाते हैं। खून देखकर हिनोटोफोबिया जैसे अन्य फोबिया के भी शिकार हो सकते हैं। किसी धर्मस्थल में ऐसी घटना देकर धार्मिक रूप से आहत होकर वहां को लेकर डर उनके मन में बैठ सकता है। भीड़ और पब्लिक प्लेस से डर सकते हैं। ऐसी घटनाओं का प्रभाव आंतरिक रूप से मजबूत बच्चों पर कम होता है। मगर, जो बच्चे उत्तेजित प्रकृति के होते हैं, उनके लिए ऐसी घटनाएं हीरो बनने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। ऐसा करने वालों को वे अपना रोल मॉडल मानकर ऐसी घटनाएं करने के बारे में सोच सकते हैं। ऐसे में स्कूल को बच्चों को यह वीडियो नहीं दिखाना चाहिए था। श्रद्धांजलि के लिए शांति प्रार्थना जैसा आयोजन भी हो सकता था। - डॉ. सुविधा शर्मा, मनोवैज्ञानिक
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प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को श्रीलंका ब्लास्ट के छोटे-छोटे वीडियो दिखाए गए, ऐसा नहीं होना चाहिए था। मैं शनिवार को स्कूल में नहीं था वरना ऐसा नहीं होने होता। आयोजन से पहले हुई मीटिंग में भी ऐसा करने को लेकर कोई बात नहीं हुई थी। फिर भी वीडियो किन परिस्थतियों में और किसने दिखाया, इसकी जांच कराई जाएगी। - थॉमस चार्ल्स, प्रिंसिपल, बिशप चाइल्ड केयर
विशप चाइल्डकेयर में बच्चों को श्रीलंका में हुए बम ब्लास्ट के वीडियो दिखाए गए। इससे बच्चे डर गए हैं। कुछ अभिभावकों ने इस बारे में मुझे बताया है लेकिन वे लोग बच्चों के भविष्य के चलते स्कूल में शिकायत करने नहीं गए। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वे धर्म विशेष को लेकर सोचते हैं। पुलवामा हमले पर तो स्कूल ने कुछ नहीं किया। - अंकुर सक्सेना, अध्यक्ष पैरेंट्स फोरम
मैं हैरत में हूं कि स्कूल वाले छोटे-छोटे बच्चों को खूनखराबा और बम ब्लॉस्ट जैसी घटनाओं के वीडियो कैसे दिखा सकते हैं? घर में जिन घटनाओं को हम बच्चों से छिपाने का प्रयास करते हैं, स्कूल ने वह इतने सारे बच्चों के बीच में किया। स्कूल प्रबंधन ने एक बार भी नहीं सोचा कि बच्चों के मन पर यह वीडियो देखकर क्या असर पड़ेगा। - कक्षा एक में पढ़ने वाले बच्चे के पिता
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श्रीलंका में सीरियल ब्लास्ट के बाद शनिवार को बिशप चाइल्ड केयर स्कूल में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इस स्कूल में आठवीं तक के बच्चे पढ़ते हैं। लंच ब्रेक के दौरान ऑडिटोरियम में हुई इस प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को बम ब्लास्ट के वीडियो क्लिप प्रोजेक्टर पर दिखाए गए और उसके बाद इस घटना में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। अभिभावकों के मुताबिक इस वीडियो में सीरियल विस्फोट के बाद बिखरे पड़े शव, चीख-पुकार करते घायल लोग और इधर-उधर बिखरे पड़े खून के दृश्य थे। यह सब देखकर तमाम बच्चे बुरी तरह सहम गए। एक अभिभावक ने बताया कि उनके बेटे ने घर पर आकर बार-बार श्रीलंका के बम धमाकों के बारे में सवाल करने शुरू किए तो वह हैरत में आ गए। वह घर पर बच्चों को टीवी पर भी ऐसी चीजें नहीं देखने देते हैं। उन्होंने बच्चे से ये सवाल पूछने की वजह पूछी तो उसने स्कूल का पूरा वाकया सुनाया। बताया जाता है कि स्कूल में ही एक बड़े बच्चे ने यह वीडियो दिखाने पर एतराज भी जताया। स्कूल के इस कृत्य पर अभिभावकों में आक्रोश है और वह अधिकारियों से शिकायत करने की बात कह रहे हैं।
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डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं भावुक बच्चे
इस तरह की घटनाएं बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। बच्चे छोटे होते हैं और भावुक भी होते हैं। इसके चलते बड़ों की अपेक्षा कोई भी घटना उन्हें ज्यादा प्रभावित करती है। ऐसे में नकारात्मक प्रभाव की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। कई बार तो कुछ समय बाद ऐसी घटनाओं से बच्चे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। भविष्य में उन्हें घबराहट, बेचैनी और मानसिक मंद होने की समस्याएं भी हो सकती हैं। मानसिक के साथ ही शारीरिक दुष्प्रभाव भी हो जाते हैं। खून देखकर हिनोटोफोबिया जैसे अन्य फोबिया के भी शिकार हो सकते हैं। किसी धर्मस्थल में ऐसी घटना देकर धार्मिक रूप से आहत होकर वहां को लेकर डर उनके मन में बैठ सकता है। भीड़ और पब्लिक प्लेस से डर सकते हैं। ऐसी घटनाओं का प्रभाव आंतरिक रूप से मजबूत बच्चों पर कम होता है। मगर, जो बच्चे उत्तेजित प्रकृति के होते हैं, उनके लिए ऐसी घटनाएं हीरो बनने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। ऐसा करने वालों को वे अपना रोल मॉडल मानकर ऐसी घटनाएं करने के बारे में सोच सकते हैं। ऐसे में स्कूल को बच्चों को यह वीडियो नहीं दिखाना चाहिए था। श्रद्धांजलि के लिए शांति प्रार्थना जैसा आयोजन भी हो सकता था। - डॉ. सुविधा शर्मा, मनोवैज्ञानिक
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प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को श्रीलंका ब्लास्ट के छोटे-छोटे वीडियो दिखाए गए, ऐसा नहीं होना चाहिए था। मैं शनिवार को स्कूल में नहीं था वरना ऐसा नहीं होने होता। आयोजन से पहले हुई मीटिंग में भी ऐसा करने को लेकर कोई बात नहीं हुई थी। फिर भी वीडियो किन परिस्थतियों में और किसने दिखाया, इसकी जांच कराई जाएगी। - थॉमस चार्ल्स, प्रिंसिपल, बिशप चाइल्ड केयर
विशप चाइल्डकेयर में बच्चों को श्रीलंका में हुए बम ब्लास्ट के वीडियो दिखाए गए। इससे बच्चे डर गए हैं। कुछ अभिभावकों ने इस बारे में मुझे बताया है लेकिन वे लोग बच्चों के भविष्य के चलते स्कूल में शिकायत करने नहीं गए। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वे धर्म विशेष को लेकर सोचते हैं। पुलवामा हमले पर तो स्कूल ने कुछ नहीं किया। - अंकुर सक्सेना, अध्यक्ष पैरेंट्स फोरम
मैं हैरत में हूं कि स्कूल वाले छोटे-छोटे बच्चों को खूनखराबा और बम ब्लॉस्ट जैसी घटनाओं के वीडियो कैसे दिखा सकते हैं? घर में जिन घटनाओं को हम बच्चों से छिपाने का प्रयास करते हैं, स्कूल ने वह इतने सारे बच्चों के बीच में किया। स्कूल प्रबंधन ने एक बार भी नहीं सोचा कि बच्चों के मन पर यह वीडियो देखकर क्या असर पड़ेगा। - कक्षा एक में पढ़ने वाले बच्चे के पिता