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95 फीसदी हृदयरोगियों के लिए दवा काफी फिर भी करा दी जाती है एंजियोप्लास्टी
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बरेली। एसआरएमएस में आयोजित कॉन्फ्रेंस ‘कॉर्डियोकॉन- 2019’ में विशेषज्ञों ने हृदयरोगियों के साथ खिलवाड़ के हैरतअंगेज आंकड़े पेश किए। कॉन्फ्रेंस के सचिव डॉ. अमरेश अग्रवाल ने जहां यह बताया कि 95 फीसदी हृदय रोगी सिर्फ दवाओं से ठीक हो सकते हैं, वहीं बनारस से आए वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नकुल सिन्हा ने देश में वर्ष 2017 में पांच लाख से ज्यादा लोगों की एंजियोप्लास्टी किए जाने का सीएसआई का आंकड़ा रखते हुए यह बताया कि एंजियोप्लास्टी पर डॉक्टरों का कितना जोर रहता है। उन्होंने इसे चौंकाने वाला आंकड़ा बताते हुए यह भी कहा कि इसी साल आठ लाख से ज्यादा लोगों को स्टेंट भी डाले गए।
दक्षिण भारत की कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. गीता सुब्रमन्यम ने कहा कि ऑफिस में लंबे समय तक पैर लटकाकर बैठने से शरीर में रक्त का थक्का जमने की आशंका बढ़ती है। यह थक्का हृदय तक जा सकता है और हृदयघात का कारण बन सकता है। इससे बचाव के लिए 20 मिनट एक स्थिति में बैठने के बाद काम से हल्का ब्रेक लेकर थोड़ा टहलना चाहिए ताकि रक्त संचार बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्लड प्रेशर का निचला स्तर 100 से ज्यादा रहना खतरे का संकेत है। इसकी लगातार जांच करानी चाहिए।
बनारस के डॉ. नकुल सिन्हा ने कहा कि हृदयघात होने पर मरीज को पैरालाइसिस के केस की तरह फौरन अस्पताल ले जाना चाहिए। पहले छह घंटे उसे बचाने में सबसे अहम होते हैं। डॉ. अमरेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि देशी स्टेंट किसी सूरत में विदेशी स्टेंट से कम नहीं हैं बल्कि सस्ता भी है। कॉन्फ्रेंस में मे देश भर से आए 400 से ज्यादा हृदयरोग चिकित्सक, फिजिशियन और पीजी व पीजी छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कॉर्डियोकॉन-2019 के समापन सत्र में एसआरएमएस के चेयरमैन देव मूर्ति ने सभी डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया।
दक्षिण भारत की कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. गीता सुब्रमन्यम ने कहा कि ऑफिस में लंबे समय तक पैर लटकाकर बैठने से शरीर में रक्त का थक्का जमने की आशंका बढ़ती है। यह थक्का हृदय तक जा सकता है और हृदयघात का कारण बन सकता है। इससे बचाव के लिए 20 मिनट एक स्थिति में बैठने के बाद काम से हल्का ब्रेक लेकर थोड़ा टहलना चाहिए ताकि रक्त संचार बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्लड प्रेशर का निचला स्तर 100 से ज्यादा रहना खतरे का संकेत है। इसकी लगातार जांच करानी चाहिए।
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बनारस के डॉ. नकुल सिन्हा ने कहा कि हृदयघात होने पर मरीज को पैरालाइसिस के केस की तरह फौरन अस्पताल ले जाना चाहिए। पहले छह घंटे उसे बचाने में सबसे अहम होते हैं। डॉ. अमरेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि देशी स्टेंट किसी सूरत में विदेशी स्टेंट से कम नहीं हैं बल्कि सस्ता भी है। कॉन्फ्रेंस में मे देश भर से आए 400 से ज्यादा हृदयरोग चिकित्सक, फिजिशियन और पीजी व पीजी छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कॉर्डियोकॉन-2019 के समापन सत्र में एसआरएमएस के चेयरमैन देव मूर्ति ने सभी डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया।
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