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क्यों न छूटें यात्रियों की ट्रेनें, जब कोच डिस्प्ले सिस्टम के तार काट गए चूहे
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बरेली। बरेली जंक्शन पर लगे कोच डिस्प्ले सिस्टम (सीडीएस) की चूहों ने वायरिंग काट दी है। सिस्टम भी कबाड़ हो चुका है। अब नए लगने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अधिकारी कहते हैं कि इसकी देखरेख की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी, लेकिन अब तो वो भी लापता है। कोच की लोकेशन न मिलने से यात्रियों की लंबे समय से ट्रेनें छूटती आ रही हैं या उन्हें ट्रेन पकड़ने की भागमदौड़ में चोटिल होना पड़ रहा है।
ढाई साल पहले मुरादाबाद मंडल के ए क्लास स्टेशन बरेली जंक्शन पर ट्रेन आने पर यात्रियों को कोच लोकेशन न खोजनी पड़ी इसके लिए जंक्शन के सभी प्लेटफार्म पर कोच डिस्प्ले सिस्टम लगाए थे। सिस्टम ने कुछ समय ही काम किया होगा, उसके बाद उसने काम करना बंद कर दिया। सिस्टम के खराब होने से यात्रियों (अधिकांश बुजुर्ग यात्री) की ट्रेनें छूटने लगीं या उन्हें अपना कोच तलाशने के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है, जिसमें कई यात्री चोटिल भी हो चुके हैं।
बताया जाता है कि यात्रियों की इस परेशानी को लेकर स्थानीय अधिकारियों ने कई बार मुरादाबाद मंडल के अधिकारियों से कोच डिस्प्ले सिस्टम सही कराने को कहा, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल दी। बताते हैं कि दो साल से ठेकेदार भी सिस्टम ठीक करने नहीं आया।
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उधर, रेलवे के सूत्रों का कहना है कि प्लेटफार्म पर चूहों ने सिस्टम की वायरिंग काट दी है, जिसको अब जोड़ा जाना काफी मुश्किल है। ऐसे में अब नया सिस्टम लगाने का ही विकल्प बचता है। इस संबंध में मुरादाबाद डिवीजन के एडीआरएम अश्विनी कुमार ने बताया कि जल्द ही जंक्शन पर सीडीएस काम करने लगेगा।
चूहे काट चुके हैं एटीवीएम और एस्केलेटर की वायरिंग
बरेली। चूहे आटोमेटिक टिकट वेडिंग मशीन (एटीवीएम) और एस्केलेटर की वायरिंग भी काट चुके हैं। एक सप्ताह पहले अर्चना एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में चूहा घुस गया था, जिसेे यात्रियों ने सांप समझ लिया था। जंक्शन पर ट्रेन रुकने पर सफाई कर्मियों ने चूहे हो पकड़ा था। बावजूद इसके रेल प्रशासन ने चूहों का आतंक खत्म करने के कोई प्रयास नहीं किए हैं।
क्या होता है सीडीएस
बरेली। रेलवे ने अपने अधिकांश स्टेशनों पर डिजिटल घड़ी नुमा दिखने वाली डिस्प्ले यूनिट लगाई हुई हैं। इसमें समय नहीं दिखता, केवल कोच का प्रकार ही दिखाई देता है। मसलन अगर आपको कोच स्लीपर एक है तो सीडीएस पर एस-1 प्रदर्शित होगा। इन यूनिट के जरिए ट्रेन आने से पहले ही कौन सा कोच कहां लगेगा इसका पता यात्री को चल जाता है, जिसे देखकर यात्री बताए स्थान पर खड़ा हो जाता है, जब ट्रेन आती है तो संबंधित यात्री का कोच लगभग उसके सामने ही लगता है, जिससे यात्री को काफी सहूलियत होती है।
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ढाई साल पहले मुरादाबाद मंडल के ए क्लास स्टेशन बरेली जंक्शन पर ट्रेन आने पर यात्रियों को कोच लोकेशन न खोजनी पड़ी इसके लिए जंक्शन के सभी प्लेटफार्म पर कोच डिस्प्ले सिस्टम लगाए थे। सिस्टम ने कुछ समय ही काम किया होगा, उसके बाद उसने काम करना बंद कर दिया। सिस्टम के खराब होने से यात्रियों (अधिकांश बुजुर्ग यात्री) की ट्रेनें छूटने लगीं या उन्हें अपना कोच तलाशने के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है, जिसमें कई यात्री चोटिल भी हो चुके हैं।
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बताया जाता है कि यात्रियों की इस परेशानी को लेकर स्थानीय अधिकारियों ने कई बार मुरादाबाद मंडल के अधिकारियों से कोच डिस्प्ले सिस्टम सही कराने को कहा, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल दी। बताते हैं कि दो साल से ठेकेदार भी सिस्टम ठीक करने नहीं आया।
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उधर, रेलवे के सूत्रों का कहना है कि प्लेटफार्म पर चूहों ने सिस्टम की वायरिंग काट दी है, जिसको अब जोड़ा जाना काफी मुश्किल है। ऐसे में अब नया सिस्टम लगाने का ही विकल्प बचता है। इस संबंध में मुरादाबाद डिवीजन के एडीआरएम अश्विनी कुमार ने बताया कि जल्द ही जंक्शन पर सीडीएस काम करने लगेगा।
चूहे काट चुके हैं एटीवीएम और एस्केलेटर की वायरिंग
बरेली। चूहे आटोमेटिक टिकट वेडिंग मशीन (एटीवीएम) और एस्केलेटर की वायरिंग भी काट चुके हैं। एक सप्ताह पहले अर्चना एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में चूहा घुस गया था, जिसेे यात्रियों ने सांप समझ लिया था। जंक्शन पर ट्रेन रुकने पर सफाई कर्मियों ने चूहे हो पकड़ा था। बावजूद इसके रेल प्रशासन ने चूहों का आतंक खत्म करने के कोई प्रयास नहीं किए हैं।
क्या होता है सीडीएस
बरेली। रेलवे ने अपने अधिकांश स्टेशनों पर डिजिटल घड़ी नुमा दिखने वाली डिस्प्ले यूनिट लगाई हुई हैं। इसमें समय नहीं दिखता, केवल कोच का प्रकार ही दिखाई देता है। मसलन अगर आपको कोच स्लीपर एक है तो सीडीएस पर एस-1 प्रदर्शित होगा। इन यूनिट के जरिए ट्रेन आने से पहले ही कौन सा कोच कहां लगेगा इसका पता यात्री को चल जाता है, जिसे देखकर यात्री बताए स्थान पर खड़ा हो जाता है, जब ट्रेन आती है तो संबंधित यात्री का कोच लगभग उसके सामने ही लगता है, जिससे यात्री को काफी सहूलियत होती है।