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जनहित के लिए तो यहां थप्पड़ चलाए, टंकी पर चढ़कर नारे लगाए
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बरेली। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन की तैनाती के बाद से नगर निगम में मचे घमासान को देखकर शहर के पहले मेयर रहे राजकुमार अग्रवाल को अपने पुराने दिन याद आ गए। अमर उजाला से बातचीत हुई तो कहने लगे कि पहले अफसर इतने अराजक नहीं होते थे न उनके अंदर कोई अहम होता था। अपने समय का एक वाकया बताते हुए कहा कि एक मीटिंग के दौरान तत्कालीन अपर मुख्य नगर अधिकारी एसआर यादव ने उनसे बेवजह बहस की तो उन्होंने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया था, सब देखते रह गए। यही नहीं पानी के लिए आंदोलन भी किया और टंकी पर चढ़कर गुणवत्ता खराब देखकर नारे भी लगाए।
पूर्व मेयर ने कहा कि नगर निगम में आईएएस अफसर पहले भी रहे हैं लेकिन ऐसा तमाशा कभी नहीं हुआ। वैसे भी आईएएस हो या कोई और अफसर, ये सब नौकर हैं, मालिक सिर्फ जनता है। इसी जनता ने नगर निगम में अपने प्रतिनिधि चुनकर भेजे हैं। जब उनसे ही अफसर उलझेंगे तब जनहित के काम कैसे हो पाएंगे। बोले, बारिश होने वाली है, शहर में नाला सफाई अब तक नहीं हुई। सड़कें टूटी पड़ी हैं, पैचिंग तक नहीं हो पा रही। सर्किट हाउस जैसी जगह पर सिल्ट नाले से निकालकर सड़क किनारे डाल दी गई है। आईएएस अफसर होने का मतलब यह नहीं कि जनप्रतिनिधियों से उलझा जाए। बल्कि उसे तो और आगे बढ़कर जनता के काम करने चाहिए। शहर में हर तरफ अतिक्रमण और गंदगी फैली हुई है, निगम की जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। मगर निगम में इन सब मुद्दों को छोड़कर राजनीति हो रही है। नगर निगम जनता का कार्यालय है, वहां धारा 144 लगाई जा रही है। इससे साफ जाहिर है कि अफसरों की नीयत साफ नहीं है। वे सेवक नहीं, शासक बनना चाहते हैं।
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पूर्व मेयर ने कहा कि नगर निगम में आईएएस अफसर पहले भी रहे हैं लेकिन ऐसा तमाशा कभी नहीं हुआ। वैसे भी आईएएस हो या कोई और अफसर, ये सब नौकर हैं, मालिक सिर्फ जनता है। इसी जनता ने नगर निगम में अपने प्रतिनिधि चुनकर भेजे हैं। जब उनसे ही अफसर उलझेंगे तब जनहित के काम कैसे हो पाएंगे। बोले, बारिश होने वाली है, शहर में नाला सफाई अब तक नहीं हुई। सड़कें टूटी पड़ी हैं, पैचिंग तक नहीं हो पा रही। सर्किट हाउस जैसी जगह पर सिल्ट नाले से निकालकर सड़क किनारे डाल दी गई है। आईएएस अफसर होने का मतलब यह नहीं कि जनप्रतिनिधियों से उलझा जाए। बल्कि उसे तो और आगे बढ़कर जनता के काम करने चाहिए। शहर में हर तरफ अतिक्रमण और गंदगी फैली हुई है, निगम की जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। मगर निगम में इन सब मुद्दों को छोड़कर राजनीति हो रही है। नगर निगम जनता का कार्यालय है, वहां धारा 144 लगाई जा रही है। इससे साफ जाहिर है कि अफसरों की नीयत साफ नहीं है। वे सेवक नहीं, शासक बनना चाहते हैं।
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