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लेखपाल ने रुपए भी ले लिए, अनुदान भी नहीं मिला
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बरेली। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में एक लाभार्थी लेखपाल के रवैए की वजह से शादी अनुदान लेने से वंचित रह गया। लाभार्थी की गरीब साली की शादी फरवरी में थी। उसके लिए उसने 20 हजार रुपए शादी अनुदान के लिए आवेदन किया था।
शहर के मोहल्ला आजमनगर निवासी रविकांत की ससुराल में साली की शादी थी। ससुराल में केवल सास हैं, जो आस-पड़ोस में चौका बर्तन करके परिवार चलाती हैं। रविकांत खुद भी प्राइवेट दुकान पर बहुत कम रुपए में नौकरी करते हैं। शादी से 90 दिन पहले साली को शादी का अनुदान दिलाने के लिए रविकांत ने आवेदन किया था। लेखपाल से आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया। उसका कहना है कि लेखपाल ने प्रमाण पत्र बनाने के लिए 1500 रुपए मांगे तो वह भी दे दिए। फिर भी लेखपाल ने 30 मार्च को प्रमाण पत्र दिया। उस वजह से उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रेम प्रकाश का कहना है कि 31 मार्च बीतने के बाद लाभार्थी अनुदान देने का पात्र नहीं रहा। अगर वह प्रमाण पत्र मार्च के पहले या दूसरे सप्ताह में दे देता तो अनुदान मिलना संभव था। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने बीते वित्तीय वर्ष में 2500 लाभार्थियों को शादी का अनुदान दिया था। प्रत्येक लाभार्थी को 20 हजार रुपए पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिए गए।
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शहर के मोहल्ला आजमनगर निवासी रविकांत की ससुराल में साली की शादी थी। ससुराल में केवल सास हैं, जो आस-पड़ोस में चौका बर्तन करके परिवार चलाती हैं। रविकांत खुद भी प्राइवेट दुकान पर बहुत कम रुपए में नौकरी करते हैं। शादी से 90 दिन पहले साली को शादी का अनुदान दिलाने के लिए रविकांत ने आवेदन किया था। लेखपाल से आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया। उसका कहना है कि लेखपाल ने प्रमाण पत्र बनाने के लिए 1500 रुपए मांगे तो वह भी दे दिए। फिर भी लेखपाल ने 30 मार्च को प्रमाण पत्र दिया। उस वजह से उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रेम प्रकाश का कहना है कि 31 मार्च बीतने के बाद लाभार्थी अनुदान देने का पात्र नहीं रहा। अगर वह प्रमाण पत्र मार्च के पहले या दूसरे सप्ताह में दे देता तो अनुदान मिलना संभव था। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने बीते वित्तीय वर्ष में 2500 लाभार्थियों को शादी का अनुदान दिया था। प्रत्येक लाभार्थी को 20 हजार रुपए पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिए गए।
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