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शीरान ने नातख्वा को पहले पीटा फिर घसीटा
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बरेली। दरगाह आला हजरत की रजा मस्जिद में शनिवार देर रात खत्म कुरान के जलसे की सरपरस्ती को लेकर हुआ विवाद ठंडा होने के बजाय और गरमा गया है। शनिवार को पहले नातख्वा और फिर दरगाह के सज्जादानशीन अहसन मियां के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट करने के आरोपी शीरान रजा खां ने रविवार की रात फिर दरगाह के बाहर नातख्वा को दबोच लिया और उसे जबरन घसीटते हुए अपने घर ले जाने की कोशिश की। दरगाह के लोगों के बीचबचाव के बाद जैसे-तैसे छूटे नातख्वा ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां अहसन मियां के पास पहुंचकर पूरा वाकया बताया। मामला फिर पुलिस तक पहुंचा जिसके बाद पुलिस की ओर से दोबारा ऐसी हरकत पर शीरान रजा खां को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
दरगाह के सरपरस्त मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां और उनके बेटे सज्जादानशीन अहसन मियां और शीरान रजा के पिता उस्मान रजा खां अंजुम मियां के बीच दरगाह की सज्जादगी को लेकर पहले से नाइत्तफाकी चल रही है। शनिवार की देर रात दरगाह की रजा मस्जिद में सज्जादानशीन अहसन मियां की सरपरस्ती में चल रहे खत्म शरीफ के जलसे के दौरान विवाद हुआ। आरोप है कि शीरान और उनके पिता अंजुम मियां ने पहले तो यहां नात पेश कर रहे नातख्वा कंघी टोला निवासी आसिम नूरी से माइक छीनने की कोशिश की और उसने माइक देने से इनकार किया तो उसके साथ मारपीट कर दी। रविवार को अहसन मियां की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई जिसमें आरोप लगाया गया कि अंजुम मियां ने बेटे शीरान और चार-पांच लोगों के साथ जबरन उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ की और उनके साथ मारपीट भी की। यह एफआईआर दर्ज होने से आला हजरत परिवार और उसके अकीदतमंदों में सनसनी फैल गई।
दोनों पक्षों में टकराव का यह सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। आरोप है कि रविवार रात करीब 11 बजे नातख्वा आसिम जैसे ही दरगाह पर हाजिरी देकर निकले, बाहर मौजूद शीरान ने उन्हें रोक लिया और जबरन उसे अपने घर की ओर खींचकर ले जाने लगे। आरोप है कि शीरान उस पर एफआईआर दर्ज कराने का तंज कसते हुए उसे अपने अब्बा अंजुम मियां के सामने पेश करने की बात कह रहे थे। दरगाह के लोगों के बीचबचाव के बाद आसिम छूटकर सज्जादानशीन अहसन मियां के पास पहुंचे और पूरा वाकया बताया। इसके बाद एक बार फिर पूरे घटनाक्रम की इत्तला बिहारीपुर चौकी पुलिस को दी गई। चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह इसके बाद शीरान के घर पहुंचे और सख्त चेतावनी दी कि दोबारा ऐसी हरकत पर पुलिस कार्रवाई करेगी। उधर, रविवार को दर्ज हुई एफआईआर के मामले में पुलिस ने अभी कोई कार्रवाई नहीं की है।
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ईद का मौका है, अभी कुछ नहीं कहेंगे
दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां अहसन मियां ने इस विवाद पर ज्यादा कुछ कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईद का मौका है और वह अमन चाहते हैं। शनिवार की रात हुई घटना के बाद उन्होंने कार्रवाई कर दी है। फिलहाल उन्हें अब और कुछ नहीं कहना है।
या अल्लाह! सुब्हानी मियां का साथ देने की सजा औलादें ऐसे देंगी.. सोचा न था
बरेली। नबीरे आला हजरत उस्मान रजा खां अंजुम मियां ने अपने ऊपर दरगाह के सज्जादानशीन अहसन मियां के घर में घुसकर मारपीट करने के आरोप को सरासर झूठ और घिनौनी हरकत बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने मुश्किल दौर में हमेशा अपने बड़े भाई (सुब्हानी मियां) का समर्थन किया है। उन्हें अंदाजा नहीं था कि उन्हें और उनके बच्चों को इसकी सजा यूं दी जाएगी।
अंजुम मियां ने प्रेस को जारी बयान में कहा है कि एफआईआर में जो कहा गया है, उसका सच से दूर-दूर तक का वास्ता नहीं है। उनका हमेशा मामूल रहा है कि खानदान या किसी और के मामलात में कोई दखलंदाजी न की जाए। वह खामोशी से जिंदगी गुजारने के कायल हैं और खामोशी से ही नमाज रोजा और दीनी कामों में लगे रहते हैं। अपने बच्चों को भी यही तालीम दी है। उनके बच्चे इल्मे दीन हासिल करने और मसलके आला हजरत के प्रचार में लगे रहते हैं। उनका कभी किसी से कोई झगड़ा नहीं हुआ। ऐसी सूरत में उनके ऊपर लड़ाई-झगड़े और मारपीट के इल्जाम लगाना निहायत घिनौनी हरकत ही नहीं, उन्हें बदनाम करने की साजिश भी है।
अंजुम मियां ने कहा कि वक्फ ट्रिब्युनल के मुकदमे में वह मेन पार्टी नहीं है। दगगाह के रहने वाले और मुस्तकिल रजा मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले जानते हैं कि कौन मस्जिद में नमाज पढ़ने आता है कौन नहीं आता है। वह तो यही चाहते हैं कि खानदान में कभी नाइत्तफाकी न हो। कभी किसी मनमुटाव की बात पता भी चली तो छोटों को यही समझाने की कोशिश की कि बड़ों की इज्जत करनी है और खानदान की बका को बुजुर्गों की खातिर ऊंचा रखना है। वह किसी भी नाइत्तफाकी को मंजरे आम पर लाने के हमेशा मुखालिफ रहे हैं। अपने बुजुर्गों की इज्जत और अजमत की खातिर तमाम झूठ और फरेब बर्दाश्त कर रहे हैं।
अहसन मियां! तो ईमान पर हाथ रखकर कह दो कि शीरान ने घर में घुसकर पीटा
बरेली। नबीरे आला हजरत मौलाना तसलीम रजा खां कादरी तसलीम मियां ने दरगाह आला हजरत की रजा मस्जिद में शनिवार रात हुए घटनाक्रम के बाद एफआईआर दर्ज कराने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी अहसन मियां की ओर से इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इंतेशार को इतना नहीं बढ़ाना चाहिए। इसके बजाय बैठकर बात कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे यानी शीरान रजा खां ने अगर कुछ कर भी दिया था तो बात को इतना तूल नहीं देना चाहिए था कि उसने घर में घुसकर मारपीट की और फर्नीचर तोड़ा। उन्होंने अहसन मियां को चुनौती भी दी कि अगर यह बात सच है तो क्या वह इसे ईमान पर हाथ रखकर कह सकते हैं।
मौलाना तसलीम मियां ने अपने बयान में कहा कि दिलों में इतनी दरार नहीं बढ़ानी चाहिए कि वह भर न पाए और अगर आगे चलकर मिलना हो तो शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आप के खिलाफ हम भी एफआईआर करा सकते हैं मगर झूठ फिर झूठ होता है। उन्होंने अपनी राय देते हुए यह भी कहा कि आपस में इत्तेहाद की राह निकाली जाए, मुकदमो का कोई मतलब नहीं है। जहां तक मन्नानी मियां की ओर से ट्रिब्युनल कोर्ट में दायर किए गए मुकदमे का मामला है तो वह उनके हक का मसला है। बता दें कि मौलाना तसलीम रजा खां सज्जादानशीन अहसन मियां और शीरान रजा के चचा है। दरगाह की सज्जादगी के साथ मुतवल्ली के ओहदे के लिए मन्नानी मियां की ओर से वक्फ ट्रिब्युनल में जो मुकदमा दायर किया गया, उसमें शीरान के पिता अंजुम मियां के साथ वह भी सह वादी हैं।
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दरगाह के सरपरस्त मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां और उनके बेटे सज्जादानशीन अहसन मियां और शीरान रजा के पिता उस्मान रजा खां अंजुम मियां के बीच दरगाह की सज्जादगी को लेकर पहले से नाइत्तफाकी चल रही है। शनिवार की देर रात दरगाह की रजा मस्जिद में सज्जादानशीन अहसन मियां की सरपरस्ती में चल रहे खत्म शरीफ के जलसे के दौरान विवाद हुआ। आरोप है कि शीरान और उनके पिता अंजुम मियां ने पहले तो यहां नात पेश कर रहे नातख्वा कंघी टोला निवासी आसिम नूरी से माइक छीनने की कोशिश की और उसने माइक देने से इनकार किया तो उसके साथ मारपीट कर दी। रविवार को अहसन मियां की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई जिसमें आरोप लगाया गया कि अंजुम मियां ने बेटे शीरान और चार-पांच लोगों के साथ जबरन उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ की और उनके साथ मारपीट भी की। यह एफआईआर दर्ज होने से आला हजरत परिवार और उसके अकीदतमंदों में सनसनी फैल गई।
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दोनों पक्षों में टकराव का यह सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। आरोप है कि रविवार रात करीब 11 बजे नातख्वा आसिम जैसे ही दरगाह पर हाजिरी देकर निकले, बाहर मौजूद शीरान ने उन्हें रोक लिया और जबरन उसे अपने घर की ओर खींचकर ले जाने लगे। आरोप है कि शीरान उस पर एफआईआर दर्ज कराने का तंज कसते हुए उसे अपने अब्बा अंजुम मियां के सामने पेश करने की बात कह रहे थे। दरगाह के लोगों के बीचबचाव के बाद आसिम छूटकर सज्जादानशीन अहसन मियां के पास पहुंचे और पूरा वाकया बताया। इसके बाद एक बार फिर पूरे घटनाक्रम की इत्तला बिहारीपुर चौकी पुलिस को दी गई। चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह इसके बाद शीरान के घर पहुंचे और सख्त चेतावनी दी कि दोबारा ऐसी हरकत पर पुलिस कार्रवाई करेगी। उधर, रविवार को दर्ज हुई एफआईआर के मामले में पुलिस ने अभी कोई कार्रवाई नहीं की है।
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ईद का मौका है, अभी कुछ नहीं कहेंगे
दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां अहसन मियां ने इस विवाद पर ज्यादा कुछ कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईद का मौका है और वह अमन चाहते हैं। शनिवार की रात हुई घटना के बाद उन्होंने कार्रवाई कर दी है। फिलहाल उन्हें अब और कुछ नहीं कहना है।
या अल्लाह! सुब्हानी मियां का साथ देने की सजा औलादें ऐसे देंगी.. सोचा न था
बरेली। नबीरे आला हजरत उस्मान रजा खां अंजुम मियां ने अपने ऊपर दरगाह के सज्जादानशीन अहसन मियां के घर में घुसकर मारपीट करने के आरोप को सरासर झूठ और घिनौनी हरकत बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने मुश्किल दौर में हमेशा अपने बड़े भाई (सुब्हानी मियां) का समर्थन किया है। उन्हें अंदाजा नहीं था कि उन्हें और उनके बच्चों को इसकी सजा यूं दी जाएगी।
अंजुम मियां ने प्रेस को जारी बयान में कहा है कि एफआईआर में जो कहा गया है, उसका सच से दूर-दूर तक का वास्ता नहीं है। उनका हमेशा मामूल रहा है कि खानदान या किसी और के मामलात में कोई दखलंदाजी न की जाए। वह खामोशी से जिंदगी गुजारने के कायल हैं और खामोशी से ही नमाज रोजा और दीनी कामों में लगे रहते हैं। अपने बच्चों को भी यही तालीम दी है। उनके बच्चे इल्मे दीन हासिल करने और मसलके आला हजरत के प्रचार में लगे रहते हैं। उनका कभी किसी से कोई झगड़ा नहीं हुआ। ऐसी सूरत में उनके ऊपर लड़ाई-झगड़े और मारपीट के इल्जाम लगाना निहायत घिनौनी हरकत ही नहीं, उन्हें बदनाम करने की साजिश भी है।
अंजुम मियां ने कहा कि वक्फ ट्रिब्युनल के मुकदमे में वह मेन पार्टी नहीं है। दगगाह के रहने वाले और मुस्तकिल रजा मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले जानते हैं कि कौन मस्जिद में नमाज पढ़ने आता है कौन नहीं आता है। वह तो यही चाहते हैं कि खानदान में कभी नाइत्तफाकी न हो। कभी किसी मनमुटाव की बात पता भी चली तो छोटों को यही समझाने की कोशिश की कि बड़ों की इज्जत करनी है और खानदान की बका को बुजुर्गों की खातिर ऊंचा रखना है। वह किसी भी नाइत्तफाकी को मंजरे आम पर लाने के हमेशा मुखालिफ रहे हैं। अपने बुजुर्गों की इज्जत और अजमत की खातिर तमाम झूठ और फरेब बर्दाश्त कर रहे हैं।
अहसन मियां! तो ईमान पर हाथ रखकर कह दो कि शीरान ने घर में घुसकर पीटा
बरेली। नबीरे आला हजरत मौलाना तसलीम रजा खां कादरी तसलीम मियां ने दरगाह आला हजरत की रजा मस्जिद में शनिवार रात हुए घटनाक्रम के बाद एफआईआर दर्ज कराने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी अहसन मियां की ओर से इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इंतेशार को इतना नहीं बढ़ाना चाहिए। इसके बजाय बैठकर बात कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे यानी शीरान रजा खां ने अगर कुछ कर भी दिया था तो बात को इतना तूल नहीं देना चाहिए था कि उसने घर में घुसकर मारपीट की और फर्नीचर तोड़ा। उन्होंने अहसन मियां को चुनौती भी दी कि अगर यह बात सच है तो क्या वह इसे ईमान पर हाथ रखकर कह सकते हैं।
मौलाना तसलीम मियां ने अपने बयान में कहा कि दिलों में इतनी दरार नहीं बढ़ानी चाहिए कि वह भर न पाए और अगर आगे चलकर मिलना हो तो शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आप के खिलाफ हम भी एफआईआर करा सकते हैं मगर झूठ फिर झूठ होता है। उन्होंने अपनी राय देते हुए यह भी कहा कि आपस में इत्तेहाद की राह निकाली जाए, मुकदमो का कोई मतलब नहीं है। जहां तक मन्नानी मियां की ओर से ट्रिब्युनल कोर्ट में दायर किए गए मुकदमे का मामला है तो वह उनके हक का मसला है। बता दें कि मौलाना तसलीम रजा खां सज्जादानशीन अहसन मियां और शीरान रजा के चचा है। दरगाह की सज्जादगी के साथ मुतवल्ली के ओहदे के लिए मन्नानी मियां की ओर से वक्फ ट्रिब्युनल में जो मुकदमा दायर किया गया, उसमें शीरान के पिता अंजुम मियां के साथ वह भी सह वादी हैं।