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अब बहगुल नदी के किनारे तेंदुए की चहलकदमी से दहशत

Sun, 02 Jun 2019 02:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jun 2019 02:44 AM IST
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अब बहगुल नदी के किनारे तेंदुए की चहलकदमी से दहशत
हाफिजगंज/भंडसर। बहगुल नदी के आसपास दो दिन से तेंदुए की चहलकदमी से गांव के लोग दहशत में हैं। शुक्रवार शाम खेतों में काम कर रहे किसानों ने तेंदुए को जंगली सुअर का शिकार करते देखा, फिर शनिवार सुबह भी खेतों पर जा रहे किसानों को वह बहगुल नदी में दिखाई दिया। गांव वालों की सूचना पर आई वन विभाग की टीम तेंदुए के पग मार्क के फोटो लेकर लौट गई लेकिन तेंदुए की निगरानी और उसे पकड़ने का कोई इंतजाम नहीं किया। इससे लोगों में दहशत और बढ़ गई है।
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शुक्रवार शाम सात बजे बढे़पुरा गांव के महावीर और रामभरोसे लाल अपने खेत पर काम कर रहे थे तभी उन्होंने बहगुल नदी के किनारे तेंदुए को एक जंगली सुअर का शिकार करते देखा। दोनों दौड़कर गांव पहुंचे और वहां और लोगों को जानकारी दी। गांव में तेंदुआ देखे जाने की सूचना पर फॉरेस्ट गार्ड चंद्रशेखर, नीलमणि, अकबर आदि गांव पहुंचे और कांबिंग की। बहगुल नदी किनारे टीम को तेंदुए के पगमार्क और जंगली सुअर के साथ हुए संघर्ष के निशान मिले। वन विभाग ने पगमार्क के फोटो लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए और लौट गई। शनिवार सुबह सात बजे खेत पर जा रहे किसानों ने फिर बहगुल नदी में तेंदुए को देखकर सूचना वन विभाग को दी। फॉरेस्टर चंद्रशेखर ने छानबीन करने के बाद बताया कि प्रथम दृष्टया पगमार्क तेंदुए और उसके शावक के लग रहे हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि हो सकता है कि नर तेंदुए के मारे जाने बाद मादा और उसका शावक यहां घूम रहे हों। उन्होंने कहा कि पगमार्क की जांच के बाद पिंजरा लगाया जाएगा।
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इलाके में लगातार तेंदुआ देखे जाने से लोग दहशत में हैं। वन विभाग के इसे गंभीरता से न लेने पर उनमें गुस्सा भी है। लोगों का कहना है कि लगातार शिकायत पर वन विभाग एक्शन में नहीं आ रहा है। 16 मई को बढे़पुरा के भुवनेश्वर को तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया था। दोपहर मेें कमुआ के किसान पर हमला कर दिया था। लोगों की शिकायत पर भी वन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की तो गुस्साए लोगों ने तेंदुए को घेरकर मार डाला था।
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प्रथमदृष्टया पगमार्क किसी और जानवर के लग रहे हैं। पगमार्क के फोटो जांच के लिए लखनऊ लैब भेजे हैं। रिपोर्ट में तेंदुआ होने की पुष्टि होती है तो पिंजरा लगाकर उसे पकड़वाया जाएगा। - वीके सिंह, एसडीओ वन विभाग
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