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अवैध कॉलोनी ध्वस्त करने के लिए नहीं मिली फोर्स
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बरेली। पीलीभीत बाईपास रोड पर शॉपिंग माल के आगे मुंशीनगर और एलआईसी कॉलोनी के निकट बन रही अवैध कॉलोनी को ध्वस्त करने की बीडीए की प्लानिंग को पुलिस ने फेल कर दिया। इज्जतनगर थाने में बीडीए की टीम जब फोर्स लेने गई तो वहां से फोर्स देने से मना कर दिया गया। बीडीए को मजिस्ट्रेट भी नहीं मिल पाया। हालांकि अगर बीडीए की टीम फोर्स लेकर भी अवैध निर्माण ध्वस्त करने जाती तो वहां कॉलोनी में रहने वाले टीम का पुरजोर विरोध करने को तैयार थे, क्योंकि कॉलोनाइजर ने टीम का विरोध कराने की योजना पहले से ही तैयार कर रखी थी।
मुंशीनगर के निकट अवैध कॉलोनी ध्वस्तीकरण का आदेश बीडीए ने कुछ दिन पहले ही पारित किया था। 21 मई को ध्वस्तीकरण की तारीख लगी थी। इसके लिए बीडीए की ओर से प्रशासन से मजिस्ट्रेट और फोर्स की मांग की गई। प्रशासन ने काउंटिंग का हवाला देकर मजिस्ट्रेट और पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर लिए। हालांकि प्रशासन का यह तर्क काफी हद तक ठीक भी था क्योंकि 23 मई से लोकसभा चुनाव की मतगणना होनी है। उसमें प्रशासन और पुलिस व्यस्त है। मगर एग्जिट पोल आने के बाद नेताजी ने भी कॉलोनाइजर की सिफारिश में अफसरों को अवैध कॉलोनी ध्वस्त न करने के लिए फोन किए थे। उसका भी असर दिखा। कॉलोनाइजर माननीयों के घरों के चक्कर लगाकर किसी तरह अपनी अवैध कॉलोनी बचाने में जुटा है। माननीय भी उसकी पैरवी में हैं। ऐसे में आगे भी अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई मुश्किल नजर आ रही है।
बीडीए की सख्ती और व्यापारी कमिश्नर से मिले
बरेली। बीडीए की अवैध निर्माण पर सख्ती और कंपाउंडिंग कैंप लगाने के विरोध में उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी कमिश्नर से मिले और उनको ज्ञापन देकर बीडीए की कार्रवाई पर विरोध जताया। व्यापारियों ने कहा कि बरेली महायोजना 1978 में बनी थी। इसमें जो एरिया कमर्शियल दर्शाया गया, वही एरिया 2021 में रिहायशी दर्शा दिया गया, जबकि तब तक बहुत से इलाके कमर्शियल हो चुके थे। मगर बीडीए में वह एरिया रिहायशी ही रहे। बीडीए ने जानबूझकर व्यवसायिक एरिया कम दर्शाया, ताकि व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा सके।
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अध्यक्ष नवीन अग्रवाल और महामंत्री सुदेश अग्रवाल ने कहा कि बीडीए को कमर्शियल एरिया घोषित करने का अधिकार नहीं है क्योंकि 2014 की अधिसूचना का गजट नहीं है। कंपाउंडिंग के नाम पर व्यापारियों को गुमराह किया जा रहा है। पवन अरोड़ा ने कहा कि व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे। व्यापारियों के अनुसार कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में बीडीए अधिकारियों से बात करके हल निकालेेंगे। व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं होगा। ज्ञापन देने वालों में सतीश अग्रवाल, दुर्गेश गुप्ता, अमित अरोड़ा, खलील कादरी, अमित वर्मा आदि व्यापारी शामिल थे।
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मुंशीनगर के निकट अवैध कॉलोनी ध्वस्तीकरण का आदेश बीडीए ने कुछ दिन पहले ही पारित किया था। 21 मई को ध्वस्तीकरण की तारीख लगी थी। इसके लिए बीडीए की ओर से प्रशासन से मजिस्ट्रेट और फोर्स की मांग की गई। प्रशासन ने काउंटिंग का हवाला देकर मजिस्ट्रेट और पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर लिए। हालांकि प्रशासन का यह तर्क काफी हद तक ठीक भी था क्योंकि 23 मई से लोकसभा चुनाव की मतगणना होनी है। उसमें प्रशासन और पुलिस व्यस्त है। मगर एग्जिट पोल आने के बाद नेताजी ने भी कॉलोनाइजर की सिफारिश में अफसरों को अवैध कॉलोनी ध्वस्त न करने के लिए फोन किए थे। उसका भी असर दिखा। कॉलोनाइजर माननीयों के घरों के चक्कर लगाकर किसी तरह अपनी अवैध कॉलोनी बचाने में जुटा है। माननीय भी उसकी पैरवी में हैं। ऐसे में आगे भी अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई मुश्किल नजर आ रही है।
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बीडीए की सख्ती और व्यापारी कमिश्नर से मिले
बरेली। बीडीए की अवैध निर्माण पर सख्ती और कंपाउंडिंग कैंप लगाने के विरोध में उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी कमिश्नर से मिले और उनको ज्ञापन देकर बीडीए की कार्रवाई पर विरोध जताया। व्यापारियों ने कहा कि बरेली महायोजना 1978 में बनी थी। इसमें जो एरिया कमर्शियल दर्शाया गया, वही एरिया 2021 में रिहायशी दर्शा दिया गया, जबकि तब तक बहुत से इलाके कमर्शियल हो चुके थे। मगर बीडीए में वह एरिया रिहायशी ही रहे। बीडीए ने जानबूझकर व्यवसायिक एरिया कम दर्शाया, ताकि व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा सके।
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अध्यक्ष नवीन अग्रवाल और महामंत्री सुदेश अग्रवाल ने कहा कि बीडीए को कमर्शियल एरिया घोषित करने का अधिकार नहीं है क्योंकि 2014 की अधिसूचना का गजट नहीं है। कंपाउंडिंग के नाम पर व्यापारियों को गुमराह किया जा रहा है। पवन अरोड़ा ने कहा कि व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे। व्यापारियों के अनुसार कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में बीडीए अधिकारियों से बात करके हल निकालेेंगे। व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं होगा। ज्ञापन देने वालों में सतीश अग्रवाल, दुर्गेश गुप्ता, अमित अरोड़ा, खलील कादरी, अमित वर्मा आदि व्यापारी शामिल थे।