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कोई जिए या मरे.. इन डॉक्टरों पर कोई फर्क नहीं
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:17 AM IST
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बिशारतगंज। बुखार और डायरिया से जिले में मौतों का आंकड़ा सौ को पार कर जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की बेपरवाही जस की तस है। रविवार को डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह खुद इसके साक्षी बने। मझगवां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम को यहां चार डॉक्टर और 11 कर्मचारी गैरहाजिर मिले। दूसरी ओर अस्पताल में भर्ती मरीजों का हाल बेहाल था। डीएम के नाराजगी जताने के बाद गैरहाजिर डॉक्टरों और स्टाफ का जवाबतलब किया गया है। रामनगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी चार कर्मचारी गैरहाजिर मिले।
संक्रामक रोगों से मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ने का मामला शासन स्तर पर गूंज रहा है। हालत यह है कि अब डीएम-सीडीओ जैसे अफसरों को भी गांवों की दौड़ लगानी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ स्थिति की गंभीरता समझने को तैयार नहीं है। अपनी गर्दन बचाने के लिए आंकड़ों के साथ खेल करने में तो पूरा जोर लगाया जा रहा है, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे मरीजों के इलाज को लेकर अभी भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। रविवार को डीएम सुर्खियों में बने मझगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुबह 11 बजे पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टर नहीं दिखाई दिए तो डीएम ने उपस्थिति पंजिका तलब की। पता चला कि महिला चिकित्सक डॉ. पायल अरोड़ा, डॉ. सोनिका कटियार, डॉ, मानस माहेश्वरी, डॉ. दिनेश यादव के अलावा स्वास्थ्य पर्यवेक्षक राधे श्याम माथुर, राम पाल सिंह, बाबू राम शर्मा, चित्र कुमार, फार्मसिस्ट श्रीराम, स्टाफ नर्स सैनी मौर्य और ज्योति शर्मा को गैरहाजिर हैं। बता दें कि कुछ ही दिन पहले सभी डॉक्टरों और स्टाफ की छुट्टी निरस्त करने का आदेश दिया गया था। डीएम ने यहां दवाओं के स्टाक की भी जानकारी ली।
रामनगर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डीएम को चार स्टाफ नहीं मिले। वहां मौजूद डॉ. अजय ने बताया ने डीएम को स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों की जानकारी दी। सभी गायब कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है।
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सभी ब्लड सैंपल में मलेरिया की पुष्टि
मझगवां अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में डीएम को बताया गया कि 18 रोगियों के ब्लड की जांच हुई है, सभी में मलेरिया के लक्षण पाये गये है। टाइफाइड और डेंगू आदि की भी जांच की जा रही है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वैभव राठौर ने बताया कि 54 बुखार के मरीज आए थे। तीन दिन पहले तक रोजाना बुखार के 800 रोगी आ रहे थे लेकिन अब यह संख्या 500 रह गई है।
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संक्रामक रोगों से मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ने का मामला शासन स्तर पर गूंज रहा है। हालत यह है कि अब डीएम-सीडीओ जैसे अफसरों को भी गांवों की दौड़ लगानी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ स्थिति की गंभीरता समझने को तैयार नहीं है। अपनी गर्दन बचाने के लिए आंकड़ों के साथ खेल करने में तो पूरा जोर लगाया जा रहा है, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे मरीजों के इलाज को लेकर अभी भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। रविवार को डीएम सुर्खियों में बने मझगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुबह 11 बजे पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टर नहीं दिखाई दिए तो डीएम ने उपस्थिति पंजिका तलब की। पता चला कि महिला चिकित्सक डॉ. पायल अरोड़ा, डॉ. सोनिका कटियार, डॉ, मानस माहेश्वरी, डॉ. दिनेश यादव के अलावा स्वास्थ्य पर्यवेक्षक राधे श्याम माथुर, राम पाल सिंह, बाबू राम शर्मा, चित्र कुमार, फार्मसिस्ट श्रीराम, स्टाफ नर्स सैनी मौर्य और ज्योति शर्मा को गैरहाजिर हैं। बता दें कि कुछ ही दिन पहले सभी डॉक्टरों और स्टाफ की छुट्टी निरस्त करने का आदेश दिया गया था। डीएम ने यहां दवाओं के स्टाक की भी जानकारी ली।
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रामनगर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डीएम को चार स्टाफ नहीं मिले। वहां मौजूद डॉ. अजय ने बताया ने डीएम को स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों की जानकारी दी। सभी गायब कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है।
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सभी ब्लड सैंपल में मलेरिया की पुष्टि
मझगवां अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में डीएम को बताया गया कि 18 रोगियों के ब्लड की जांच हुई है, सभी में मलेरिया के लक्षण पाये गये है। टाइफाइड और डेंगू आदि की भी जांच की जा रही है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वैभव राठौर ने बताया कि 54 बुखार के मरीज आए थे। तीन दिन पहले तक रोजाना बुखार के 800 रोगी आ रहे थे लेकिन अब यह संख्या 500 रह गई है।