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पिता, दो पुत्रों और पुत्री को आजीवन कारावास
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Wed, 16 May 2018 01:35 AM IST
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गैर इरादतन हत्या के चार वर्ष पुराने मामले जहानाबाद कस्बे के एक व्यक्ति, उसके दो पुत्रों और एक पुत्री को दोषी पाए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। घटना एक दीवार बनाने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई थी।
यह घटना 30 जून 2014 को हुई थी और इसमें नन्हे बख्श की जान गई थी। इस मामले में पहले नन्हे बख्श की ओर से ही एनसीआर दर्ज हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार शफी अहमद उसके दो पुत्र आसिफ, शाहिद और पुत्री जीनत उसके पड़ोसी हैं। इन लोगों से दीवार को लेकर झगड़ा हुआ था। उसका फैसला हो गया था, लेकिन उसी बात की रंजिश मानकर 30 जून को सुबह सात बजे इन चारों लोगों ने गालियां देते हुए लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। इसस नन्हे बख्श, उसके पुत्र आरिफ, इकबाल और कनीज को चोटें आईं।
घायलों का इलाज जहानाबाद के सरकारी अस्पताल में कराया गया। हालत गंभीर होने के कारण नन्हे बख्श को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले को गैर इरादतन हत्या की धारा में तरमीम कर दिया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार शुक्ला की अदालत में हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने शफी अहमद, उसके पुत्र आसिफ, शाहिद और पुत्री जीनत को दोषी पाकर प्रत्येक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। चारों आरोपियों पर आठ-आठ हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
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यह घटना 30 जून 2014 को हुई थी और इसमें नन्हे बख्श की जान गई थी। इस मामले में पहले नन्हे बख्श की ओर से ही एनसीआर दर्ज हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार शफी अहमद उसके दो पुत्र आसिफ, शाहिद और पुत्री जीनत उसके पड़ोसी हैं। इन लोगों से दीवार को लेकर झगड़ा हुआ था। उसका फैसला हो गया था, लेकिन उसी बात की रंजिश मानकर 30 जून को सुबह सात बजे इन चारों लोगों ने गालियां देते हुए लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। इसस नन्हे बख्श, उसके पुत्र आरिफ, इकबाल और कनीज को चोटें आईं।
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घायलों का इलाज जहानाबाद के सरकारी अस्पताल में कराया गया। हालत गंभीर होने के कारण नन्हे बख्श को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले को गैर इरादतन हत्या की धारा में तरमीम कर दिया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार शुक्ला की अदालत में हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने शफी अहमद, उसके पुत्र आसिफ, शाहिद और पुत्री जीनत को दोषी पाकर प्रत्येक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। चारों आरोपियों पर आठ-आठ हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
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