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यूपी के 38 जिलों पर बाढ़ का ज्यादा खतरा: धर्मपाल

Sun, 02 Jul 2017 01:21 AM IST
Updated Sun, 02 Jul 2017 01:21 AM IST
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यूपी के 38 जिलों पर बाढ़ का ज्यादा खतरा: धर्मपाल
बरेली।
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सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक माह पहले ही बाढ़ प्रभावित 38 जिलों के जिलाधिकारियों को बुलाकर बिहार और नेपाल सीमा तक संभावित बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दे चुके हैं। इन जिलों में बाढ़ से निपटने की तैयारियों की रिपोर्ट भी आ चुकी है। चौकियां बन चुकी हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राशन वितरण, मिट्टी तेल वितरण, ठहरने के लिए शेल्टर होम और पशुओं के चारा तुरंत उपलब्ध होगा। बाढ़ से जन और धन हानि कम से कम हो। इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गंडक नदी कुशीनगर में अभी से तबाही मचाए हुए है। नदी के किनारे वाले गांवों में कटान हो रहा है। इसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 15 जून से पहले सभी तैयारियां मुकम्मल हो चुकी हैं। बाढ़ आने पर अब न धनहानि होगी, न जन हानि। सिंचाई मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 38 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें बाढ़ चौकियां बनाई जा रही हैं। कंट्रोल रूम खोल दिए गए हैं। बरेली का कुछ हिस्सा बाढ़ग्रस्त है जबकि पीलीभीत का बड़ा हिस्सा बाढ़ग्रस्त है। धौरा जलाशय पर अनाधिकृत कब्जे के बारे में धर्मपाल सिंह ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड की संपत्तियों का बंटवारा हो चुका है। इसमें 75 फीसदी संपत्तियां यूपी और 25 फीसदी उत्तराखंड को मिली हैं। अनाधिकृत कब्जे हर हाल में हटेंगे। लंबे समय से मकान बनाकर रहने वालों से सर्किल रेट पर जुर्माना वसूला जाएगा लेकिन सरकार उनको बेघर नहीं करेगी। हरिद्वार का गेस्ट हाउस उत्तराखंड में चले जाने से वहां सिंचाई विभाग अपना गेस्ट बनवा रहा है। कुंभ मेला की जमीन यूपी की रहेगी। उत्तराखंड सरकार केवल उसे अपने प्रयोग में ला सकती है।
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एक प्रधान, एक विधान एक निशान सार्थक
सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि एकीकृत कर प्रणाली (जीएसटी) पूरे देश में लागू होने से भाजपा का ये नारा ‘एक प्रधान, एक विधान और एक निशान’ सार्थक हो रहा है। जीएसटी लागू होने से इंस्पेक्टर राज समाप्त होगा। व्यापारियों, उद्यमियों को सब मिलाकर एक टैक्स देना होगा। ऑनलाइन सिस्टम से व्यापारी इंस्पेक्टर राज के शोषण से मुक्त होंगे। जीएसटी किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। ट्रैक्टर, खाद और बीज के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। जीएसटी का विरोध केवल वह व्यापारी कर रहे हैं जो जनता से तो टैक्स लेते हैं लेकिन सरकार को नहीं देते। या फिर राजनीतिक दल दलीय भावना से विरोध करने में जुटे हैं। वह लोग भी जीएसटी का विरोध कर रहे हैं तो ठीक से उसे समझ नहीं पाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी और जीएसटी ऐतिहासिक निर्णय हैं। इनसे देश विकास के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाने जा रहा है।
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