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मंडल में बरेली और बदायूं अति संवेदनशील
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बरेली। बारह अगस्त को पुलिस और प्रशासन की अग्नि परीक्षा होगी। उस दिन सावन का चौथा सोमवार और बकरीद है। एक तरफ सड़कों से लेकर शिवालयों तक कांवड़ियों की भीड़ होगी, दूसरी ओर मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ रहेगी और फिर कुर्बानी की जाएगी। खुफिया सूत्रों के अनुसार मंडल में बरेली और बदायूं अति संवेदनशील माने जा रहे हैं। खुफिया विभाग ने 18 स्थान चिह्नित कर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा है।
बरेली, बदायूं और पीलीभीत के करीब 80 प्रतिशत कांवड़िया कछला घाट से गंगाजल लाते हैं। 20 प्रतिशत कांवड़िया गंगाजल लेने हरिद्वार जाते हैं। नाथ नगरी होने से बरेली में कांवड़ियों की भीड़ मंडल में सबसे ज्यादा रहती है। पीलीभीत के कांवड़िया भी बरेली होकर जाते हैं। बकरीद के दिन खुले में कुर्बानी और कचरा फेंकने को लेकर कई बार बवाल हो चुके हैं। वर्ष 2012 में कोहाड़ापीर और मठ चौकी पर कांवड़ियों पर पथराव के बाद शहर में दंगा हुआ था। दो साल पहले बदायूं में कांवड़ियों से मारपीट के बाद बवाल हुआ था। इसलिए खुफिया विभाग ने बरेली और बदायूं को अति संवेदनशील बताते हुए अलर्ट किया है।
शाहजहांपुर में भी कांवड़ियों की संख्या अच्छी रहती है। वहां के ज्यादातर कांवड़िया फर्रुखाबाद के घटिया घाट से गंगाजल लाने के बाद गोला गोकर्णनाथ जाकर जलाभिषेक करते हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक इस साल शाहजहांपुर में कई कांवड़िया हादसे का शिकार हो चुके हैं। आखिरी सोमवार को बकरीद होने से संवेदनशीलता और ज्यादा बढ़ गई है। पीलीभीत में कांवड़ियों की संख्या मंडल के दूसरे जिलों की अपेक्षा कम रहती है, लेकिन मिश्रित आबादी में विवाद वहां भी होते रहे हैं।
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मिश्रित आबादी वाले कई क्षेत्र अति संवेदनशील घोषित
बरेली शहर के सभी थाना क्षेत्रों में दोनों समुदायों के लोग रहते हैं। खुफिया विभाग ने 18 स्थान अति संवेदनशील चिह्नित किए हैं। शहर के आजमनगर, मठ चौकी, सिकलापुर, कटरा चांद खां, जोगी नवादा, मलूकपुर, गढ़ईया, कुंवरपुर, बाकरगंज, स्वालेनगर, गुलाब नगर, बानखाना, शाहबाद, कोहाड़ापीर, नकटिया, ठिरिया निजावत खां और इज्जतनगर, सीबीगंज, बिथरी चैनपुर थाने के कई क्षेत्रों में मिश्रित आबादी है। शहर में कई जगह सामूहिक कुर्बानी का स्थान कांवड़ियों के रास्ते में पड़ता है।
‘वैसे तो सावन के आखिरी सोमवार को बकरीद होने से मंडल के सभी जिले संवेदनशील हैं, लेकिन बरेली और बदायूं में कांवड़ियों की संख्या ज्यादा रहने से इन्हें अति संवेदनशील माना गया है। सभी पुलिस अफसरों को ऐसे स्थानों को चिह्नित करने को कहा गया है, जहां सामूहिक कुर्बानी कांवड़ियों के निकलने वाले रास्तों के किनारे होती है। इन स्थानों पर आम सहमति से कुर्बानी का समय बदलने को कहा गया है। मंडल के चारों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे।’- राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी
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बरेली, बदायूं और पीलीभीत के करीब 80 प्रतिशत कांवड़िया कछला घाट से गंगाजल लाते हैं। 20 प्रतिशत कांवड़िया गंगाजल लेने हरिद्वार जाते हैं। नाथ नगरी होने से बरेली में कांवड़ियों की भीड़ मंडल में सबसे ज्यादा रहती है। पीलीभीत के कांवड़िया भी बरेली होकर जाते हैं। बकरीद के दिन खुले में कुर्बानी और कचरा फेंकने को लेकर कई बार बवाल हो चुके हैं। वर्ष 2012 में कोहाड़ापीर और मठ चौकी पर कांवड़ियों पर पथराव के बाद शहर में दंगा हुआ था। दो साल पहले बदायूं में कांवड़ियों से मारपीट के बाद बवाल हुआ था। इसलिए खुफिया विभाग ने बरेली और बदायूं को अति संवेदनशील बताते हुए अलर्ट किया है।
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शाहजहांपुर में भी कांवड़ियों की संख्या अच्छी रहती है। वहां के ज्यादातर कांवड़िया फर्रुखाबाद के घटिया घाट से गंगाजल लाने के बाद गोला गोकर्णनाथ जाकर जलाभिषेक करते हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक इस साल शाहजहांपुर में कई कांवड़िया हादसे का शिकार हो चुके हैं। आखिरी सोमवार को बकरीद होने से संवेदनशीलता और ज्यादा बढ़ गई है। पीलीभीत में कांवड़ियों की संख्या मंडल के दूसरे जिलों की अपेक्षा कम रहती है, लेकिन मिश्रित आबादी में विवाद वहां भी होते रहे हैं।
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मिश्रित आबादी वाले कई क्षेत्र अति संवेदनशील घोषित
बरेली शहर के सभी थाना क्षेत्रों में दोनों समुदायों के लोग रहते हैं। खुफिया विभाग ने 18 स्थान अति संवेदनशील चिह्नित किए हैं। शहर के आजमनगर, मठ चौकी, सिकलापुर, कटरा चांद खां, जोगी नवादा, मलूकपुर, गढ़ईया, कुंवरपुर, बाकरगंज, स्वालेनगर, गुलाब नगर, बानखाना, शाहबाद, कोहाड़ापीर, नकटिया, ठिरिया निजावत खां और इज्जतनगर, सीबीगंज, बिथरी चैनपुर थाने के कई क्षेत्रों में मिश्रित आबादी है। शहर में कई जगह सामूहिक कुर्बानी का स्थान कांवड़ियों के रास्ते में पड़ता है।
‘वैसे तो सावन के आखिरी सोमवार को बकरीद होने से मंडल के सभी जिले संवेदनशील हैं, लेकिन बरेली और बदायूं में कांवड़ियों की संख्या ज्यादा रहने से इन्हें अति संवेदनशील माना गया है। सभी पुलिस अफसरों को ऐसे स्थानों को चिह्नित करने को कहा गया है, जहां सामूहिक कुर्बानी कांवड़ियों के निकलने वाले रास्तों के किनारे होती है। इन स्थानों पर आम सहमति से कुर्बानी का समय बदलने को कहा गया है। मंडल के चारों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे।’- राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी