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बरेली-सीतापुर हाईवे- एनएचएआई के अफसर अभी अप्रैल तक का करेंगे इंतजार
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बरेली। बरेली-सीतापुर हाईवे के हिचकोले अभी खत्म होेने वाले नहीं हैं। एनएचएआई के अधिकारियों ने अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए इसमें निवेश करने वाली बैंकों को इस काम का तीन माह का और वक्त दे दिया है कि वे खुद इस प्रोजेक्ट को पूरा करा लें। इस पर जो खर्च आएगा, उसे वह टोल टैक्स के जरिये वसूल करेंगी। बैंकों को इसके लिए पहले भी छह माह का समय दिया गया था। समय सीमा बढ़ाने के बाद एनएचएआई के अफसरों को अप्रैल तक इंतजार करना है। बताते हैं कि इसके बाद एनएचएआई ने अगर काम शुरू कराने की तैयारी की भी तो बारिश के मौसम से पहले हाईवे को ठीक कर पाना मुमकिन नहीं होगा
करीब 2700 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बीच में ही अधूरा छोड़कर फरार हो चुकी है। इस हाईवे की हालत काफी खराब है। फरीदपुर, फतेहगंज सहित कई जगहों पर बारिश के दौरान हाईवे टूट गया था। इससे आए दिन हादसे होते रहे और इसमें कई लोगों को जान से हाथ तक गंवाना पड़ गया, जबकि इस प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये का निवेश करने वाली बैंकें भी फंस गई हैं। इसे लेकर एनएचएआई और इन बैंकों के अधिकारियों के बीच अगस्त में दिल्ली में यह डील हुई थी कि बैंक अपने स्तर से इस अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए कांट्रेक्टर तय कर लें। हाईवे बनाने में उनका जितना खर्च आएगा, उसे टोल टैक्स के माध्यम से वसूल किया होगा। एनएचएआई ने इसके लिए बैंकों को छह माह का वक्त दिया गया था। बावजूद इसके बैंक इस हाईवे को सुधारने का काम शुुरू नहीं कर सकी है। इसके बाद भी एनएचएआई के अधिकारियों ने इन बैंकों को 90 दिनों का वक्त और दे दिया है, जो 13 अप्रैल को पूरा होगा। इस समय सीमा में बैंकें अगर फिर काम नहीं करा सकीं तो बाद में एनएचएआई को इसे खुद पूरा कराने की जिम्मेदारी लेनी होगी। इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि बैंक ये काम करा दिक्कत यह है कि दिल्ली-लखनऊ हाईवे के इस महत्वपूर्ण हिस्से का काम जल्द शुरू नहीं हुआ और अप्रैल तक समय यूं ही गुजरा गया तो बारिश के मौसम में स्थिति बद से बदतर होंगी।
उल्टी दिशा में वाहनों के चलने से हो रहे हादसे
फरीदपुर से आगे शाहजहांपुर के बीच कई जगहों पर हाईवे टूटा और अधूरा पड़ा है। कई जगहों पर खतरनाक गड्ढे भी बने हुए हैं। ऐसे में वाहन चालक डिवाइडर के कट से गाड़ी को उल्टी दिशा में ले जाते हैं। ऐसे में हादसे हो रहे हैं। इसके अलावा रात में कई बार टूटा रोड न दिखाई देेने के गाड़ियों के पहिये गड्ढे में पहुंचकर जोर से उछलते हैं। इससे भी दुर्घटनाएं हो रही है। इसके अलावा हाईवे के बीच कस्बों में फ्लाईओवर के काम भी अधूरे पड़े हैं।
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प्रोजेक्ट के लिए निवेश करने वाली बैंकों को एक बार और वक्त दिया गया है। काम पूरा नहीं हुआ तो एनएचएआई खुद ही इस काम को कराएगी। अभी अप्रैल तक इंतजार किया जा रहा है।
- चंदन वत्स, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई
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करीब 2700 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बीच में ही अधूरा छोड़कर फरार हो चुकी है। इस हाईवे की हालत काफी खराब है। फरीदपुर, फतेहगंज सहित कई जगहों पर बारिश के दौरान हाईवे टूट गया था। इससे आए दिन हादसे होते रहे और इसमें कई लोगों को जान से हाथ तक गंवाना पड़ गया, जबकि इस प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये का निवेश करने वाली बैंकें भी फंस गई हैं। इसे लेकर एनएचएआई और इन बैंकों के अधिकारियों के बीच अगस्त में दिल्ली में यह डील हुई थी कि बैंक अपने स्तर से इस अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए कांट्रेक्टर तय कर लें। हाईवे बनाने में उनका जितना खर्च आएगा, उसे टोल टैक्स के माध्यम से वसूल किया होगा। एनएचएआई ने इसके लिए बैंकों को छह माह का वक्त दिया गया था। बावजूद इसके बैंक इस हाईवे को सुधारने का काम शुुरू नहीं कर सकी है। इसके बाद भी एनएचएआई के अधिकारियों ने इन बैंकों को 90 दिनों का वक्त और दे दिया है, जो 13 अप्रैल को पूरा होगा। इस समय सीमा में बैंकें अगर फिर काम नहीं करा सकीं तो बाद में एनएचएआई को इसे खुद पूरा कराने की जिम्मेदारी लेनी होगी। इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि बैंक ये काम करा दिक्कत यह है कि दिल्ली-लखनऊ हाईवे के इस महत्वपूर्ण हिस्से का काम जल्द शुरू नहीं हुआ और अप्रैल तक समय यूं ही गुजरा गया तो बारिश के मौसम में स्थिति बद से बदतर होंगी।
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उल्टी दिशा में वाहनों के चलने से हो रहे हादसे
फरीदपुर से आगे शाहजहांपुर के बीच कई जगहों पर हाईवे टूटा और अधूरा पड़ा है। कई जगहों पर खतरनाक गड्ढे भी बने हुए हैं। ऐसे में वाहन चालक डिवाइडर के कट से गाड़ी को उल्टी दिशा में ले जाते हैं। ऐसे में हादसे हो रहे हैं। इसके अलावा रात में कई बार टूटा रोड न दिखाई देेने के गाड़ियों के पहिये गड्ढे में पहुंचकर जोर से उछलते हैं। इससे भी दुर्घटनाएं हो रही है। इसके अलावा हाईवे के बीच कस्बों में फ्लाईओवर के काम भी अधूरे पड़े हैं।
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प्रोजेक्ट के लिए निवेश करने वाली बैंकों को एक बार और वक्त दिया गया है। काम पूरा नहीं हुआ तो एनएचएआई खुद ही इस काम को कराएगी। अभी अप्रैल तक इंतजार किया जा रहा है।
- चंदन वत्स, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई