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बीएससी प्रथम और द्वितीय में 78 फीसदी स्टूडेंट्स फेल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Fri, 08 Jun 2018 01:38 AM IST
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MJP Rohilkhand university
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योगी सरकार में विश्वविद्यालय की परीक्षाएं कड़ी निगरानी के बीच हुईं। स्वकेंद्र व्यवस्था खत्म करते हुए परीक्षाएं दूसरे कॉलेजों में सीसीटीवी की निगरानी में कराई गईं। इस सख्ती का जबरदस्त असर अब रिजल्ट पर देखने को मिल रहा है। बीएससी फाइनल की तरह एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय का बीएससी प्रथम और द्वितीय वर्ष का रिजल्ट भी धड़ाम हो गया है। बीएससी फाइनल की तुलना में फर्स्ट ईयर और सेकेंड ईयर में फेल होने वालों का ग्राफ और भी बढ़ गया है। गुरुवार को जारी बीएससी प्रथम और द्वितीय में महज 22 फीसद स्टूडेंट्स ही पास हो सके। 78 फीसदी विद्यार्थी फेल हुए हैं। बीएससी फाइनल में महज 39 फीसद छात्र पास हो सके थे और 61 फीसद फेल हो गए थे।
शासन के आदेश के बाद विश्वविद्यालय ने कॉलेजों पर नकेल कसते हुए कड़ी निगरानी के बीच परीक्षा कराई। रिजल्ट पर इसका असर पड़ना तय था। लगभग सभी कोर्स का रिजल्ट इस बार गिरा है और बीएससी के रिजल्ट ने तो सबको चौंका ही दिया है। बीए फाइनल का परिणाम वैसे 90 फीसद से ऊपर रहता था। इस बार एक दो फीसद रिजल्ट नीचे आया। बीए प्रथम और द्वितीय में करीब 80 से 85 फीसद स्टूडेंट्स पास हो सके। बीएससी फाइनल में 61 फीसद स्टूडेंट्स फेल हुए थे। बीएससी प्रथम में 45 हजार और द्वितीय में करीब 46 हजार स्टूडेंट्स थे। दोनों में 22 फीसदी ही पास हो सके। परीक्षा नियंत्रक महेश कुमार के अनुसार इस बार बीएससी का रिजल्ट काफी खराब गया है।
किसी को शून्य तो कोई
दहाई तक भी नहीं पहुंचा
बीएससी फाइल की तरह बीएससी प्रथम और द्वितीय में भी तमाम स्टूडेंट्स दहाई का आंकड़ा तक नहीं छू पाए। हालांकि उनको प्रैक्टिकल में भरपूर नंबर मिले हैं। प्रैक्टिकल कॉलेजों में ही हुए तो उनको मनमाने नंबर मिल गए, जब थ्योरी की परीक्षा दूसरे कॉलेज में देने जाना पड़ा तो वहां दाल नहीं गल पाई। कई छात्र तो ऐसे हैं जिनके थ्योरी में जीरो नंबर हैं। रिजल्ट को लेकर छात्रों में रोष है। छात्र संगठन विश्वविद्यालय कैंपस में धरना प्रदर्शन करने की तैयारी में जुट गए हैं।
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शासन के आदेश के बाद विश्वविद्यालय ने कॉलेजों पर नकेल कसते हुए कड़ी निगरानी के बीच परीक्षा कराई। रिजल्ट पर इसका असर पड़ना तय था। लगभग सभी कोर्स का रिजल्ट इस बार गिरा है और बीएससी के रिजल्ट ने तो सबको चौंका ही दिया है। बीए फाइनल का परिणाम वैसे 90 फीसद से ऊपर रहता था। इस बार एक दो फीसद रिजल्ट नीचे आया। बीए प्रथम और द्वितीय में करीब 80 से 85 फीसद स्टूडेंट्स पास हो सके। बीएससी फाइनल में 61 फीसद स्टूडेंट्स फेल हुए थे। बीएससी प्रथम में 45 हजार और द्वितीय में करीब 46 हजार स्टूडेंट्स थे। दोनों में 22 फीसदी ही पास हो सके। परीक्षा नियंत्रक महेश कुमार के अनुसार इस बार बीएससी का रिजल्ट काफी खराब गया है।
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किसी को शून्य तो कोई
दहाई तक भी नहीं पहुंचा
बीएससी फाइल की तरह बीएससी प्रथम और द्वितीय में भी तमाम स्टूडेंट्स दहाई का आंकड़ा तक नहीं छू पाए। हालांकि उनको प्रैक्टिकल में भरपूर नंबर मिले हैं। प्रैक्टिकल कॉलेजों में ही हुए तो उनको मनमाने नंबर मिल गए, जब थ्योरी की परीक्षा दूसरे कॉलेज में देने जाना पड़ा तो वहां दाल नहीं गल पाई। कई छात्र तो ऐसे हैं जिनके थ्योरी में जीरो नंबर हैं। रिजल्ट को लेकर छात्रों में रोष है। छात्र संगठन विश्वविद्यालय कैंपस में धरना प्रदर्शन करने की तैयारी में जुट गए हैं।
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