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रामगंगा नगर में 22 करोड़ के कामों पर ग्रहण
Updated Fri, 16 Jun 2017 09:31 PM IST
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बरेली।
बीडीए की रामगंगा नगर आवासीय योजना एक बार फिर संकट में फंसती नजर आ रही है। बाइस करोड़ के कामों पर ग्रहण लग गया है। एक तो प्रशासन से मिट्टी निकालने की परमीशन नहीं मिल पा रही, वहीं दूसरी ओर ठेकेदारों का पेमेंट करने के लिए बीडीए के पास बजट नहीं है। बीडीए ने बैंक से सौ करोड़ का लोन लिया था, वह जमीन अधिग्रहण का मुआवजा देने में खर्च हो चुका है। अब बीडीए बैंक से और लोन लेने की तैयारी कर रहा है।
बरेली विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2004-05 में रामगंगा नगर आवासीय योजना शुरू की थी। लंबे समय तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी। किसी तरह 2015 में जमीन अधिग्रहण हो पाया तो अभी किसानों के मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ। मुआवजा देने के लिए बीडीए ने सौ करोड़ का लोन लिया है। कुछ किसान मुआवजा लेने को तैयार नहीं हैं। जिन किसानों ने मुआवजा लिया है, उनमें से बहुत से किसानों ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री दूसरे लोगों को भी कर दी। एक ही जमीन की दोहरी रजिस्ट्री होने से यहां अनाधिकृत कब्जे हटाने का विवाद भी चल रहा है। तमाम विवादों के बीच में बीडीए ने यहां बड़े हिस्से में रोड निर्माण के काम शुरू कर रखे हैं जिनकी लागत 22 करोड़ से अधिक है। ये काम एक तरह से लटक गए हैं। ठेकेदारों की मानें तो टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और काम शुरू होने के बाद उनके भुगतान नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि बीडीए के पास भुगतान के लिए बजट नहीं है। उधर उत्तराखंड से आने वाली मौरंग, रेता, बजरी आदि निर्माण सामग्री महंगी होने से सड़क निर्माण की लागत बढ़ गई है। ठेकेदारों के अनुसार बीडीए अफसरों ने बैंक से लोन लेकर भुगतान करने की बात कही है लेकिन तब तक वह काम कहां से करें। फिलहाल, अधिकांश ठेकेदारों मिट्टी की परमीशन के बहाने काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
रामगंगा नगर में सात जोनल रोड बन रहे हैं। मिट्टी की परमीशन न मिलने से कुछ समस्याएं आ रही हैं। भुगतान की ऐसी दिक्कत नहीं है। जहां जरूरी हैं, वहां भुगतान कराए जा रहे हैं। बाकी के लिए हम बैंक से लोन ले रहे हैं। अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए
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बीडीए की रामगंगा नगर आवासीय योजना एक बार फिर संकट में फंसती नजर आ रही है। बाइस करोड़ के कामों पर ग्रहण लग गया है। एक तो प्रशासन से मिट्टी निकालने की परमीशन नहीं मिल पा रही, वहीं दूसरी ओर ठेकेदारों का पेमेंट करने के लिए बीडीए के पास बजट नहीं है। बीडीए ने बैंक से सौ करोड़ का लोन लिया था, वह जमीन अधिग्रहण का मुआवजा देने में खर्च हो चुका है। अब बीडीए बैंक से और लोन लेने की तैयारी कर रहा है।
बरेली विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2004-05 में रामगंगा नगर आवासीय योजना शुरू की थी। लंबे समय तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी। किसी तरह 2015 में जमीन अधिग्रहण हो पाया तो अभी किसानों के मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ। मुआवजा देने के लिए बीडीए ने सौ करोड़ का लोन लिया है। कुछ किसान मुआवजा लेने को तैयार नहीं हैं। जिन किसानों ने मुआवजा लिया है, उनमें से बहुत से किसानों ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री दूसरे लोगों को भी कर दी। एक ही जमीन की दोहरी रजिस्ट्री होने से यहां अनाधिकृत कब्जे हटाने का विवाद भी चल रहा है। तमाम विवादों के बीच में बीडीए ने यहां बड़े हिस्से में रोड निर्माण के काम शुरू कर रखे हैं जिनकी लागत 22 करोड़ से अधिक है। ये काम एक तरह से लटक गए हैं। ठेकेदारों की मानें तो टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और काम शुरू होने के बाद उनके भुगतान नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि बीडीए के पास भुगतान के लिए बजट नहीं है। उधर उत्तराखंड से आने वाली मौरंग, रेता, बजरी आदि निर्माण सामग्री महंगी होने से सड़क निर्माण की लागत बढ़ गई है। ठेकेदारों के अनुसार बीडीए अफसरों ने बैंक से लोन लेकर भुगतान करने की बात कही है लेकिन तब तक वह काम कहां से करें। फिलहाल, अधिकांश ठेकेदारों मिट्टी की परमीशन के बहाने काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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रामगंगा नगर में सात जोनल रोड बन रहे हैं। मिट्टी की परमीशन न मिलने से कुछ समस्याएं आ रही हैं। भुगतान की ऐसी दिक्कत नहीं है। जहां जरूरी हैं, वहां भुगतान कराए जा रहे हैं। बाकी के लिए हम बैंक से लोन ले रहे हैं। अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए
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