{"_id":"5c9294a3bdec2214374a75e2","slug":"121553110179-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यह है हमारे हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की ताकत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यह है हमारे हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की ताकत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। रामबरात में सिर्फ हुरियारों का हुड़दंग नहीं, शहर के सांप्रदायिक सौहार्द की बानगी भी लोगों ने देखी। साहू गोपीनाथ डिग्री कॉलेेज के नजदीक जहां शाम को एक ओर पत्थर बरस रहे थे तो वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय की ओर से राम बरात का पुष्पवर्षा और मुंह मीठा कराकर स्वागत किया जा रहा था। सौहार्द के इस माहौल में फूलों के आगे पत्थरों की जुबां कुछ ही देर में खामोश होकर रह गई। सौहार्द का परचम बुलंद करने वालों ने एलान किया कि बरेली के अमन चैन में खलल डालने की पहले भी कई बार कोशिशें हुईं, लेकिन ये नापाक इरादे न पहले कभी कामयाब हुए न इन्हें आगे कामयाब होने दिया जाएगा।
बुधवार को श्री रामलीला सभा की ओर से निकली रामबरात साहू गोपीनाथ डिग्री कॉलेज के पास मुर्गे वाली गली के क रीब पहुंची तो पूर्व पार्षद मोहम्मद असलम के नेतृत्व में स्थानीय हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने सौहार्द और भाईचारे का संदेश देते हुए राजगद्दी का पुष्पवर्षा से स्वागत करने लगे। इसी दौरान राजगद्दी के पीछे करीब सौ मीटर की दूरी पर बरात पर पत्थर बरसने शुरू हो गए। असलम ने बताया कि पत्थरबाजों ने नापाक इरादे से राजगद्दी पर भी पत्थर बरसाए। उस दौरान वह रथ पर चढ़कर देव स्वरूपों का तिलक कर रहे थे। उन्हें भी तीन पत्थर लगे। इसके अलावा टीम में शामिल अतीक, राशिद, रफीक, यासीन, अमन, अंजुम आदि समेत राजगद्दी पर आगे की ओर सवार लोगों को भी पत्थर लगेे। माहौल को भांपकर उन्होंने टीम समेेत रथ को सुरक्षित आगे रवाना कर हुडदंगियों को शांत कराने में जुट गए। इस दौरान मौजूद पैरामिलिट्री और पुलिस फोर्स माहौल को संभालने में जुट गई।
20 वर्ष पहले शुरू हुई परंपरा
मोहम्मद असलम ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले राम बरात निकली थी। उस दौरान भी दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। जिसमें कई पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए थे। उसके बाद संयुक्त रूप से राम बरात के स्वागत का निर्णय लिया गया। अगले वर्ष जब बरात निकली तो उसका भव्य स्वागत कर सौहार्द का संदेश दिया गया। तब से यह परंपरा शुरू हुई जो गंगा जमुनी तहजीब को बरकरार रखने का प्रयास करती रहेगी। वहीं, अमन कमेटी के पदाधिकारियों ने बानखाना, कोतवाली और कालीबाड़ी पर पुष्पवर्षा कर बरात का स्वागत किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुधवार को श्री रामलीला सभा की ओर से निकली रामबरात साहू गोपीनाथ डिग्री कॉलेज के पास मुर्गे वाली गली के क रीब पहुंची तो पूर्व पार्षद मोहम्मद असलम के नेतृत्व में स्थानीय हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने सौहार्द और भाईचारे का संदेश देते हुए राजगद्दी का पुष्पवर्षा से स्वागत करने लगे। इसी दौरान राजगद्दी के पीछे करीब सौ मीटर की दूरी पर बरात पर पत्थर बरसने शुरू हो गए। असलम ने बताया कि पत्थरबाजों ने नापाक इरादे से राजगद्दी पर भी पत्थर बरसाए। उस दौरान वह रथ पर चढ़कर देव स्वरूपों का तिलक कर रहे थे। उन्हें भी तीन पत्थर लगे। इसके अलावा टीम में शामिल अतीक, राशिद, रफीक, यासीन, अमन, अंजुम आदि समेत राजगद्दी पर आगे की ओर सवार लोगों को भी पत्थर लगेे। माहौल को भांपकर उन्होंने टीम समेेत रथ को सुरक्षित आगे रवाना कर हुडदंगियों को शांत कराने में जुट गए। इस दौरान मौजूद पैरामिलिट्री और पुलिस फोर्स माहौल को संभालने में जुट गई।
विज्ञापन
20 वर्ष पहले शुरू हुई परंपरा
मोहम्मद असलम ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले राम बरात निकली थी। उस दौरान भी दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। जिसमें कई पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए थे। उसके बाद संयुक्त रूप से राम बरात के स्वागत का निर्णय लिया गया। अगले वर्ष जब बरात निकली तो उसका भव्य स्वागत कर सौहार्द का संदेश दिया गया। तब से यह परंपरा शुरू हुई जो गंगा जमुनी तहजीब को बरकरार रखने का प्रयास करती रहेगी। वहीं, अमन कमेटी के पदाधिकारियों ने बानखाना, कोतवाली और कालीबाड़ी पर पुष्पवर्षा कर बरात का स्वागत किया।
विज्ञापन