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आयुर्वेदिक कालेज को इलाज की जरुरत
Updated Thu, 22 Mar 2018 07:35 PM IST
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आयुर्वेदिक कॉलेज को इलाज की जरूरत
जर्जर हो रही है 73 साल पुरानी बिल्डिंग
लिंटर से सरिया हो रही हैं अलग, 32 स्टूडेंट्स पर भंडरा रहा खतरा
बरेली। आयुर्वेदिक कॉलेज को अब इलाज की जरुरत है। 1945 में बनी बिल्डिंग अब जर्जर हालत में पहुंच गई है। आरबीसी लिंटर से ईंटों ने सरिया छोड़ दी है। सबसे बड़ी दिक्कत कॉलेज के पीछे आरा मशीनों से है, जिनके चलने से बिल्डिंग में कंपन होता है। पीडब्लूडी की रिपोर्ट में भवन तीन साल पहले ही गिरताऊ हो चुका है।
डेढ़ एकड़ में फैले आयुर्वेदिक कॉलेज का निर्माण 1942 में शुरू हुआ था। अब बिल्डिंग अपनी आयु पूरी कर चुकी है। कॉलेज में 32 मेडिकल स्टूडेंट्स हैं। नई बिल्डिंग का प्रस्ताव शासन में लंबित है। कई बार शासन से निरीक्षण हो चुका है। दीवारों में दरारें हैं। ईंटें सरिया से अलग हो चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि 15 नवंबर, 2017 को पीडब्लूडी की टेक्निकल रिपोर्ट में बिल्डिंग तीन साल पहले ही जर्जर हो चुकी है। अब नए सिरे से ही निर्माण होगा। कॉलेज के पीछे लगीं आरा मशीनें भी बिल्डिंग को कमजोर कर रहीं हैं। आरा मशीनों के चलने से कक्षों में कंपन होता है। सूत्रों ने बताया कि नए भवन का बजट मिले, इसके बाद ही डीएम से जमीन की डिमांड की जाएगी। अभी प्रस्ताव पर ही कोई निर्णय नहीं हआ है।
नई बिल्डिंग का प्रस्ताव शासन में लंबित है। हर समय खतरा सताता रहता है। कॉलेज की जमीन दान में मिली हुई है। - डॉ. प्रीति शर्मा, प्राचार्य
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आयुर्वेदिक कॉलेज को इलाज की जरूरत
जर्जर हो रही है 73 साल पुरानी बिल्डिंग
लिंटर से सरिया हो रही हैं अलग, 32 स्टूडेंट्स पर भंडरा रहा खतरा
बरेली। आयुर्वेदिक कॉलेज को अब इलाज की जरुरत है। 1945 में बनी बिल्डिंग अब जर्जर हालत में पहुंच गई है। आरबीसी लिंटर से ईंटों ने सरिया छोड़ दी है। सबसे बड़ी दिक्कत कॉलेज के पीछे आरा मशीनों से है, जिनके चलने से बिल्डिंग में कंपन होता है। पीडब्लूडी की रिपोर्ट में भवन तीन साल पहले ही गिरताऊ हो चुका है।
डेढ़ एकड़ में फैले आयुर्वेदिक कॉलेज का निर्माण 1942 में शुरू हुआ था। अब बिल्डिंग अपनी आयु पूरी कर चुकी है। कॉलेज में 32 मेडिकल स्टूडेंट्स हैं। नई बिल्डिंग का प्रस्ताव शासन में लंबित है। कई बार शासन से निरीक्षण हो चुका है। दीवारों में दरारें हैं। ईंटें सरिया से अलग हो चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि 15 नवंबर, 2017 को पीडब्लूडी की टेक्निकल रिपोर्ट में बिल्डिंग तीन साल पहले ही जर्जर हो चुकी है। अब नए सिरे से ही निर्माण होगा। कॉलेज के पीछे लगीं आरा मशीनें भी बिल्डिंग को कमजोर कर रहीं हैं। आरा मशीनों के चलने से कक्षों में कंपन होता है। सूत्रों ने बताया कि नए भवन का बजट मिले, इसके बाद ही डीएम से जमीन की डिमांड की जाएगी। अभी प्रस्ताव पर ही कोई निर्णय नहीं हआ है।
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नई बिल्डिंग का प्रस्ताव शासन में लंबित है। हर समय खतरा सताता रहता है। कॉलेज की जमीन दान में मिली हुई है। - डॉ. प्रीति शर्मा, प्राचार्य