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एचआईवी को मात देकर करियर संवार रहे बच्चे

Sat, 05 Aug 2017 01:28 AM IST
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:28 AM IST
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एचआईवी को मात देकर करियर संवार रहे बच्चे
HIV
बरेली।
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एक ऐसी बीमारी जिसके बारे में बच्चों को पता भी नहीं है, लेकिन बचपन में उसके साथ जी रहे हैं, खेल रहे हैं और पढ़ रहे हैं। उम्र इतनी कम है कि बीमारी आसानी से इनको कमजोर कर सकती है, इसलिए लगातार दवाआें के सेवन से अपने आपको मजबूत करके भविष्य संवारने में लगे हैं। कुछ बच्चे शहर के अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं तो कुछ दूसरे राज्यों के स्कूलों में हैं।
जिला अस्पताल के एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में ऐसे बच्चाें का इलाज चल रहा है। ये बच्चे कभी कभार ही सेंटर आते हैं लेकिन यहां से दवाएं इनको दी जाती हैं। कुछ बच्चों के माता पिता दवाएं लेने आते हैं तो कुछ के दादा- दादी। दो बच्चे ऐसे हैं जिनके माता पिता की मौत हो चुकी है। बच्चे को भविष्य बनाने के लिए दूसरे राज्य भेजा गया है जहां के बड़े स्कूल में ये शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ये पढ़ने में अच्छे हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। मौजूदा समय में एचआईवी और एड्स मरीजों की संख्या 2016 हो गई है। इनमें 92 बच्चे एचआईवी से पीड़ित हैं। 10 साल तक की उम्र के बच्चे 72 हैं, बाकी की उम्र 14 साल है। बरेली के 39 बच्चे इसमें शामिल हैं।
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बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता है ठीक
एआरटी सेंटर के चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव बताते हैं कि जितने भी बच्चे उनके यहां पंजीकृत हैं वे सभी पढ़ रहे हैं। जो गरीब बच्चे हैं उनके खाने पीने में दिक्कत है लेकिन अच्छे घरों के बच्चाें के स्वास्थ्य में कोई कमी नहीं है। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है।
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एक बच्ची को ब्लड ट्रांसफ्यूजन से मिली बीमारी
एआरटी सेंटर के डाटा मैनेजर मनोज कुमार बताते हैं कि सभी बच्चों को बीमारी उनके माता पिता से मिली है। जबकि एक बच्ची को ब्लड ट्रांसफ्यूजन से एचआईवी हुआ है। दूसरे जिले की इस बच्ची के माता और पिता दोनों निगेटिव हैं लेकिन बच्ची एचआईवी पॉजीटिव है। दस साल की बच्ची अभी स्कूल जा रही है और पूरी तरह स्वस्थ है।


बच्चे कभी- कभी सेंटर पर आते हैं लेकिन इनकी दवाएं यहां से चल रही है। एचआईवी के साथ सामान्य जीवन के लिए नियमित दवाएं लेने की जरूरत है। साथ ही अपनी दिनचर्या को भी व्यवस्थित करें तो दिक्कत कम होती है।
डॉ. संजीव, एमओ, एआरटी सेंटर
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