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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   12-year- old dream of the broken Sumangala

फिर टूटा सुमंगला का 12 साल पुराना सपना

Mon, 08 Aug 2016 01:27 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Mon, 08 Aug 2016 01:27 AM IST
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उत्तर प्रदेश की पहली ओलंपियन तीरंदाज सुमंगला को 2004 के एथेंस ओलपिंक में अपने देश के लिए मेडल न जीत पाने की कसक आज भी है। वह 12 साल पहले यूपी से देश के लिए ओलंपिक खेलने एथेंस गई थीं। यहां प्री क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को हराया भी लेकिन क्वार्टर फाइनल में भारतीय टीम पदक की दौड़ से बाहर हो गई थी। एक बार फिर टीम के मेडल का सपना टूट गया। टीम फिर क्वार्टर फाइनल में रसिया से हार गई। सुमंगला को भारतीय तीरंदाजी टीममें लक्ष्मी रानी माझी, दीपिका कुमारी, वोमेला देवी से बहुत उम्मीद थी।   टकटकी लगाए टीवी पर मैच देख भी रही थीं लेकिन निराशा हाथ लगी। अब मिश्रित टीम में दीपिका कुमारी और अटानुदास पर उम्मीद है।
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बरेली के फतेहगंज पूर्वी के गांव नेवड़िया में रहने वाले किसान सोमवीर सिंह की पांच संतानों में सबसे बड़ी सुमंगला ने 2001 में अमरोहा के चोटीपुरा गुरुकुल में कोच लक्ष्मी प्रिया देवी की देखरेख में तीरंदाजी सीखना शुरू किया था। ऑरचरी एकेडमी मेरठ में कड़ी मेहनत के बाद यूपी की महिला तीरंदाज के तौर पर सुमंगला को देश की ओर से एथेंस ओलंपिक में खेलना का मौका मिला। इसमें भारत की टीम क्वार्टर फाइनल में पदक की दौड़ से बाहर हो गई थी। आठ साल पहले तीरंदाजी का अभ्यास छोड़ चुकी ये खिलाड़ी जून 2014 में शादी होने के बाद से चंडीगढ़ में रहती है। सुमंगला की टीम ने 2006 में असम में यूपी की ओर से नेशनल टीम में गोल्ड मेडल जीता। मगर, उसे मलाल है कि तत्कालीन यूपी सरकार ने नेशनल टीम में यूपी के मेडल जीतने के बावजूद किसी भी खिलाड़ी को न तो कोई पुरस्कार दिया और न ही आर्थिक मदद की। ओलंपिक के लिए यूपी से खेल प्रतिभाएं न निकलने के सवाल पर सुमंगला का कहना है कि एक तो खिलाड़ियों में जागरूकता की कमी है और दूसरे सरकार ने उनको प्रोत्साहित नहीं किया जबकि हरियाणा और पंजाब सरकार अपने स्टेट में खेल प्रतिभाओं को अच्छा प्रदर्शन करने पर बड़ी आर्थिक मदद देती है। यही वजह है कि यूपी से खेल प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही हैं। सुमंगला के अनुसार अब यूपी सरकार ने सोनभद्र में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है। यहां केडी सिंह बाबू स्टेडियम की ओर से तीरंदाजी का प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों के लिए पांच धनुष दिए गए हैं। इससे नए खिलाड़ियों को निश्चित तौर पर आगे आने का मौका मिलेगा।   
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