फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   एमडी साहब! गलतियां सुधार ली हैं...अब भेज दीजिए टीम

एमडी साहब! गलतियां सुधार ली हैं...अब भेज दीजिए टीम

Mon, 17 Dec 2018 01:55 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Mon, 17 Dec 2018 01:55 AM IST
विज्ञापन
एमडी साहब! गलतियां सुधार ली हैं...अब भेज दीजिए टीम
बरेली। आईवीआरआई और लालफाटक क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बड़े हादसे के हालात पैदा कर देने के मामले में फंसे सेतु निगम के इंजीनियर लखनऊ मुख्यालय से सेफ्टी ऑडिट के लिए टीम आने से पहले रविवार को पूरे दिन अपनी गलतियां सुधारने में जुटे रहे। एमडी उत्तम कुमार गहलौत के निर्देश पर यह टेक्निकल टीम सोमवार को यहां पहुंचकर दोनों पुलों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। हालांकि अफसरों के पूरे दिन जुटे रहने के बावजूद दोनों ही पुलों पर सुरक्षा संबंधी तमाम खामियां अभी भी रह गई हैं। टेक्निकल टीम की नजर इन खामियों पर पड़ी तो कई अफसरों की गर्दन फंसनी तय हैं।
विज्ञापन


एमडी की फटकार के बाद गुटके हटाए, बैरीकेडिंग लगाई
बरेली। आईवीआरआई ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान यहां सैकड़ों टन वजनी बीम के नीचे लकड़ी के तीन गुटके लगाकर बनारस जैसे हादसे के हालात पैदा कर देने जैसे गंभीर मामले का सीधे प्रबंध निदेशक के संज्ञान लेने और जांच कराने को टेक्निकल टीम भेजने के निर्णय से रविवार को सेतु निगम के इंजीनियरों के पसीने छूटते रहे। सोमवार को लखनऊ से सेफ्टी ऑडिट टीम आने से पहले ही रविवार को छुट्टी वाले दिन सब कुछ ‘ओके’ करने की जद्दोजहद चलती रही। भारीभरकम बीम को सपोर्ट देने के लिए जो लकड़ी के तीन गुटके लगाकर लोगों की जान के खतरे में डाल दिया गया था, उन गुटकों को आनन-फानन में हटा दिया गया। सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए सेफ्टी नेट लगाने के साथ मजदूरों को हेलमेट देने और यहां बैरीकेडिंग लगाने का काम भी पूरा कर लिया गया।
विज्ञापन

भारीभरकम बीम के नीचे लकड़ी के तीन अलग-अलग गुटके लगाने को विशेषज्ञों ने इसलिए गलत करार दिया था क्योंकि पास ही ट्रेनों के गुजरने की धमक से ये गुटके ढीले होकर बीम के नीचे से निकल सकते थे और इससे बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि इसके बावजूद सेतु निगम के अफसर अपनी चूक स्वीकार करने के बजाय उसे सही करार देने में जुटे हुए थे। यह मामला जब सेतु निगम के एमडी उत्तम कुमार गहलौत तक पहुंचा तो उन्होंने इसे सर्वथा गलत बताते हुए और इससे हादसे की प्रबल संभावना मानते हुए सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक और मुख्य परियोजना प्रबंधक का स्पष्टीकरण मांग लिया, साथ ही मुख्यालय पर एक टीम गठित कर मौके पर जाकर जांच का आदेश भी जारी कर दिया। इसके बाद इंजीनियरों ने रविवार को ही बीम के नीचे से गुटकों को तो हटा ही दिया, साथ ही निर्माण के दौरान कोई चीज उछलकर राहगीरों पर न गिर जाए, इसके लिए सेफ्टी नेट भी लगा दिया गया। पुल के पास से लोगों को गुजरने से रोकने के लिए बैरीकेडिंग भी कर दी गई। यही नहीं, काम कर रहे मजदूर भी पहली बार हेलमेट पहने नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन


मजदूर खुश : पुल बनने के बाद मिले चमचमाते जूते और हेलमेट
आईवीआरआई पुल का निर्माण करीब 90 फीसदी हो चुका है। अब तक मजदूरों को यहां सेफ्टी ड्रेस नहीं दी गई थी लेकिन अब जांच टीम के डर से उन्हें नए जूते और हेलमेट दे दिए गए हैं। रविवार को यहां मजदूर नए जूते और हेलमेट पहने दिखाई दिए। उनके चेहरे पर इसकी खुशी भी दिखाई दी।

लाल फाटक ओवरब्रिजः ऑडिट की खामियां टीम के आने से पहले हुईं दूर
बरेली। लखनऊ से सेफ्टी ऑडिट टीम सोमवार को निर्माणाधीन लालफाटक ओवरब्रिज को भी देखगी। इसके लिए सेतु निगम के अधिकारियों ने यहां भी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने की कोशिश की है। इस पुल का आधा काम पूरा हो जाने के बाद अब जाकर इंजीनियरों को सेफ्टी नेट, मजदूरों के लिए हेलमेट और सुरक्षा गार्ड जैसे सुरक्षा मानक याद आए हैं। फिर भी यहां सुरक्षा मानकों को लेकर अभी काफी कमियां हैं। अगर ठीक से चेकिंग हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना तय है।
लालफाटक रोड पर भी सेतु निगम के इंजीनियरों की तमाम लापरवाही उजागर हो चुकी है। सर्विस लेन न बनाने से यहां हुए हादसों में नौ लोगों की मौत हो चुकी हैं। इसके अलावा यहां मजदूरों को हेलमेट, जूते न देने और नवनिर्मित नाले पर स्लैब न पड़ने से भी खतरा पैदा हो रहा है। अब सुरक्षा मानकों की जांच होने के डर से यहां भी ब्रिज कारपोरेशन के अधिकारियों ने सारे इंतजामों को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं। निर्माण कार्य के पास पब्लिक न आए, इसके लिए रविवार को यहां कई अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड लगा दिए गए हैं। सेफ्टी नेट भी लगा दिया गया और मजदूरों को हेलमेट दे दिए गए हैं। सर्विस लेन अभी अधूरी है लेकिन उसके किनारे बने नए नाले पर प्लास्टर से पोत दिया गया है। हालांकि स्लैब न पड़ी होने से उसमें लोग गिर रहे हैं।


मगर कमियां बरकरार
- चौड़ा नाला खुला छोड़ा, गिर रहे हैं लोग
-मजदूर पर सुरक्षा सेफ्टी बेल्ट नहीं
-काफी मजदूर बिना हेलमेट के, जो हैं वह बेहद घटिया
-खंभे-ट्रांसफर अब तक नहीं हटाए गए
-बिना जाल डाले बनाया नाले पर अब प्लास्टर पोता
-सर्विस लेन 24 घंटे में उधड़ी तो लीपापोती कर दी

‘हमें कुछ नहीं कहना, जो पूछना है लखनऊ में पीआरओ से पूछो’
इन दोनों ही प्रोजेक्ट के उप परियोजना प्रबंधक नवाब सिंह से जब आईवीआरआई ब्रिज के बीम को गुटकों के सहारे रोकने और सुरक्षा मानकों की कमी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब देने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें कुछ नहीं कहना है। गुटके लगाना और हटाना हमारा काम है। जो कुछ भी पूछना है, लखनऊ में पीआरओ से पूछो।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed