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आमना का लाल आया, मदीने का चांद आया..
Updated Thu, 22 Nov 2018 01:47 AM IST
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बरेली। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश पर शहर में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। दोपहर बाद निकला यह जुलूस देर रात तक शहर में रौनक बिखेरता रहा। आमना का लाल आया, मदीने का चांद आया... इस नाते पाक की गूंज पर अकीदत से भरे आशिके रसूल झूमते चले। जुलूस के बीच सरकार की आमद मरहबा.. के बुलंद होते नारे लोगों में जोश भर रहे थे।
यह जुलूस अंजुमन खुद्दामें रसूल की ओर से निकाला गया, जिसे कोहाड़ापीर से दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने सैयद शबाब हुसैन को जुलूसे परचम सौंपकर रवाना किया। जो सुब्हानी मियां की ही कयादत में आगे बढ़ता हुआ अपने निर्धारित रास्तों से दरगाह आला हजरत पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में शामिल सवा सौ से भी ज्यादा अंजुमन के सदस्य विभिन्न खूबसूरत और रंगबिरंगी पोशाकों में शामिल थे। कोई अरबी तो कोई पठानी तो कोई मुगली पोशाक में नजर आया। युवाओं के सिर पर कलगी टोपी और सजी पगड़ियां पोशाक को सुशोभित कर रही थीं। इनके बीच खाने काबा, गुंबदे खिजरा से लेकर नबूवी मस्जिद, ख्वाजा गरीब नवाज, आला हजरत, गारे हिरा और तमाम तरह की इस्लामी झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
जुलूस रवाना होने से पहले तिलावते कुरान के बाद उलमा की तकरीरें भी हुईं। इसके बाद सबसे पहले कायदे जुलूस अल्हाज सुब्हानी मियां की दस्तारबंदी कर कासिम कश्मीरी, आरिफ उल्ला और शान रजा ने इस्तकबाल किया। फिर आयोजक अंजुमन के पदाधिकारियों और जुलूस में शामिल अंजुमन के पदाधिकारियों की भी दस्तार की गई।
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जुलूस की व्यवस्था कासिम कश्मीरी, आरिफ उल्ला, शान रजा, आबिद खां, हाजी जावेद खान, नासिर कुरैशी, सैयद मुदस्सर अली, गफूर पहलवान, शहजाद पहलवान, फारूख खान, हाजी अब्बास नूरी, मोहसिन रजा, तारिक सईद, यामीन राइन आदि ने संभाली।
जुलूस को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं कुछ लोग
बरेली। जुलूस-ए-मोहम्मदी से पहले मंच पर हुई तकरीर के दौरान मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि कुछ लोग हमेशा से जुलूस के मुखालिफ रहे हैं। ऐसे लोग जुलूस-ए-मोहम्मदी को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि शरीयत का जो हुक्म था वो दरगाह से जारी कर दिया गया। जिस नबी ने हमें पूरी जिंदगी हराम और हलाल का फर्क बताया आज उन्हीं पैगंबर की यौमे विलादत पर डीजे और म्यूजिक बजाकर गैर शरई काम किया जा रहा है। कोई भी आशिके रसूल फतवे और दरगाह के पैगाम को नजर अंदाज नहीं कर सकता।
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यह जुलूस अंजुमन खुद्दामें रसूल की ओर से निकाला गया, जिसे कोहाड़ापीर से दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने सैयद शबाब हुसैन को जुलूसे परचम सौंपकर रवाना किया। जो सुब्हानी मियां की ही कयादत में आगे बढ़ता हुआ अपने निर्धारित रास्तों से दरगाह आला हजरत पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में शामिल सवा सौ से भी ज्यादा अंजुमन के सदस्य विभिन्न खूबसूरत और रंगबिरंगी पोशाकों में शामिल थे। कोई अरबी तो कोई पठानी तो कोई मुगली पोशाक में नजर आया। युवाओं के सिर पर कलगी टोपी और सजी पगड़ियां पोशाक को सुशोभित कर रही थीं। इनके बीच खाने काबा, गुंबदे खिजरा से लेकर नबूवी मस्जिद, ख्वाजा गरीब नवाज, आला हजरत, गारे हिरा और तमाम तरह की इस्लामी झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
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जुलूस रवाना होने से पहले तिलावते कुरान के बाद उलमा की तकरीरें भी हुईं। इसके बाद सबसे पहले कायदे जुलूस अल्हाज सुब्हानी मियां की दस्तारबंदी कर कासिम कश्मीरी, आरिफ उल्ला और शान रजा ने इस्तकबाल किया। फिर आयोजक अंजुमन के पदाधिकारियों और जुलूस में शामिल अंजुमन के पदाधिकारियों की भी दस्तार की गई।
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जुलूस की व्यवस्था कासिम कश्मीरी, आरिफ उल्ला, शान रजा, आबिद खां, हाजी जावेद खान, नासिर कुरैशी, सैयद मुदस्सर अली, गफूर पहलवान, शहजाद पहलवान, फारूख खान, हाजी अब्बास नूरी, मोहसिन रजा, तारिक सईद, यामीन राइन आदि ने संभाली।
जुलूस को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं कुछ लोग
बरेली। जुलूस-ए-मोहम्मदी से पहले मंच पर हुई तकरीर के दौरान मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि कुछ लोग हमेशा से जुलूस के मुखालिफ रहे हैं। ऐसे लोग जुलूस-ए-मोहम्मदी को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि शरीयत का जो हुक्म था वो दरगाह से जारी कर दिया गया। जिस नबी ने हमें पूरी जिंदगी हराम और हलाल का फर्क बताया आज उन्हीं पैगंबर की यौमे विलादत पर डीजे और म्यूजिक बजाकर गैर शरई काम किया जा रहा है। कोई भी आशिके रसूल फतवे और दरगाह के पैगाम को नजर अंदाज नहीं कर सकता।