फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   बायोफीडबैक मशीन बताएगी क्यों आता है बच्चे को गुस्सा

बायोफीडबैक मशीन बताएगी क्यों आता है बच्चे को गुस्सा

Mon, 24 Sep 2018 02:13 AM IST
Updated Mon, 24 Sep 2018 02:13 AM IST
विज्ञापन
बायोफीडबैक मशीन बताएगी क्यों आता है बच्चे को गुस्सा
बरेली। इंटरनेट का चस्का बच्चों की क्रिएटविटी खत्म कर रहा है। बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना, क्लास में लगातार खराब प्रदर्शन, चिड़चिड़ापन और जल्दी गुस्सा आने जैसी समस्याओं से अभिभावक परेशान हैं। कई बार बच्चे अवसाद का शिकार हो जाते हैं, लेकिन कारण पता नहीं चल पाता। अब बायोफीडबैक मशीन से पता लगाया जा सकेगा कि आखिर बच्चे का व्यवहार क्यों बदल रहा है। जिला अस्पताल में बायोफीडबैक मशीन आ गई है। मनोचिकित्सा विभाग इसी सप्ताह से मशीन का उपयोग करना शुरू कर देगा।
विज्ञापन

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मोबाइल के ज्यादा उपयोग ने बच्चों के व्यवहार पर प्रतिकूल असर डाला है। बच्चों को शांत कराने के लिए मां बाप भी बच्चों को मोबाइल पकड़ा देते हैं। बाद में ये उनकी आदत में शुमार हो जाता है। धीरे-धीरे बच्चा इंटरनेट की एक्टिविटी में इतना फंस जाता है कि उसकी क्रिएटविटी ही खत्म होने लगती है। थोड़े समय बाद यह बहुत घातक साबित हो सकता है। कई बार बच्चे अवसाद का शिकार हो जाते हैं। अभिभावक कई बार काउंसलर के पास भी जाते हैं, लेकिन समस्या की असली वजह सामने नहीं आ पाती। जिला अस्पताल में ही प्रतिमाह औसतन 15 बच्चे इस समस्या से ग्रस्त पहुंचते हैं। बच्चों के दिमाग में क्या और क्यों चल रहा है, इसे पढ़ने के लिए बायोफीडबैक मशीन मंगाई गई है।
विज्ञापन


दिमाग की तरंगों को रीड करेगी मशीन
बायोफीडबैक मशीन में तीन प्वाइंट हैं जो रोगी के सिर के विभिन्न हिस्सों में लगाए जाएंगे। इसके बाद डॉक्टर रोगी को कुछ टास्क देंगे, इसका बच्चे के दिमाग में क्या रिएक्शन होगा, इसे मशीन तरंगों के माध्यम से रीड करेगी। व्यवहार, दिनचर्या से जुड़े टॉस्क दिए जाएंगे। इसमें बोलकर सवाल नहीं पूछे जाएंगे। टास्क पूरे होने के बाद जब बच्चा रिलेक्स हो जाएगा, तब मशीन बताएगी कि उसकी समस्या की वजह क्या है। मनोरोगी, खासतौर से जो लोग बोल नहीं सकते उनका इलाज भी संभव होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


बायोफीडबैक मशीन आ गई है। इस मशीन से किसी के भी दिमाग को पढ़ा जा सकता है। कुछ टास्क दिए जाएंगे जिससे उसका व्यवहार मशीन में रीड होगा। अगर किसी बच्चे को गुस्सा आ रहा या कोई अवसाद ग्रस्त है तो उसके कारण पता कर सकेंगे। - डॉॅ. आशीष कुमार, मनोचिकित्सक जिला अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed