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आंखों के इलाज के लिए डॉक्टर से लड़ रहे मरीज
Updated Thu, 13 Jul 2017 01:46 AM IST
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- फोटो : getty images
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बरेली।
जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में लेजर मशीन छह माह से खराब पड़ी है। इस मशीन से मोतियाबिंद आपरेशन के बाद आंखाें में बनने वाले जाल की समस्या होने पर मरीजों का इलाज किया जाता है। गरीब मरीज अब कहां जाएं, इसलिए डॉक्टर से लड़ रहे हैं।
सप्ताह में दो दिन नेत्र सर्जन डॉ. एके गौतम इस मशीन का इस्तेमाल करते हैं। वह मंगलवार और शुक्रवार को मोतियाबिंद आपरेशन के बाद लगने वाली झिल्ली को हटाते हैं। लेजर मशीन के दिन ओपीडी में 20 से 40 मरीज इलाज करवाने आते हैं। मशीन को कंडम घोषित किया जा चुका है और नई मशीन के लिए बजट नहीं है। करीब 20 लाख रुपये की मशीन के लिए टेंडर होना जरूरी है। डॉ. एके गौतम ने बताया कि मशीन खराब होने से मरीज लड़ते हैं, कहते हैं कि आपरेशन करके आंख खराब कर दी। चीजें धुंधली दिखती हैं। डॉ. गौतम ने कहा कि आपरेशन के छह माह या फिर एक साल बाद इस मशीन से इलाज की जरूरत पड़ती है।
जो इलाज यहां फ्री में होता है उसके लिए दे रहे दो हजार रुपये
जिला अस्पताल की जिस लेजर मशीन से गरीबाें और अन्य मरीजाें का इलाज एक रुपये के पर्चे पर हो जाता है, जबकि निजी क्लीनिक में इसके लिए दो हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
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लखनऊ में ई टेंडर होने है, उसी में मशीन खरीदी जाएगी। दो बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। बताया जा रहा है कि जल्द ही मशीन आ जाएगी। -डॉ. आलोक चंद्रा, अंधता निवारण कार्यक्रम प्रभारी
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जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में लेजर मशीन छह माह से खराब पड़ी है। इस मशीन से मोतियाबिंद आपरेशन के बाद आंखाें में बनने वाले जाल की समस्या होने पर मरीजों का इलाज किया जाता है। गरीब मरीज अब कहां जाएं, इसलिए डॉक्टर से लड़ रहे हैं।
सप्ताह में दो दिन नेत्र सर्जन डॉ. एके गौतम इस मशीन का इस्तेमाल करते हैं। वह मंगलवार और शुक्रवार को मोतियाबिंद आपरेशन के बाद लगने वाली झिल्ली को हटाते हैं। लेजर मशीन के दिन ओपीडी में 20 से 40 मरीज इलाज करवाने आते हैं। मशीन को कंडम घोषित किया जा चुका है और नई मशीन के लिए बजट नहीं है। करीब 20 लाख रुपये की मशीन के लिए टेंडर होना जरूरी है। डॉ. एके गौतम ने बताया कि मशीन खराब होने से मरीज लड़ते हैं, कहते हैं कि आपरेशन करके आंख खराब कर दी। चीजें धुंधली दिखती हैं। डॉ. गौतम ने कहा कि आपरेशन के छह माह या फिर एक साल बाद इस मशीन से इलाज की जरूरत पड़ती है।
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जो इलाज यहां फ्री में होता है उसके लिए दे रहे दो हजार रुपये
जिला अस्पताल की जिस लेजर मशीन से गरीबाें और अन्य मरीजाें का इलाज एक रुपये के पर्चे पर हो जाता है, जबकि निजी क्लीनिक में इसके लिए दो हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
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लखनऊ में ई टेंडर होने है, उसी में मशीन खरीदी जाएगी। दो बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। बताया जा रहा है कि जल्द ही मशीन आ जाएगी। -डॉ. आलोक चंद्रा, अंधता निवारण कार्यक्रम प्रभारी