फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   रेलवे की कीमती जमीनों पर अवैध कब्जा

रेलवे की कीमती जमीनों पर अवैध कब्जा

Thu, 10 Jan 2019 12:34 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Thu, 10 Jan 2019 12:34 AM IST
विज्ञापन
रेलवे की कीमती जमीनों पर अवैध कब्जा
शाहजहांपुर। उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे की सैकड़ों एकड़ जमीन पर शहर में कब्जा हो गया है। अफसरों की अनदेखी से रेलवे की निष्प्रयोज्य पटरियों के ऊपर अवैध कॉलोनियां बस रही हैं। कई किलोमीटर रेल लाइनें जमीन में दबी हुई गल रहीं हैं। इनकी कीमत भी करोड़ों में है। रेलवे के जिम्मेदार अफसर सैकड़ों एकड़ जमीन पर हुए कब्जे को लेकर सब कुछ जानते हुए भी बेखबर बने हुए हैं।
विज्ञापन

वर्ष 1980 तक शहर में चार रेलवे स्टेशन हुआ करते थे। मौजूदा दो स्टेशनों के अलावा केरूगंज और भोलागंज स्टेशन के साथ पुराना मालगोदाम भी था। करीब 15 किमी की ब्राडगेज रेल लाइन कैंट होती हुई प्रसाद भवन के पीछे से बंका घाट, बिसरात, काली मंदिर होकर भोलागंज, केरूगंज के रास्ते पुराने मालगोदाम को जोड़ती थीं। इतनी ही मीटर गेज लाइन रोडवेज, टाउनहाल होती हुई केरूगंज तक जाती थी। ब्रॉडगेज, मीटर गेज रेल लाइन के साथ करीब 12 किमी की एक लूप लाइन भी थी जो इस्लामियां इंटर कॉलेज, लकड़ी मंडी होती हुई निकलती थीं। यह तीनों रेल लाइन 80 का दशक शुरू होने के साथ धीरे-धीरे बंद कर दी गईं। इसके साथ ही रेलवे की जमीन पर कब्जों का सिलसिला शुरू हुआ। चार दशक बीतते-बीतते रेलवे की ज्यादातर जमीन पर पक्के मकान, कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। आयुध वस्त्र निर्माणी तक जाने वाली रेल लाइन के दोनों ओर रेलवे की जमीन पर कब्जे हो गए। भोलागंज और केरूगंज स्टेशन के जर्जर भवन भी लोगों के कब्जे में हैं। रेल पटरियों व इससे संबंधित लोहे को नशेड़ी उखाड़-उखाड़ कर आज तक बेच रहे हैं। रेलवे न तो अपनी जमीन का सर्वेक्षण करा रहा है और न ही इसकी देख-रेख कर रहा है। शहर के तमाम इलाकों में छोटे-बड़े रेलवे पुल, हाल्ट, रेल क्रॉसिंग, रेलवे के भवन और रेल पटरियों के अवशेष देखे जा सकते हैं।
विज्ञापन


इन इलाकों में रेलवे की जमीन पर कब्जा
रेल अधिकारियों की लापरवाही से बंकाघाट, बहादुरपुरा, हयातपुरा, भोलागंज, कृष्णानगर, बिजलीपुरा, बहादुरगंज, ककरा कलां, इंदिरानगर, रोशनगंज, दीवान जोगराज, सुभाषनगर, जलालनगर, मामूड़ी, हयातपुरा, लकड़ी मंडी, राजघाट चौकी, बालाजी तिराहा, महमंदशाह, जियाखेल, किला, केरूगंज आदि मोहल्लों में रेलवे की अरबों की जमीन पर कब्जे हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अफसर नहीं कर रहे नियमों का पालन
इंडियन रेलवे वर्कर्स मैन्युअल की धारा 807 से 814 में यह हवाला दिया गया है कि रेलवे की जमीन का हर तीन माह में वेरिफिकेशन होना चाहिए। इसकी रिपोर्ट रेलवे के जोनल हेडक्वार्टर को भिजवाई जानी चाहिए। इस धारा का पालन ही नहीं किया जा रहा। नतीजतन साल दर

साल रेलवे की जमीन पर कब्जे हो रहे हैं।
रेलवे की जमीन पर कब्जे का मामला संज्ञान में है। सर्वे कराकर रेलवे की जमीन तलाश की जा रही है। कुछ कब्जेदार चिह्नित किए गए हैं। आने वाले समय में यह जमीन सरकार के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट, सरकारी कॉलोनियां, कॉलेज, अस्पताल आदि में काम आ सकती है। रेलवे और


राज्य सरकार संपर्क में हैं। जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए रेलवे लगातार स्थानीय प्रशासन से बात कर रहा है। सख्ती के साथ जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाएगा।
रॉकी तुहर, सहायक मंडलीय अभियंता-मुरादाबाद रेल मंडल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed