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5 करोड़ ठिकाने लगाने हैं मगर साहब को है सारी खबर
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बरेली। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के जवाब-तलब करने के बाद पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने सड़क सुरक्षा के कामों के लिए आई पांच करोड़ रुपये की उस धनराशि से काम कराने चालू कर दिए हैं जिसे वे तीन महीने से दबाए बैठे थे। हालांकि सूत्रों के मुताबिक ज्यादा जोर इस बात पर है कि मोटे-मोटे काम कराकर इस रकम को किसी तरह खपा दिया है जबकि दूसरी ओर कमिश्नर इन कामों पर पहले ही निगरानी रखने का संकेत दे चुके हैं।
सड़क सुरक्षा कार्यों के लिए पीडब्ल्यूडी को फरवरी में शासन से पांच करोड़ रुपये की धनराशि मिली थी। इस धनराशि से मंडल के चारों जिलों में सड़कों पर रेडियम सिग्नल, सड़कों पर सफेद पट्टी, ब्रेकर, साइनेज, कैटआई जैसे रोड सेफ्टी के काम कराए जाने थे। महत्वपूर्ण यह है कि बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए शासन ने पहली बार यह बजट सीधे लोक निर्माण विभाग को दिया जबकि पहले यह पैसा संभागीय परिवहन विभाग को दिया जाता था। फिर भी पीडब्ल्यूडी के अफसर धनराशि आने के बाद टेंडर करने के बजाय रकम को दबाकर बैठे रहे। करीब एक हफ्ता पहले पीलीभीत रोड पर एक बदरंग डिवाइडर से रात के अंधेरे में कार के टकरा जाने की वजह से नवाबगंज के एक युवा व्यापारी की मौत हो गई थी, जिसके बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने इसका संज्ञान लेते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से जवाब मांग लिया था कि सड़क सुरक्षा के काम क्यों नहीं कराए गए हैं।
कमिश्नर की जवाबतलबी से हड़बड़ाए पीडब्ल्यूडी अफसरों ने उस समय तो चुनावी व्यस्तता को काम न करा पाने की वजह बताकर गर्दन बचा ली थी, लेकिन अब रकम खपाना शुरू कर दिया है। मुख्य अभियंता ने बताया कि अब तक केवल पीलीभीत जिले में ही रोड सुरक्षा के ही काम हुए थे। अब दूसरी जगह भी काम कराए जा रहे हैं। रविवार को छुट्टी के दिन भी पीडब्ल्यूडी स्टाफ ने सेटेलाइट चौराहे से रजऊ परसपुर के बीच व्हाइट पट्टी बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा बरेली-बीसलपुर रोड पर भी ठेकेदार ने सफेद पट्टी और रोड सिग्नल लगाने शुरू कर दिए हैं।बता दें कि किला-चौपुला, सीबीगंज रोड, नकटिया रोड, नैनीताल सड़क, मिनी बाईपास सहित पीडब्ल्यूडी की तमाम सड़कों पर डिवाइडर टूटे हुए हैं। चौराहों की रोटरी से रेडियम पोल गायब हैं। कई साल से डिवाइडर पर न पेंट हुआ है न सफेद पट्टी को दुरुस्त किया गया है।
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सड़क सुरक्षा के काम तेजी से पूरे कराए जा रहे हैं। सेटेलाइट से रजऊ परसपुर तक रोड सेफ्टी के काम न होने पर मैंने एक एई को बुलाकर फटकारा भी था। इस काम की मॉनीटरिंग की जा रही है। - राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
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सड़क सुरक्षा कार्यों के लिए पीडब्ल्यूडी को फरवरी में शासन से पांच करोड़ रुपये की धनराशि मिली थी। इस धनराशि से मंडल के चारों जिलों में सड़कों पर रेडियम सिग्नल, सड़कों पर सफेद पट्टी, ब्रेकर, साइनेज, कैटआई जैसे रोड सेफ्टी के काम कराए जाने थे। महत्वपूर्ण यह है कि बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए शासन ने पहली बार यह बजट सीधे लोक निर्माण विभाग को दिया जबकि पहले यह पैसा संभागीय परिवहन विभाग को दिया जाता था। फिर भी पीडब्ल्यूडी के अफसर धनराशि आने के बाद टेंडर करने के बजाय रकम को दबाकर बैठे रहे। करीब एक हफ्ता पहले पीलीभीत रोड पर एक बदरंग डिवाइडर से रात के अंधेरे में कार के टकरा जाने की वजह से नवाबगंज के एक युवा व्यापारी की मौत हो गई थी, जिसके बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने इसका संज्ञान लेते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से जवाब मांग लिया था कि सड़क सुरक्षा के काम क्यों नहीं कराए गए हैं।
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कमिश्नर की जवाबतलबी से हड़बड़ाए पीडब्ल्यूडी अफसरों ने उस समय तो चुनावी व्यस्तता को काम न करा पाने की वजह बताकर गर्दन बचा ली थी, लेकिन अब रकम खपाना शुरू कर दिया है। मुख्य अभियंता ने बताया कि अब तक केवल पीलीभीत जिले में ही रोड सुरक्षा के ही काम हुए थे। अब दूसरी जगह भी काम कराए जा रहे हैं। रविवार को छुट्टी के दिन भी पीडब्ल्यूडी स्टाफ ने सेटेलाइट चौराहे से रजऊ परसपुर के बीच व्हाइट पट्टी बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा बरेली-बीसलपुर रोड पर भी ठेकेदार ने सफेद पट्टी और रोड सिग्नल लगाने शुरू कर दिए हैं।बता दें कि किला-चौपुला, सीबीगंज रोड, नकटिया रोड, नैनीताल सड़क, मिनी बाईपास सहित पीडब्ल्यूडी की तमाम सड़कों पर डिवाइडर टूटे हुए हैं। चौराहों की रोटरी से रेडियम पोल गायब हैं। कई साल से डिवाइडर पर न पेंट हुआ है न सफेद पट्टी को दुरुस्त किया गया है।
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सड़क सुरक्षा के काम तेजी से पूरे कराए जा रहे हैं। सेटेलाइट से रजऊ परसपुर तक रोड सेफ्टी के काम न होने पर मैंने एक एई को बुलाकर फटकारा भी था। इस काम की मॉनीटरिंग की जा रही है। - राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी