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मोबाइल निजी संपत्ति.. व्हाट्सएप चलाएं या करें कॉल, पर हाजिरी नहीं लगाएंगे

Sun, 03 Mar 2019 12:54 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sun, 03 Mar 2019 12:54 AM IST
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मोबाइल निजी संपत्ति.. व्हाट्सएप चलाएं या करें कॉल, पर हाजिरी नहीं लगाएंगे
बरेली। शासन ने मोबाइल एप पर बच्चों एवं शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन लगाने के निर्देश दिए थे। बृहस्पतिवार को इसे लागू करने की अंतिम तिथि थी, लेकिन शिक्षकों के रुचि न लेने के चलते यह व्यवस्था फ्लॉप रही। जिले के सैकड़ों स्कूलों में अब तक बच्चों का डाटा ही फीड नहीं हुआ है, जिसके चलते ऑनलाइन उपस्थिति नहीं लग पा रही है। वहीं, कुछ शिक्षकों का तर्क है कि मोबाइल उनकी निजी संपत्ति है, वे उससे सरकारी काम क्यों करें? अगर शासन को ऑनलाइन उपस्थिति लगवानी ही है तो मोबाइल या टेबलेट उपलब्ध कराएं।
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बेसिक शिक्षा विभाग में उपस्थिति की मनमानी पर लगाम कसने के लिए शासन ने मोबाइल एप ‘ईको अटेंडेंस’ पर शिक्षकों एवं बच्चों की उपस्थिति लगाने के निर्देश दिए। यह एप प्रधानाध्यापकों को अपने मोबाइल में इंस्टाल कर व्यवस्था को 28 फरवरी तक लागू करना था। मगर सैकड़ों स्कूलों में प्रधानाध्यापकों ने यह एप ही डाउनलोड नहीं किया है, उपस्थिति लगानी तो दूर की बात है। इसके पीछे तमाम तरह के बहाने बनाए जा रहे हैं क्योंकि एप जीपीएस से लिंक होने के चलते स्कूल में ही काम करेगा और मनमानी पर लगाम लग जाएगी। शिक्षक नेता हरीश बाबू शर्मा का कहना है कि इसको लागू करने में व्यवहारिक दिक्कतें आ रही हैं। इसी महीने में बच्चों की परीक्षाएं होनी हैं, वे लोग उस पर ध्यान दें या फिर मोबाइल एप को संभालें। वहीं, विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि मोबाइल निजी संपत्ति है, उस पर सरकारी काम क्यों करें। विभाग को इसके लिए लैपटॉप, मोबाइल या टेबलेट उपलब्ध कराना चाहिए।
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3.21 लाख छात्र, डाटा सिर्फ 13 हजार का
जिले के 2894 प्राथमिक एवं जूनियर हाईस्कूल में 3 लाख 21 हजार 827 छात्र हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 13 हजार छात्रों का डाटा फीड हुआ है। इसी तरह शिक्षकों की स्थिति भी बहुत खराब है। कुछ ब्लॉक में तो एक भी शिक्षक या बच्चे का डाटा फीड नहीं किया गया है।
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अन्य व्यवहारिक दिक्कतें
- एप में शिक्षकों के लिए उपस्थिति, अनुपस्थिति के अलावा मेडिकल, सीएल आदि की सुविधा नहीं है।
- देहात क्षेत्र में कुछ जगह मोबाइल नेटवर्क की भी दिक्कत है।
- जो प्रधानाध्यापक बार फोन चला रहे हैं, वे एप कैसे चलाएं।

एप को लगातार डाउनलोड कराकर शिक्षकों को इस पर काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। काफी शिक्षकों ने इसके अनुसार काम करना भी शुरू कर दिया है। - देवेश राय, खंड शिक्षा अधिकारी नगर
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