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रिक्शे पर बैठी प्रसूता ने अस्पताल गेट पर जनी बेटी
Updated Thu, 01 Mar 2018 09:28 PM IST
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रिक्शे पर बैठी प्रसूता ने अस्पताल गेट पर जनी बेटी
जिला महिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही हुई उजागर
महिला के पति ने सीएम से शिकायत की चेतावनी दी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में लापरवाही और बदइंतजामी की वजह से अक्सर ही मरीजों और प्रसूताओं की जान जोखिम में पड़ रही है। इसी का नतीजा रहा कि बृहस्पतिवार को रिक्शे पर बैठी प्रसूता ने निजी अस्पताल के गेट पर ही बेटी को जन्म दे दिया। बाद में महिला को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीएमओ ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
थाना उझानी क्षेत्र के गांव गुराई निवासी इब्बन अली की पत्नी साबिया खातून (32) प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार को जिला महिला अस्पताल पहुंची थी। वहां तैनात स्टाफ ने कहा कि डिलीवरी में अभी एक-दो माह का समय है। तब तक कुछ जांचें करा लो। इब्बन ने यह जांचें कराईं। जांच रिपोर्ट दिखाने जब वह गुरुवार को महिला अस्पताल पहुंचा। वहां ड्यूटी पर तैनात डॉ.रिजवाना ने कहा कि अभी सातवां महीना लग रहा है, अल्ट्रासाउंड और करा लो। तब उसने लावेला चौक के एक निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया। दंपति निजी अस्पताल से निकले और गेट पर ही साबिया को रिक्शे पर बैठा दिया। रिक्शे पर बैठते ही उसे तेज प्रसव पीड़ा हुई। तब इब्बन ने उसे रिक्शा से उतारकर अस्पताल की ओर बैठा दिया। इसी बीच निजी अस्पताल गेट पर साबिया ने बेटी को जन्म दे दिया। इस दौरान वहां पर कई लोग जमा हो गए, महिलाओं ने साबिया के इर्दगिर्द घेरा बना लिया। बेटी का जन्म होने के बाद दंपति उसी रिक्शा से अस्पताल पहुंचे। वहां पहुंचकर इब्बन अली ने कहा कि उसकी ससुराल गोरखपुर में है। वह सीएम से स्टाफ की शिकायत करेेंगे।
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मामला संज्ञान आया है। सवाल उठ रहा है कि जब गर्भ का समय लगभग पूरा हो गया था तो आखिर महिला को बार-बार क्यों टहलाया गया। उसकी सामान्य डिलीवरी अस्पताल में क्यों नहीं की गई। कौन आशाएं हैं जो महिलाओं को बाहर ले जाती हैं। डॉक्टर रिजवाना और स्टाफ की भूमिका की जांच कराई जाएगी। आशा को बर्खास्त किया जाएगा।
विज्ञापन
-डॉ.नेमी चंद्रा, सीएमओ
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रिक्शे पर बैठी प्रसूता ने अस्पताल गेट पर जनी बेटी
जिला महिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही हुई उजागर
महिला के पति ने सीएम से शिकायत की चेतावनी दी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में लापरवाही और बदइंतजामी की वजह से अक्सर ही मरीजों और प्रसूताओं की जान जोखिम में पड़ रही है। इसी का नतीजा रहा कि बृहस्पतिवार को रिक्शे पर बैठी प्रसूता ने निजी अस्पताल के गेट पर ही बेटी को जन्म दे दिया। बाद में महिला को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीएमओ ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
थाना उझानी क्षेत्र के गांव गुराई निवासी इब्बन अली की पत्नी साबिया खातून (32) प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार को जिला महिला अस्पताल पहुंची थी। वहां तैनात स्टाफ ने कहा कि डिलीवरी में अभी एक-दो माह का समय है। तब तक कुछ जांचें करा लो। इब्बन ने यह जांचें कराईं। जांच रिपोर्ट दिखाने जब वह गुरुवार को महिला अस्पताल पहुंचा। वहां ड्यूटी पर तैनात डॉ.रिजवाना ने कहा कि अभी सातवां महीना लग रहा है, अल्ट्रासाउंड और करा लो। तब उसने लावेला चौक के एक निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया। दंपति निजी अस्पताल से निकले और गेट पर ही साबिया को रिक्शे पर बैठा दिया। रिक्शे पर बैठते ही उसे तेज प्रसव पीड़ा हुई। तब इब्बन ने उसे रिक्शा से उतारकर अस्पताल की ओर बैठा दिया। इसी बीच निजी अस्पताल गेट पर साबिया ने बेटी को जन्म दे दिया। इस दौरान वहां पर कई लोग जमा हो गए, महिलाओं ने साबिया के इर्दगिर्द घेरा बना लिया। बेटी का जन्म होने के बाद दंपति उसी रिक्शा से अस्पताल पहुंचे। वहां पहुंचकर इब्बन अली ने कहा कि उसकी ससुराल गोरखपुर में है। वह सीएम से स्टाफ की शिकायत करेेंगे।
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मामला संज्ञान आया है। सवाल उठ रहा है कि जब गर्भ का समय लगभग पूरा हो गया था तो आखिर महिला को बार-बार क्यों टहलाया गया। उसकी सामान्य डिलीवरी अस्पताल में क्यों नहीं की गई। कौन आशाएं हैं जो महिलाओं को बाहर ले जाती हैं। डॉक्टर रिजवाना और स्टाफ की भूमिका की जांच कराई जाएगी। आशा को बर्खास्त किया जाएगा।
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-डॉ.नेमी चंद्रा, सीएमओ