फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   10 th class Iqra secures the fifth rank in Bareilly district in the High School

UP Board Result 2026: संघर्ष की भट्ठी में तपकर कुंदन बनीं इकरा, हाईस्कूल में बरेली में पाया पांचवां स्थान

Thu, 23 Apr 2026 10:44 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Thu, 23 Apr 2026 10:44 PM IST
सार

यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में बरेली जिले के मेधावियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इनमें कुछ मेधावी ऐसे भी हैं, जिन्होंने विपरीत हालात में पढ़ाई कर सफलता का परचम लहराया। जिले में पांचवीं स्थान पाने वाली हाईस्कूल की छात्रा इकरा की कहानी दूसरे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा देने वाली है। 

विज्ञापन
10 th class Iqra secures the fifth rank in Bareilly district in the High School
मां के साथ बैठी इकरा, पास में पिता और बहन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली की बेटी इकरा संघर्ष की भट्ठी में तपकर कुंदन बनीं और समाज के सामने मिसाल पेश की। कोहाड़ापीर की तंग गलियों में एक कमरे के छोटे से मकान में रहने वाली इकरा ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 95.50 प्रतिश अंक हासिल कर जिले की मेरिट सूची में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। 

विज्ञापन


इकरा के पिता इल्यास मोटर मैकेनिक का काम कर बमुश्किल 500 रुपये प्रतिदिन कमा पाते हैं। उनकी मां कौसर जरी का काम कर परिवार को सहारा देती हैं। छोटे से घर में इकरा ने किताबों को ही अपनी दुनिया बनाकर यह साबित कर दिया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।
विज्ञापन


विपरीत परिस्थितियों में सूर्य प्रताप ने इंटर में हासिल की 10वीं रैंक
रामपुर बाग स्थित शांति अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज छात्र सुभाषनगर निवासी सूर्य प्रताप सिन्हा ने इंटर में 89 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में 10वीं रैंक हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने दूसरे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च जुटाया और तैयारी की। छोटे भाई करन प्रताप का भी मार्गदर्शन किया, जिसने 10वीं में 84 प्रतिशत अंक हासिल किए।
विज्ञापन
विज्ञापन


सूर्य के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। 10वीं में उम्मीद के मुताबिक अंक न आने के कारण वे गहरे अवसाद में चले गए थे। इसका असर उनकी 11वीं की पढ़ाई पर भी पड़ा। इस कठिन समय में उनके चाचा अभिशेष और बहन प्राची उनके लिए ढाल बनकर खड़े हुए। पिता अधिषेक सिन्हा और माता दीपाली सिन्हा के अटूट विश्वास ने उन्हें फिर खड़ा होने का साहस दिया। सूर्य भविष्य में इंजीनियर बनना चाहते हैं।

Trending Videos

विशेष छात्रा वैष्णवी ने प्राप्त किए 76% अंक
बोर्ड परीक्षाओं में कई ऐसे भी छात्र रहे, जिन्हें विपरीत परिस्थितियों से जूझना पड़ा। हौसले को हथियार बनाकर मेधावियों ने कामयाबी का परचम लहराया। इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज की 12वीं की छात्रा वैष्णवी जन्म से ही सुनने में अक्षम हैं। पांच वर्षों से वह कानों में मशीन का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान ही अपने माता-पिता को खो दिया था। तब से वह मौसी के पास रह रही हैं।

मौसी ने बताया कि वैष्णवी वर्तमान में कंप्यूटर सीख रही है, ताकि भविष्य में नौकरी के पर्याप्त अवसर मिल सकें। वैष्णवी के पिता खादी ग्रामोद्योग विभाग में थे। जब वह नौकरी करने लायक हो जाएगी तो उसे मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिल सकती है।
 

सुहैल, मानस व दानिया ने भी लहराया परचम
12वीं में 59.6% अंक प्राप्त करने वाले राजकीय इंटर कॉलेज के छात्र मोहम्मद सुहैल एक पैर से दिव्यांग हैं, लेकिन उनका हौसला बुलंद है। वह पढ़ाई के साथ खेल में भी आगे रहते हैं। उन्हें बैडमिंटन टीम में शामिल किया गया है। सुहैल ने बताया कि वह फार्मासिस्ट बनना चाहते हैं। खेल में भी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।

राजकीय इंटर कॉलेज के दसवीं के छात्र मानस मौर्य अपने पिता व भाई के साथ वेल्डिंग व लेबर का भी काम करते हैं। साथ में पढ़ाई और खेल में भी हाथ आजमाते हैं। वह हैंडबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। मानस को इस बार 10वीं में 58% अंक मिले हैं। भविष्य में वह खेल प्रशिक्षक बनना चाहते हैं।

10वीं में 87% अंक प्राप्त करने वाली इस्लामिया इंटर कॉलेज की छात्रा दानिया खान के पिता मैकेनिक हैं। घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, जिसे समझते हुए दानिया ने दिन-रात मेहनत कर बिना कोचिंग के ये अंक प्राप्त किए हैं। वह बताती हैं कि जब मौका मिलता था, पढ़ाई करने बैठ जाती थी। वह भविष्य में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहती हैं।

शिखा ने अभावों के बीच भरी कामयाबी की उड़ान
साहू गोपीनाथ इंटर कॉलेज की इंटर की छात्रा कटरा चांद खां निवासी शिखा ने विज्ञान वर्ग में 70% अंक हासिल किया है। उनके पिता ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कुछ समय से उनकी मां का स्वास्थ्य काफी खराब चल रहा है। मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब एक गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के चलते उनकी मां को गलत खून चढ़ा दिया गया। इससे उनकी स्थिति और भी नाजुक हो गई। एक तरफ बोर्ड परीक्षा का दबाव और दूसरी तरफ मां की देखभाल की बड़ी जिम्मेदारी, लेकिन शिखा ने हार नहीं मानी और इतिहास रच दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed