{"_id":"640f8097bd0116ee5b0005ea","slug":"you-will-yearn-for-heaven-if-parents-cry-barabanki-news-c-13-1-126493-2023-03-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: तरस जाओगे जन्नत को अगर मां-बाप रोएंगे...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: तरस जाओगे जन्नत को अगर मां-बाप रोएंगे...
Tue, 14 Mar 2023 01:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 14 Mar 2023 01:29 AM IST
विज्ञापन
बेलहरा (बाराबंकी)। सूफी संत हजरत अजीद खारह उर्फ बाजिद बाबा के सालाना उर्स के मौके पर बखरिया टोला में आल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। रविवार देर शाम आयोजित कार्यक्रम में शायरों ने अपने कलाम व गीत सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुशायरे का आगाज शायर वसीम रामपुरी ने नात पाक पढ़कर किया। जमील अख्तर जैदपुरी ने पढ़ा, मंदिर में भजन और हैं मस्जिद में अजानें, दुनियां में देश की पहचान यही है। हस्सान साहिर फतेहपुरी ने पढ़ा, लब कुशाई की जरूरत भी है जुल्म जबर पर, तू भी मुजरिम समझा जाएगा अगर खामोश है।
वसीकुर्रहमान शफक ने पढ़ा, परिंदे ने एक दिन शिकारी से पूछा, मैं कैद हूं जबकि खता कुछ भी नहीं है। वसीम रामपुरी ने सुनाया, ये हश्र है यहां पर कोई एक नेकी नहीं देगा, यहां पर बाप से बेटे का रिश्ता टूट जाता है। कवि मोहन मुंतजिर ने कहा, तरस जाओगे जन्नत को अगर मां-बाप रोएंगे, किसी लड़की की खातिर भूलकर भी जान मत देना।
विज्ञापन
वसीम मंजर गोरखपुरी ने पढ़ा, कल तक जो गजल कैद थी रुखसार व जुल्फ में, अब फिक्र महजबीन से बाहर निकल गई। मुशायरे का संचालन जमील अख्तर जैदपुरी ने किया। मुशायरे के विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री नानकदीन भुर्जी का स्वागत शाहिद अली सिद्दीकी ने किया।
विज्ञापन
मुशायरे का आगाज शायर वसीम रामपुरी ने नात पाक पढ़कर किया। जमील अख्तर जैदपुरी ने पढ़ा, मंदिर में भजन और हैं मस्जिद में अजानें, दुनियां में देश की पहचान यही है। हस्सान साहिर फतेहपुरी ने पढ़ा, लब कुशाई की जरूरत भी है जुल्म जबर पर, तू भी मुजरिम समझा जाएगा अगर खामोश है।
विज्ञापन
वसीकुर्रहमान शफक ने पढ़ा, परिंदे ने एक दिन शिकारी से पूछा, मैं कैद हूं जबकि खता कुछ भी नहीं है। वसीम रामपुरी ने सुनाया, ये हश्र है यहां पर कोई एक नेकी नहीं देगा, यहां पर बाप से बेटे का रिश्ता टूट जाता है। कवि मोहन मुंतजिर ने कहा, तरस जाओगे जन्नत को अगर मां-बाप रोएंगे, किसी लड़की की खातिर भूलकर भी जान मत देना।
विज्ञापन
वसीम मंजर गोरखपुरी ने पढ़ा, कल तक जो गजल कैद थी रुखसार व जुल्फ में, अब फिक्र महजबीन से बाहर निकल गई। मुशायरे का संचालन जमील अख्तर जैदपुरी ने किया। मुशायरे के विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री नानकदीन भुर्जी का स्वागत शाहिद अली सिद्दीकी ने किया।