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पहाड़ी क्षेत्र में हुई बारिश से उफनाई सरयू, तराई में हड़कंप

Thu, 15 Jul 2021 12:33 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 12:33 AM IST
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water level increase in saryu
कोटवाधाम (बाराबंकी)। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों पर भी दिखाई देने लगा है। मंगलवार को पहाड़ी इलाकों का पानी बैराजों तक पहुंचा तो करीब ढाई लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ दिया गया। जिससे खामोश हुई सरयू की उफान के तीखे तेवर देख तराई में हड़कंप मच गया है।
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सरयू के रौद्र रूप से सिरौलीगौसपुर, रामसनेहीघाट व रामनगर तहसील के दर्जनों गांवों में बाढ़ व कटान का संकट मंडराने लगा है। ऐसे में कटान रोकने के इंतजाम पर भी बाढ़ की चोट का खतरा बना हुआ है। मगर, प्रशासन सरयू के जलस्तर को खतरे के निशान तक पहुंचने का इंतजार कर रहा है।
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जिले में सरयू की बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। प्री मानसून की बारिश में अपना रौद्र रूप दिखा चुकी सरयू अब पहाड़ी क्षेत्र में हुई बारिश के पानी से तराई के हालात बिगाड़ने को आतुर होती दिख रही है। सरयू में ढाई क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद जिस तरह से सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है।
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ऐसे में अगर फिर पानी छोड़ा गया तो सरयू के हालात बेकाबू होंगे। हाल में ही सिरौलीगौससपुर के तेलवारी गांव में जहां पर सरयू की कटान रोकने का बाढ़ खण्ड ने कार्य करा कराया था। जलस्तर बढ़ने से उस पर फिर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि खतरा देख बाढ़ खंड ने कटान वाले स्थलों पर जेसीबी मशीन व मजदूरों को लगाकर उसे रोकने का काम शुरू करा दिया है।
दूसरे प्रांतों में हो रही बारिश से बाढ़ के खतरे की आहट से ही लोग अपनी नाव व अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर अपना अस्थाई ठिकाना बनाने लगे हैं। इस सीजन लगातार दूसरी बार नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। पहली बार बढ़ा जलस्तर नदी में रह गया था मगर इस बार बढ़े जलस्तर से आसपास स्थित गांव को बाढ़ का खतरा साफ दिखाई दे रहा है।
दो सप्ताह पहले बढ़े जलस्तर से सिर्फ तेलवारी गांव में कटान हुई थी जिसमें चार घर नदी में समा गए थे। मगर, अब तेलवारी गांव के पास कटान का कोई ज्यादा खतरा नहीं है। पूरे बाढ़ क्षेत्र में कहीं भी बाढ़ चौकी का निर्माण नहीं कराया गया है। यही नहीं प्रशासन अभी तक कोई नाव भी मुहैया नहीं करा पाया है।
इस संबंध में सिरौलीगौसपुर तहसील के उप जिलाधिकारी सुरेंद्र पाल विश्वकर्मा ने बताया कि अभी नदी खतरे के निशान से नीचे है। जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। जैसे ही पानी गांव की ओर प्रवेश करता है वैसे ही सारी व्यवस्था कर दी जाएगी। पूरा प्रशासन इसको लेकर अलर्ट मोड पर है।
हर बार बाढ़ से प्रभावित होते दो दर्जन गांव
सिरौलीगौसपुर तहसील के करीब दो दर्जन से ज्यादा गांव हर बार बाढ़ से प्रभावित होते हैं जिनमें टेपरा तेलवारी भयकपुराव, सरायसुर्जन, सनावा, वीहड़, कहरानपुरवा, भैरवकोल, गोबरहा, बाबूरी, सिरौलीगुंग कोठीडीहा, परसवाल, बेहटा, नव्वनपुरवा व इटहुवा आदि गांव हर बार बाढ़ से प्रभावित होते हैं। यहां के ज्यादा से ज्यादा लोग तिरपाल व पन्नी की झोपड़ी बनाकर अपने परिवार व मवेशियों के साथ दो माह का समय अलीनगर रानी मऊ तटबंध पर गुजारते हैं। मगर, तहसील प्रशासन ने अभी तक बांध की साफ सफाई तक नहीं कराई है।

अलर्ट मोड में स्वास्थ्य विभाग
कोटवाधाम। बाढ़ की आहट से ही तराई क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है। सीएचसी सिरौलीगौसपुर के अधीक्षक डॉ. संतोष सिंह ने बाढ़ की आहट सुनते ही तराई क्षेत्र के वीहड़, सनावा व कहरानपुरवा आदि गांव में एंबुलेंस से जाकर पूरे क्षेत्र में निशुल्क दवा वितरण कराया। वहीं गर्भवती महिलाओं व बच्चों को बाढ़ से बचाव के टिप्स दिए। पानी आने के बाद जिन गांव में दवा का छिड़काव होना है उनका खाका तैयार किया।
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