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जलस्तर घटते ही तटबंध पर मंडराया खतरा
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Thu, 21 Jul 2016 11:26 PM IST
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डीएम ने किया निरीक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा के घटते जलस्तर से तटबंध पर कटान शुरू हो गयी है। कटान को देखकर बांध पर मौजूद अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। तेजी से बढ़ा घाघरा का पानी गुरुवार को घटते समय अपनी धारा को तेजी से बदल रहा है। बांध से पानी का टकराव रोकने के लिए बनाये गये कटवन से पानी टकराकर सीधे बांध पर टिकने लगा है। जलस्तर घटने के साथ ही मसीना (एक प्रकार का चक्रवात) व कटान की सभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
बांध को बचाने के लिए कटवन के नोज सहित सभी कटरों व स्परों पर एक मीटर ऊंचा छठवां लेयर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। क्योंकि पहले लगाए गए पांच लेयर पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। हालांकि पानी कम होने के साथ-साथ डूब चुके कटर दिखने लगे हैं। जानकार बताते हैं कि पानी घटने की प्रक्रिया शुरू होते ही कटान व मसीना का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए गुरुवार से शुक्रवार की रात तक कटवन सहित स्पर दो से चार के बीच के बांध पर खतरा बरकरार रहेगा। ग्रामीण जगेसर ने बताया कि अगर कटवन कटा तो बांध को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। जिससे नकहरा, गौरा, रायपुर, परसावल, काशीपुर सहित गोंडा जनपद के दर्जनों गांव चपेट में आ जाएंगे।
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लगातार रखी जा रही नजर
बांध पर लगातार कैंप कर रहे अधिशासी अभियंता बाढ़ आरवी सिंह ने बताया कि नदी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी के बहाव में कोई परिवर्तन होता है तो दिक्कत आ सकती है। गुरुवार सुबह आठ बजे ली गयी माप में 2 लाख 71 हजार का डिस्चार्ज रहा।
डिस्चार्ज अधिक होने के साथ साथ नदी की दोनों धाराएं आपस में मिल गयी हैं। जिससे नदी का रुख पल-पल बदल रहा है। फिलहाल खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता, पर खतरा अभी बांध से दूर है।
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बांध को बचाने के लिए कटवन के नोज सहित सभी कटरों व स्परों पर एक मीटर ऊंचा छठवां लेयर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। क्योंकि पहले लगाए गए पांच लेयर पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। हालांकि पानी कम होने के साथ-साथ डूब चुके कटर दिखने लगे हैं। जानकार बताते हैं कि पानी घटने की प्रक्रिया शुरू होते ही कटान व मसीना का खतरा बढ़ जाता है।
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इसलिए गुरुवार से शुक्रवार की रात तक कटवन सहित स्पर दो से चार के बीच के बांध पर खतरा बरकरार रहेगा। ग्रामीण जगेसर ने बताया कि अगर कटवन कटा तो बांध को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। जिससे नकहरा, गौरा, रायपुर, परसावल, काशीपुर सहित गोंडा जनपद के दर्जनों गांव चपेट में आ जाएंगे।
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लगातार रखी जा रही नजर
बांध पर लगातार कैंप कर रहे अधिशासी अभियंता बाढ़ आरवी सिंह ने बताया कि नदी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी के बहाव में कोई परिवर्तन होता है तो दिक्कत आ सकती है। गुरुवार सुबह आठ बजे ली गयी माप में 2 लाख 71 हजार का डिस्चार्ज रहा।
डिस्चार्ज अधिक होने के साथ साथ नदी की दोनों धाराएं आपस में मिल गयी हैं। जिससे नदी का रुख पल-पल बदल रहा है। फिलहाल खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता, पर खतरा अभी बांध से दूर है।