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Barabanki News: वार्ड फुल, अब बेंचों पर लिटाकर हो रहा इलाज
Sun, 28 Jul 2024 03:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 28 Jul 2024 03:56 AM IST
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इमरजेंसी में बेंच पर किया जा रहा मरीज का इलाज। संवाद
बाराबंकी। इमरजेंसी वार्ड से स्ट्रेचर हटने के बाद यहां के सभी वार्ड मरीजों से भर गए हैं। मरीजों को अब बेंच पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। इमरजेंसी की बदहाल व्यवस्था देख ज्यादातर मरीज बिना इलाज के ही लौट जा रहे हैं।
जिलाधिकारी की सख्ती के बाद इमरजेंसी से स्ट्रेचर तो हटा दिए गए परंतु इसकी जगह पर कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते यहां आने वाले मरीजों को वार्डों में भर्ती किए जाने के बाद ही दो दिन के अंदर इमरजेंसी के सभी बेड फुल हो गए हैं।
शनिवार को आपातकालीन कक्ष भी मरीजों से भरा हुआ दिखा। एक किनारे रामप्रसाद को बेंच पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था जबकि सुषमा, रामप्रवेश और गौतम फर्श पर बैठे अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
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इन लोगों ने बताया कि मौजूदा कर्मी सीधे मुंह बात नहीं करते हैं और कहते हैं कि अभी बेड नहीं खाली हैं, जब खाली होंगे तभी इलाज की सुविधा मिल पाना संभव है। इसके चलते ज्यादातर मरीज निराश होकर लौट जा रहे हैं और निजी अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं।
इस बावत चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा कहते हैं कि इमरजेंसी में बेडों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। बेंच और स्ट्रेचर पर इलाज पर पूरी तरह से रोक है, ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़े
जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को 1552 मरीज देखे गए। इस दौरान सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, जुकाम और बुखार के रहे। इसके अलावा पेटदर्द और त्वचा रोग के मरीज भी ओपीडी में आए। ओपीडी में सुबह से ही मरीजाें की भीड़ बढ़ने लगी थी। देखते ही देखते पूरी ओपीडी मरीजों से भर गई। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में आए बदलाव की वजह से मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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जिलाधिकारी की सख्ती के बाद इमरजेंसी से स्ट्रेचर तो हटा दिए गए परंतु इसकी जगह पर कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते यहां आने वाले मरीजों को वार्डों में भर्ती किए जाने के बाद ही दो दिन के अंदर इमरजेंसी के सभी बेड फुल हो गए हैं।
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शनिवार को आपातकालीन कक्ष भी मरीजों से भरा हुआ दिखा। एक किनारे रामप्रसाद को बेंच पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था जबकि सुषमा, रामप्रवेश और गौतम फर्श पर बैठे अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
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इन लोगों ने बताया कि मौजूदा कर्मी सीधे मुंह बात नहीं करते हैं और कहते हैं कि अभी बेड नहीं खाली हैं, जब खाली होंगे तभी इलाज की सुविधा मिल पाना संभव है। इसके चलते ज्यादातर मरीज निराश होकर लौट जा रहे हैं और निजी अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं।
इस बावत चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा कहते हैं कि इमरजेंसी में बेडों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। बेंच और स्ट्रेचर पर इलाज पर पूरी तरह से रोक है, ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़े
जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को 1552 मरीज देखे गए। इस दौरान सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, जुकाम और बुखार के रहे। इसके अलावा पेटदर्द और त्वचा रोग के मरीज भी ओपीडी में आए। ओपीडी में सुबह से ही मरीजाें की भीड़ बढ़ने लगी थी। देखते ही देखते पूरी ओपीडी मरीजों से भर गई। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में आए बदलाव की वजह से मरीजों की संख्या बढ़ी है।