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Barabanki News: फर्जी फर्म से 33 करोड़ का लेन-देन, दो पर केस दर्ज

Thu, 24 Jul 2025 01:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Thu, 24 Jul 2025 01:08 AM IST
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Transaction of Rs 33 crore with a fake firm, case filed against two
बाराबंकी। जिले में फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों की जीएसटी चोरी करने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। महज 10 दिन में चार मामलों में मुकदमे दर्ज होने के बाद अब दो और नई फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों के लेन-देन का खुलासा हुआ है।
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मेरठ व मऊ के कारोबारियों द्वारा करीब 33 करोड़ की कर चोरी सामने आई है। दिलचस्प बात यह है कि जिन पते पर यह फर्में पंजीकृत थीं, वहां न तो कोई किराएदार मिला और न ही फर्म के संचालित होने का कोई प्रमाण।
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अयोध्या जीएसटी जोन की एसआईबी टीम की असिस्टेंट कमिश्नर अल्पना वर्मा की तहरीर पर शहर कोतवाली में दोनों मामलों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इन फर्मों ने न केवल भारी-भरकम फर्जी बिक्री दिखाई, बल्कि करोड़ों रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट भी पास ऑन किया।
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जीएसटी टीम ने सफेदाबाद के निकट अस्पताल के पास पंजीकृत चौहान इंटरप्राइजेज नामक फर्म का विश्लेषण किया। कागजों में फर्म मालिक अजीत प्रताप चौहान, निवासी बिलौली सोनबरसा जनपद मऊ दर्ज हैं।
यह फर्म 2023-24 और 2024-25 में किसी भी इनवर्ड सप्लाई का विवरण नहीं दिखा रही थी, लेकिन 22 नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक की अवधि में 7.19 करोड़ रुपये की आउटवर्ड सप्लाई मतलब बिक्री दिखाई गई, जिस पर 1.28 करोड़ रुपये की आईटीसी पास ऑन की गई।
विस्तृत जांच में पता चला कि इस फर्म ने कुल एक अरब 45 करोड़ 82 लाख रुपये की बिक्री दिखाई और 24 करोड़ रुपये का आईटीसी पास ऑन कर दिया। बिक्री में स्क्रैप, तांबा, लोहा दिखाया गया। दूसरी फर्जी फर्म का नाम ए एंटरप्राइजेज है। जिसे माती बाजार के पते पर दिखाया गया है। जीएसटी जांच टीम जब यहां पहुंची तो न फर्म का कोई अस्तित्व था और न ही कोई दस्तावेज। फर्म स्वामी के तौर पर मेरठ के मदरसा वाली गली निवासी गुफरान का नाम आधार कार्ड में दर्शाया गया है जबकि किराएदार के रूप में सुनील कुमार का नाम दर्ज है, लेकिन मौके पर दोनों नहीं मिले।

इस फर्म ने चार फरवरी 2024 से अब तक 40.16 लाख रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दिखाई है, लेकिन इनवर्ड सप्लाई का कोई विवरण नहीं है और न ही कोई जीएसटी फाइलिंग की गई है। प्रारंभिक निष्कर्ष में यह स्पष्ट हुआ कि फर्म केवल आईटीसी पास ऑन करने के लिए बनाई गई थी। शहर कोतवाल आरके राणा ने बताया कि असिस्टेंट कमिश्नर की ओर से दी गई तहरीर पर दोनों फर्मों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है नेटवर्क की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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