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Barabanki News: 25 किमी विकास की धूप में कुर्बान होगी 7400 पेड़ों की छांव

Sat, 25 Apr 2026 02:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sat, 25 Apr 2026 02:11 AM IST
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The shade of 7400 trees will be sacrificed in the heat of 25 km development.
बाराबंकी। लखनऊ इटौंजा से कुर्सी, देवा होते हुए चिनहट तक करीब 27 किमी लंबे आउटर फोरलेन बनाने में 7400 पेड़ों की छांव कुर्बान हो जाएगी। वन विभाग ने पीडब्ल्यूडी के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसकी ऑनलाइन अनुमति भी जारी हो चुकी है। कटने वाले पेड़ों में बड़ी संख्या फलदार और दशकों पुराने वृक्षों की है, जिनकी छांव और पर्यावरणीय भूमिका को लेकर अब सवाल खड़े हो गए हैं।
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आउटर फोरलेन सड़क को बनाने को लेकर 468 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति एक साल पहले मिली थी। अब टेंडर भी हो चुका है। पूरी कार्ययोजना तैयार हो गई है। मौजूदा समय में कुर्सी-देवा-चिनहट मार्ग के किनारे लगे आम, नीम, जामुन और पीपल जैसे पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि गांवों की पहचान हैं।
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गर्मी के मौसम में यही पेड़ राहगीरों के लिए राहत बनते हैं। इस गर्मी में राहगीर पेड़ों की छांव में सुस्ताते हैं। ग्रामीण कह रहे हैं कि अभी 45 डिग्री में भी ये पेड़ राहत देते हैं। जब ये पेड़ कट जाएंगे तो सड़क तो चौड़ी हो जाएगी, लेकिन लोग धूप में झुलसेंगे।
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वहीं वन विभाग का तर्क है कि एक के बदले दस के फॉर्मूले से ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि 7400 पेड़ों की छपान की अनुमति मिली है। इसी के साथ कटने वाले पेड़ों के स्थान पर 74,000 पौधे लगाने की योजना है।


लखनऊ-अयोध्या हाईवे बानगी है...
सवाल यह है कि दशकों पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे कितने साल में वही छांव और पारिस्थितिकी तंत्र दे पाएंगे? लोग लखनऊ-अयोध्या हाईवे का उदाहरण देते हैं। 15 साल पहले छांव वाली सड़क भले ही फोरलेन हो गई और किनारों पर पौधे लगाए गए, मगर हालात यह है कि छांव खोजनी पड़ती है।




प्रदूषण में बढ़ोतरी, जल स्तर पर असर
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान से स्थानीय तापमान में वृद्धि होगी। भूमिगत जल स्तर पर असर पड़ेगा। धूल और प्रदूषण में बढ़ोतरी जैसे परिणाम सामने आ सकते हैं। खासतौर पर लखनऊ-बाराबंकी आउटर बेल्ट पहले ही गर्मी और ट्रैफिक दबाव से जूझ रहा है।
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