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Barabanki News: आवंटन के बाद भी बजट खर्च करने में नाकाम रहे जिम्मेदार

Sun, 06 Apr 2025 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sun, 06 Apr 2025 12:47 AM IST
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The responsible persons failed to spend the budget even after allocation
बाराबंकी। आवंटन के बाद भी बजट राशि का करोड़ों रुपये खर्च करने में स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई सहित करीब आधा दर्जन से अधिक विभाग नाकाम रहे। विभाग से जुड़े जिम्मेदारों ने शासन स्तर से प्रस्तावित कार्ययोजनाओं के खर्च के लिए आवंटित बजट राशि को खर्च करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस कारण 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में खाते में मौजूद करोड़ों की बजट राशि उपयोग न हो पाने के कारण शासन को वापस सरेंडर करना पड़ा।
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स्वास्थ्य विभाग को इस वित्तीय वर्ष में करीब 136 करोड़ रुपये का बजट अलग-अलग मदों में मिला था। लेकिन विभाग सात करोड़ रुपये खर्च न हो पाने के कारण इसे सरेंडर करना पड़ा। आवंटन के बाद भी संबंधित वित्तीय वर्ष में इस धनराशि को खर्च क्यों नहीं किया जा सका, इसे लेकर अब जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं। इसी तरह शिक्षा विभाग को करीब 989 करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि खर्च के लिए मिली थी। लेकिन यहां पर बजट राशि को खर्च में करने में जिम्मेदार उदासीन दिखे। इस कारण विभाग को बिना खर्च रही 6.81 करोड़ की धनराशि सरेंडर करना पड़ी।
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सिंचाई विभाग को भी करीब 197 करोड़ रुपया मिला लेकिन तमाम जरूरत के बाद भी इसे खर्च करने में उदासीनता बरतने के कारण करीब 2.42 करोड़ रुपये की धनराशि विभाग को सरेंडर करना पड़ी। इसी प्रकार पुलिस विभाग जहां आवंटित बजट में से 81 लाख रुपया नहीं खर्च कर पाया है वहीं कृषि विभाग की भी 10 लाख रुपये की धनराशि खर्च न हो पाने के कारण सरेंडर करना पड़ी। आवंटित धनराशि को खर्च करने में बरती गई लापरवाही और सरेंडर की गई बजट राशि को लेकर अब जिम्मेदारों चुप्पी साधे हैं।
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पैसा होने के बाद भी नहीं किया भुगतान
विभाग ने सामग्री की खरीद कर ली, लेकिन जब भुगतान का समय आया तो बजट न होने की बात कहकर भुगतान से हाथ खड़े कर दिए गए। जबकि सामग्री की आपूर्ति करने वाले विभागीय अधिकारियों के चक्कर काटते रहे परंतु जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया यदि इसे गंभीरता से लिया होता और भुगतान कर दिया होता तो बजट सरेंडर करने की नौबत नहीं आती।


वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तक विभागों द्वारा जितने भी बिल भेजे गए उन सभी का भुगतान करा दिया गया। जो विभाग बजट नहीं खर्च कर पाए उसे सरेंडर करा दिया गया है।
अमित कुमार, वरिष्ठ कोषागार अधिकारी
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