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सर्वांगीण विकास करने वाला हो जनप्रतिनिधि
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Tue, 17 Jan 2017 10:57 PM IST
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बुद्धिजीवियों ने किया मंथन
- फोटो : अमर उजाला
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जो रब है वही राम है का संदेश देने वाली देवा-महादेवा की धरती पर भ्रष्टाचारी माफिया व सिस्टम से अलग राह पर चलकर जनता के बजाय अपना विकास करने वाला विधायक नहीं होना चाहिए। आजादी के दशकों के बाद जिले में औद्योगिक इकाइयां बंद होती गईं। उत्पादन में अव्वल होने के बाद किसानों को फसल का उचित दाम नहीं मिला। भीषण बाढ़ की चपेट से लाखों की आबादी जूझती रही।
राजधानी के निकट होने के बावजूद शहर में सीवर लाइन बिछाने की समस्या जनप्रतिनिधियों के दिलो-दिमाग से दूर रही। आने वाले समय में सिस्टम को पालन करने वाला साहित्य और इतिहास को संरक्षित करने के साथ ही युवा जनप्रतिनिधि को चुनें। यही नहीं भ्रष्ट, माफिया व खुद की जेब भरने वाले प्रत्याशियों का विरोध करें।
विधानसभा चुनाव-2017 के मद्देनजर नगर पालिका के शिवसिंह सरोज हाल में मंगलवार को आयोजित अमर उजाला के फोकस ग्रुप कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों ने विधायक के चयन पर यह विचार समाने आए। करीब दो घंटे तक चले संवाद में साहित्यकार, चिकित्सक, डॉक्टर, किसान, व्यापारी, खिलाड़ी से लेकर सभी वर्ग के बुद्धिजीवियों ने मंथन किया।
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विचार-विमर्श में आया कि आज के अधिकांश जनप्रतिनिधि जनता के बजाए खुद के विकास में लगे रहते हैं। विधायक चुनने से पहले प्रत्याशी की पार्टी के घोषणा पत्र उसकी छवि विकास की सोच रखने वाली हो। इतना ही नहीं जाति-पांति से उठकर अपने को नहीं जनता को पोषित करने वाले को चुनें।
मंथन में कहा कि चुनने के बाद जनप्रतिनिधि उड़ाकादल न बने जनता के बीच में रहे। यहां के अधिकांश जनप्रतिनिधि नजदीक होने के बावजूद राजधानी भाग जाते हैं। यही कारण है कि जिला लगातार औद्योगिक, व्यापारिक, खेती से जुड़ा वर्ग लगातार पिछड़ता चला गया। लोगों ने यह भी कहा कि अब युग युवाओं का आ गया है। बुजुर्ग उनका सहयोग कर आगे बढ़ाएं।
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राजधानी के निकट होने के बावजूद शहर में सीवर लाइन बिछाने की समस्या जनप्रतिनिधियों के दिलो-दिमाग से दूर रही। आने वाले समय में सिस्टम को पालन करने वाला साहित्य और इतिहास को संरक्षित करने के साथ ही युवा जनप्रतिनिधि को चुनें। यही नहीं भ्रष्ट, माफिया व खुद की जेब भरने वाले प्रत्याशियों का विरोध करें।
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विधानसभा चुनाव-2017 के मद्देनजर नगर पालिका के शिवसिंह सरोज हाल में मंगलवार को आयोजित अमर उजाला के फोकस ग्रुप कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों ने विधायक के चयन पर यह विचार समाने आए। करीब दो घंटे तक चले संवाद में साहित्यकार, चिकित्सक, डॉक्टर, किसान, व्यापारी, खिलाड़ी से लेकर सभी वर्ग के बुद्धिजीवियों ने मंथन किया।
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विचार-विमर्श में आया कि आज के अधिकांश जनप्रतिनिधि जनता के बजाए खुद के विकास में लगे रहते हैं। विधायक चुनने से पहले प्रत्याशी की पार्टी के घोषणा पत्र उसकी छवि विकास की सोच रखने वाली हो। इतना ही नहीं जाति-पांति से उठकर अपने को नहीं जनता को पोषित करने वाले को चुनें।
मंथन में कहा कि चुनने के बाद जनप्रतिनिधि उड़ाकादल न बने जनता के बीच में रहे। यहां के अधिकांश जनप्रतिनिधि नजदीक होने के बावजूद राजधानी भाग जाते हैं। यही कारण है कि जिला लगातार औद्योगिक, व्यापारिक, खेती से जुड़ा वर्ग लगातार पिछड़ता चला गया। लोगों ने यह भी कहा कि अब युग युवाओं का आ गया है। बुजुर्ग उनका सहयोग कर आगे बढ़ाएं।