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Barabanki News: प्रधान-सचिव दिखाएंगे चेहरा तब होगा भुगतान, एप लॉन्च
Sat, 10 May 2025 11:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 10 May 2025 11:48 PM IST
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बाराबंकी। जिले की 1155 ग्राम पंचायतों और 1835 राजस्व गांवों में अब भुगतान में ओटीपी से डोंगल चलाकर होने वाला फर्जीवाड़ा थमेगा। भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए अब प्रधान व सचिव द्वारा चेहरा दिखाने पर ही भुगतान होगा। भुगतान के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम की नई व्यवस्था को लागू कर इसका एप लॉन्च किया है। इससे अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के चेहरे की पहचान बाद ही कोई भुगतान हो सकेगा।
अभी तक ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का प्रस्ताव प्रधान और सचिव मिलकर तैयार करते थे, जिसे ऑनलाइन अपलोड किया जाता था। इसके बाद चेकर (प्रधान) और मेकर (सचिव) की जोड़ी ओटीपी आधारित सिस्टम से भुगतान करती थी। इस प्रक्रिया में कई बार मौके पर मौजूद रहे बिना भुगतान कर लाखों का फर्जीवाड़ा हो जाता था। इस खामी को खत्म करने के लिए अब चेहरे की पहचान वाले फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम को प्रयोग में लाया जाएगा।
नई व्यवस्था को अमल में लाने के लिए तैयार एप में ग्राम प्रधान और सचिव की प्रोफाइल उनके चेहरे की स्कैनिंग से बनाई जाएगी। जब यह दोनों अपने मोबाइल एप पर चेहरा दिखाएंगे, तभी उनकी प्रोफाइल खुलेगी ग्राम प्रधान और सचिव को पंचायत घर या मिनी सचिवालय के अंदर लगे सिस्टम के सामने जाने के बाद चेहरा दिखाने पर ही भुगतान होगा। इससे न केवल पारदर्शिता आएगी वरन ग्राम विकास से जुड़े कार्यों में सीधी जवाबदेही भी तय हो सकेगी। (संवाद)
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पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद विस्तार
इस प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट प्रदेश की कुछ ग्राम पंचायत में किया गया। जिले में छह महीने पहले हैदरगढ़ ब्लॉक की गोतौना पंचायत में इसका प्रयोग किया गया था। जहां यह सिस्टम सफल साबित हुआ, उसके बाद इसे पूरे जिले में लागू करने का फैसला लिया गया। पिछले 15 दिनों से सभी ग्राम प्रधानों और सचिवों को एप डाउनलोड कराकर उनकी प्रोफाइल तैयार कराई गई है।
पंचायतों में एक करोड़ तक का टर्नओवर
बाराबंकी जिले की ग्राम पंचायतें सालाना 20 से 50 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक का टर्नओवर करती हैं। ऐसे में पारदर्शी भुगतान प्रणाली से फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा और सरकारी फंड का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
सारा हिसाब किताब डिजिटल
अब हर ग्राम पंचायत को पाई-पाई का भुगतान व हिसाब डिजिटल सिस्टम से होगा, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। एप आधारित नई व्यवस्था से विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी।
नीतीश भोंडले, जिला पंचायत राज अधिकारी
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अभी तक ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का प्रस्ताव प्रधान और सचिव मिलकर तैयार करते थे, जिसे ऑनलाइन अपलोड किया जाता था। इसके बाद चेकर (प्रधान) और मेकर (सचिव) की जोड़ी ओटीपी आधारित सिस्टम से भुगतान करती थी। इस प्रक्रिया में कई बार मौके पर मौजूद रहे बिना भुगतान कर लाखों का फर्जीवाड़ा हो जाता था। इस खामी को खत्म करने के लिए अब चेहरे की पहचान वाले फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम को प्रयोग में लाया जाएगा।
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नई व्यवस्था को अमल में लाने के लिए तैयार एप में ग्राम प्रधान और सचिव की प्रोफाइल उनके चेहरे की स्कैनिंग से बनाई जाएगी। जब यह दोनों अपने मोबाइल एप पर चेहरा दिखाएंगे, तभी उनकी प्रोफाइल खुलेगी ग्राम प्रधान और सचिव को पंचायत घर या मिनी सचिवालय के अंदर लगे सिस्टम के सामने जाने के बाद चेहरा दिखाने पर ही भुगतान होगा। इससे न केवल पारदर्शिता आएगी वरन ग्राम विकास से जुड़े कार्यों में सीधी जवाबदेही भी तय हो सकेगी। (संवाद)
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पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद विस्तार
इस प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट प्रदेश की कुछ ग्राम पंचायत में किया गया। जिले में छह महीने पहले हैदरगढ़ ब्लॉक की गोतौना पंचायत में इसका प्रयोग किया गया था। जहां यह सिस्टम सफल साबित हुआ, उसके बाद इसे पूरे जिले में लागू करने का फैसला लिया गया। पिछले 15 दिनों से सभी ग्राम प्रधानों और सचिवों को एप डाउनलोड कराकर उनकी प्रोफाइल तैयार कराई गई है।
पंचायतों में एक करोड़ तक का टर्नओवर
बाराबंकी जिले की ग्राम पंचायतें सालाना 20 से 50 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक का टर्नओवर करती हैं। ऐसे में पारदर्शी भुगतान प्रणाली से फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा और सरकारी फंड का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
सारा हिसाब किताब डिजिटल
अब हर ग्राम पंचायत को पाई-पाई का भुगतान व हिसाब डिजिटल सिस्टम से होगा, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। एप आधारित नई व्यवस्था से विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी।
नीतीश भोंडले, जिला पंचायत राज अधिकारी