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Barabanki News: सजा पर भारी पड़ी तीन कैदियों की सज्जनता
Thu, 30 Jan 2025 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 30 Jan 2025 12:06 AM IST
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बाराबंकी। अगर आचरण अच्छा है तो व्यक्ति के लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं होता। इसको सही साबित करते हुए हत्या जैसे जघन्य अपराध में आजीवन कारावास की सजा काट रहे तीन कैदियों की सजा उनके अच्छे आचरण व सज्जनता के कारण समय से पहले माफ कर उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया है। अब यह तीनों अपना बाकी जीवन घर परिवार के साथ रहकर बिता सकेंगे। रिहाई के बाद तीनों के परिवारों में उल्लास का माहौल है। बीस साल बाद परिजनों से मिलने पर सभी की आंखों में खुशी के आंसू दिखे।
दरियाबाद कोतवाली क्षेत्र के बक्सूपुर गांव में करीब 21 साल पहले हुई हत्या की घटना में गांव के संगमलाल व जनवरी कुमार को 14 जुलाई 2008 को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 31 मई को हाईकोर्ट ने भी सजा को यथावत रखा था। दोनों आदर्श कारागार लखनऊ में सजा काट रहे थे। इसी तरह करीब 22 साल पहले हुई हत्या के मामले में असंद्रा थाना क्षेत्र के सरैया मजरे अमहिया गांव के विजय कुमार को उम्रकैद की सजा हुई थी। संतराम वाराणसी जेल में सजा काट रहा था।
इन तीनों कैदियों ने सजा के दौरान जेल में अपने अच्छे आचरण से अधिकारियों का दिल जीत लिया। जेल में इनको भंडार प्रभारी जैसे दायित्व दिए गए जिसे इन्होंने पूरी जिम्मेदारी से पूरा कर अन्य कैदियों को भी अच्छे आचरण के लिए प्रेरित किया। साल 2022 में स्वतंत्रता दिवस पर विजय कुमार को, 16 नवंबर 2024 को संगमलाल व स्वतंत्रता दिवस 2024 में जनवरी को जेल से रिहा करने का फैसला शासन ने लिया था। इसे लेकर बीते 24 व 25 जनवरी को आदेश जारी हुआ तो तीनों को 20 साल से अधिक समय बाद जेल से रिहा किया गया।
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आसान नहीं है समय से पूर्व रिहाई
आजीवन कारावास का मतलब पूरी जिंदगी जेल में बिताना होता है। हत्या के अपराध में यह सजा मिलने के बाद समय से पहले रिहा होना बहुत चुनौती भरा होता है। जेल के आचरण के अलावा इस बात की भी पुष्टि की जाती है कि कैदी के जेल के बाहर आने के बाद समाज कोई खतरा तो नहीं है। बाराबंकी के जेलर संतोष तिवारी ने बताया कि घोषणा के बाद प्रक्रिया पूरी करने में भी समय लगता है।
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दरियाबाद कोतवाली क्षेत्र के बक्सूपुर गांव में करीब 21 साल पहले हुई हत्या की घटना में गांव के संगमलाल व जनवरी कुमार को 14 जुलाई 2008 को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 31 मई को हाईकोर्ट ने भी सजा को यथावत रखा था। दोनों आदर्श कारागार लखनऊ में सजा काट रहे थे। इसी तरह करीब 22 साल पहले हुई हत्या के मामले में असंद्रा थाना क्षेत्र के सरैया मजरे अमहिया गांव के विजय कुमार को उम्रकैद की सजा हुई थी। संतराम वाराणसी जेल में सजा काट रहा था।
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इन तीनों कैदियों ने सजा के दौरान जेल में अपने अच्छे आचरण से अधिकारियों का दिल जीत लिया। जेल में इनको भंडार प्रभारी जैसे दायित्व दिए गए जिसे इन्होंने पूरी जिम्मेदारी से पूरा कर अन्य कैदियों को भी अच्छे आचरण के लिए प्रेरित किया। साल 2022 में स्वतंत्रता दिवस पर विजय कुमार को, 16 नवंबर 2024 को संगमलाल व स्वतंत्रता दिवस 2024 में जनवरी को जेल से रिहा करने का फैसला शासन ने लिया था। इसे लेकर बीते 24 व 25 जनवरी को आदेश जारी हुआ तो तीनों को 20 साल से अधिक समय बाद जेल से रिहा किया गया।
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आसान नहीं है समय से पूर्व रिहाई
आजीवन कारावास का मतलब पूरी जिंदगी जेल में बिताना होता है। हत्या के अपराध में यह सजा मिलने के बाद समय से पहले रिहा होना बहुत चुनौती भरा होता है। जेल के आचरण के अलावा इस बात की भी पुष्टि की जाती है कि कैदी के जेल के बाहर आने के बाद समाज कोई खतरा तो नहीं है। बाराबंकी के जेलर संतोष तिवारी ने बताया कि घोषणा के बाद प्रक्रिया पूरी करने में भी समय लगता है।