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Barabanki News: कानून कहता एक साल, केस चल रहे साल दर साल

Sat, 25 Jul 2026 01:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sat, 25 Jul 2026 01:56 AM IST
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The law stipulates one year, yet cases drag on year after year.
बाराबंकी। पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में जहां त्वरित न्याय की आस होती है, वहीं पुलिस की ढिलाई और गवाहों की उदासीनता पीड़ितों पर भारी पड़ जाती है। वर्ष 2018 के ऐसे कई संगीन मामलों में 2019 में ही कोर्ट से आरोप तय हो चुके हैं, लेकिन अभी भी पत्रावलियां साक्षियों के अभाव में लंबित पड़ी हैं।
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न्यायालय की प्रक्रिया पर नजर डालें तो पॉक्सो अधिनियम धारा 35 (2) के तहत मुकदमा दर्ज होने के एक वर्ष के भीतर विचारण पूरा करने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान है। इसके बावजूद गवाहों की सुरक्षा को लेकर डर, पुलिस द्वारा कोर्ट समन और वारंट का समय पर तामीला न कराया जाना, गवाहों को अदालत तक सुरक्षित पहुंचाने की लचर व्यवस्था इस देरी का मुख्य कारण है।
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समय पर गवाही न होने से जहां साक्ष्य धुंधले होने लगते हैं, वहीं कई मामलों में आरोपी जमानत पर बाहर आकर पीड़ितों पर केस वापस लेने का मानसिक दबाव बनाने में कामयाब हो जाते हैं। इसको अदालतों ने गंभीरता से लेते हुए वादी और साक्षी के खिलाफ कई मामलों में प्रकीर्णवाद भी दर्ज कराए हैं। इनमें कई से जुर्माना भी वसूला जा चुका है।
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