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Barabanki News: 22 साल चला मुकदमा, वादी बोला नहीं लिखाई रिपोर्ट
Tue, 05 May 2026 01:41 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 05 May 2026 01:41 AM IST
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बाराबंकी। वर्ष 2004 में हुए एक सड़क हादसे में मौत के मामले में अजब हाल सामने आया। अभियोजन पक्ष ने कोई गवाह ही नहीं पेश किया जबकि वादी ने अदालत में कहा कि उनसे कोई रिपोर्ट ही नहीं दर्ज कराई और ना ही प्रार्थना पत्र पर उनके हस्ताक्षर है। कोर्ट ने आरोपी बनाए गए चालक को बरी कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, जैदपुर के नवाबपुर गांव निवासी राज नारायन ने सितंबर 2004 में अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि 23 अप्रैल 2004 को उनके पिता राम सागर और भाई कुलदीप नारायण रिश्तेदारी में जा रहे थे। इसी दौरान सफदरगंज क्षेत्र के बघौरा गांव के पास एक पिकअप वाहन ने पीछे से टक्कर मार दी, जिससे राम सागर की मौके पर ही मौत हो गई थी।
घटना को एक प्रत्यक्षदर्शी द्वारा देखे जाने का भी दावा किया गया था। पूरे मामले में अभियोजन पक्ष केवल वादी राज नारायन को ही गवाह के रूप में पेश कर सका। अन्य कोई गवाह अदालत में पेश नहीं किया गया। 9 मार्च 2026 को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर भी समाप्त कर दिया गया। अदालत में पेश हुए वादी राज नारायन ने पूर्व के बयान से साफ इन्कार कर दिया।
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अदालत में कहा कि न तो उन्होंने कोई मामला दर्ज कराया और न ही किसी वाहन के बारे में जानकारी है। यहां तक कि उन्होंने पुलिस को कोई बयान भी नहीं दिया था। आखिरकार अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर कुमार ने साक्ष्यों के अभाव और वादी के मुकर जाने के आधार पर आरोपी चालक धर्मेंद्र प्रताप को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
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अभियोजन के अनुसार, जैदपुर के नवाबपुर गांव निवासी राज नारायन ने सितंबर 2004 में अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि 23 अप्रैल 2004 को उनके पिता राम सागर और भाई कुलदीप नारायण रिश्तेदारी में जा रहे थे। इसी दौरान सफदरगंज क्षेत्र के बघौरा गांव के पास एक पिकअप वाहन ने पीछे से टक्कर मार दी, जिससे राम सागर की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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घटना को एक प्रत्यक्षदर्शी द्वारा देखे जाने का भी दावा किया गया था। पूरे मामले में अभियोजन पक्ष केवल वादी राज नारायन को ही गवाह के रूप में पेश कर सका। अन्य कोई गवाह अदालत में पेश नहीं किया गया। 9 मार्च 2026 को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर भी समाप्त कर दिया गया। अदालत में पेश हुए वादी राज नारायन ने पूर्व के बयान से साफ इन्कार कर दिया।
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अदालत में कहा कि न तो उन्होंने कोई मामला दर्ज कराया और न ही किसी वाहन के बारे में जानकारी है। यहां तक कि उन्होंने पुलिस को कोई बयान भी नहीं दिया था। आखिरकार अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर कुमार ने साक्ष्यों के अभाव और वादी के मुकर जाने के आधार पर आरोपी चालक धर्मेंद्र प्रताप को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।